हर तीन मिनट में भारत में सड़क दुर्घटना की वजह से होती है एक मौत
नई दिल्ली। मंगलवार को बीजेपी के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री गोपीनाथ मुंडे की एक सड़क हादसे में असमय मौत हो गई। उनकी मौत से राजनीतिक हलकों का माहौल काफी गमगीन है।
बीजेपी के कद्दावर नेता गोपीनाथ मुंडे की मौत ने एक ऐसे बिंदु की ओर इशारा किया है, जो रोजाना हमारे सामने आता है लेकिन हम शायद इसे हमेशा नजरअंदाज कर देते हैं।
सड़क दुर्घटना एक ऐसी समस्या बनती जा रही है जिसकी वजह से अब ज्ज्यादा से ज्यादा लोगों की मौत असमय हो जाती है। उम्मीद है कि गोपीनाथ मुंडे की मौत के बाद केंद्र सरकार की ओर से इस स्थिति को सुधारने के प्रयास किए जाएंगे।
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की ओर से वर्ष 2013 में जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2012 में 1,39,091 लोगों ने अपनी जान अलग-अलग हिस्सों में हुए 4,40,042 दुर्घटनाओं में गंवा दी थी।
यूनाइटेड नेशंस और वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन की ओर से भी सड़क दुर्घटनाओं के बढ़ते मामलों पर खासी चिंता जाहिर की जा चुकी है।
आगे की स्लाइड्स में देखिए सड़क दुर्घटनाओं से जुड़े कुछ खास जानकारियां।

सड़क दुर्घटना में भारत नंबर वन
भारत में सड़क दुर्घटनाओं पर डब्ल्यूएचओ की ओर से भी चिंता जाहिर की गई है। संगठन की ओर से पिछले वर्ष जारी एक रिपोर्ट की मानें तो सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली मौतों में भारत नंबर वन है। इस रिपोर्ट में कहा गया था कि एक्सीडेंट्स और मौतों की खास वजह तेज रफ्तार, शराब पीकर ड्राइविंग करना, सीट बेल्ट न बांधना और सही इंफ्रास्ट्रक्चर का न होना है।

सड़क परिवहन मंत्रालय की रिपोर्ट
वर्ष 2012 में सड़क परिवहन मंत्रालय की ओर से जारी एक रिपोर्ट की मानें तो देश में हर तीन मिनट में सड़क दुर्घटना में एक व्यक्ति की मौत हो जाती है। डब्लूयएचओ के मुताबिक नियमों की अनदेखी करने की वजह से भी देश में सड़क दुर्घटनाओं में तेजी से इजाफा होता जा रहा है।

लेकिन मौतों में इजाफा
परिवहन मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2010 की तुलना में देश में होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में तो कमी आई है लेनिक इनमें होने वाली मौतों का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है।

10 वर्षों से कायम है रिकॉर्ड
पिछले वर्ष एनसीआरबी की जो रिपोर्ट जारी की गई थी उसके मुताबिक तमिलनाडु देश का ऐसा राज्य है जहां पर सबसे ज्यादा सड़क दुर्घटनाएं होती हैं। राज्य में वर्ष 2012 में कुल 67,757 सड़क दुर्घटनाएं हुई जिनमें से 16,175 लोगों ने अपनी जान गवाईं। 10 वर्षों से तमिलनाडु सड़क दुर्घटनाओं में नंबर वन पर काबिज है।

2012 में 15,109 मौतें
तमिलनाडु के बाद उत्तर प्रदेश का नंबर आता है। यहां पर वर्ष 2012 में 24,478 सड़क दुर्घटनाएं हुईं जिनमें से 15,109 लोगों ने अपनी जान गवाईं। आंध्र प्रदेश में 39,344 एक्सीडेंट्स में 14,966 मौत, महाराष्ट्र में 45,247 एक्सीडेंट्स में 12,936 मौतें दर्ज की गईं। वहीं राजधानी दिल्ली में वर्ष 2012 में 6,937 एक्सीडेंट्स हुए जिनमें 1,866 लोगों की मौत हो गई।

15 से 24 वर्ष की आयु के 30 प्रतिशत लोग
सड़क परिवहन मंत्रालय की ओर से जो रिपोर्ट जारी की गई थी उसमें कहा गया था कि देश में होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में 51.9 % संख्या उन लोगों की है जिनकी उम्र 26 से 65 वर्ष की है। इसके साथ ही
15 से 24 वर्ष की आयु में सड़क हादसों में मारे जाने वाले युवाओं की संख्या 30.3% है।

वर्ष 2011 से 2020 तक
दुनिया भर में बढ़ते सड़क हादसों की वजह से परेशान डब्ल्यूएचओ की ओर से वर्ष 2011 में सड़क सुरक्षा दशक नाम से एक परियोजना को लांच किया गया था। इस परियोजना के तहत लोगों को जागरुक उन्हें सड़क दुर्घटना से बचाने का मकसद रखा गया है।












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