मोदी से वादा कर चीन के साथ चली गई ये अमेरिकी कंपनी
नई दिल्ली। यूएस मोटर कंपनी टेस्ला ने भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मेक इन इंडिया प्रोजेक्ट को तगड़ा झटका दिया है। टेस्ला ने कहा था कि उनकी कंपनी भारत में अपना पहला प्लांट स्थापित करेगी, लेकिन चीन ने इस पूरे प्लान पर पानी फेर दिया है। इलेक्ट्रिक कार बनाने वाली कंपनी टेस्ला अब अपना पहला प्लांट भारत के बजाय शंघाई में स्थापित करने जा रही है। अमेरिकी कंपनी टेस्ला को अपने देश में खड़ी करने के लिए चीन ने मना लिया है।

अमेरिकी अखबार 'द वॉल स्ट्रीट जनरल' के मुताबिक, इलेक्ट्रिक कार कंपनी टेस्ला और शंघाई सरकार के बीच समझौते पर हस्ताक्षर हुए है। जिसमें उन्होंने कहा है कि सिलिकॉन वैली कंपनी को शंघाई ने अपने यहां प्लांट स्थापित करने के लिए आमंत्रित किया है।
द मिंट खबर के मुताबिक, टेस्ला अपनी फैक्ट्री को चीन में स्थापित कर साउथ और साउथ-ईस्ट एशियाई देशों को में निर्यात करना चाह रहा है, इसलिए उन्होंने भारत को प्रस्ताव को नजरअंदाज किया है। खबर के मानें तो ट्रांसपोर्ट मंत्री नितिन गडकरी ने पोर्ट के पास टेस्ला कंपनी को एक जमीन भी सौंपी थी। हालांकि, इस पर जमीन को लेकर कंपनी की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं थी।
गौरतलब है कि पीएम नरेंद्र मोदी ने 2015 में अमेरिका यात्रा पर टेस्ला फैक्ट्री में भी दौरा किया था। उस दौरान टेस्ला प्रमुख एलन मस्क ने कहा था कि भारत संभावनाओं का देश है। एलन मस्क ने भारत के 2030 तक सभी गाड़ियों को इलेक्ट्रिक करने के मिशन की तारीफ की थी।

चीन ने अपनी ठोस रणनीति के बदौलत भारत में स्थापित होने वाली टेस्ला के प्लान और प्लांट दोनों को छीन लिया है। भारत के लिए बहुत बड़ा झटका है।












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