पूर्वी लद्दाख में स्थिति सुलझाने को लेकर आज चीन के साथ राजनयिक स्तर की वार्ता
नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच आज पूर्वी लद्दाख के चार अहम बिंदुओं पर जारी टकराव को खत्म करने के लिए अहम और नाजुक राजनयिक स्तर की मीटिंग होने वाली है। वर्किंग मैकेनिज्म फॉर कंसलटेशन एंड को-ऑर्डिनेशनल ऑन इंडिया-चाइना बॉर्डर अफेयर्स (डब्लूएमसीसी) की इस मीटिंग में दोनों पक्ष इस बात पर चर्चा करेंगे कि दोनों देशों की सेनाएं किस तरह से डिसइंगेजमेंट को आगे बढ़ाएंगी।

सकारात्मक माहौल में हुई वार्ता
मंगलवार को सेना की तरफ से जारी बयान में कहा गया, 'भारत और चीन के बीच मोल्डो में हुई कोर कमांडर स्तर की वार्ता सकारात्मक रही है। बातचीत एक सकारात्मक, आपसी सौहार्द और सृजनात्मक माहौल में हुई।' सेना ने आगे कहा है, 'पीछे हटने को लेकर भी आपसी सहमति बनी है। पूर्वी लद्दाख के सभी विवादित इलाकों से पीछे हटने को लेकर चर्चा हुई और उस पर एक समानता नजर आई। आने वाले दिनों में दोनों पक्षों की तरफ से इसे आगे बढ़ाया जाएगा।' इंडियन आर्मी की तरफ से चीन को स्पष्ट कर दिया गया था कि वह गलवान घाटी को छोड़कर चली जाए और यहां की यथास्थिति को बहाल किया जाए। लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह ने चीन की साउथ शिनजियांग मिलिट्री रीजन के कमांडर मेजर जनरल लियू लिन के साथ मुलाकात की थी।
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चीन ने भी कहा वार्ता अच्छी रही
चीन के विदेश मंत्रालय की तरफ से भी इस पर बयान दिया गया है। सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने विदेश मंत्रालय के हवाले से लिखा है कि सोमवार को हुई कोर कमांडर की मीटिंग 15 जून को गलवान घाटी में हुई हिंसा के बाद पहली मीटिंग थी। मीटिंग के दौरान दोनों पक्षों की तरफ विवाद को वार्ता और सलाह-मशविरे से सुलझाने पर सहमति बनी है। इंग्लिश डेली हिन्दुस्तान टाइम्स की ओर से बताया गया है कि सोमवार को हुई मीटिंग में यह बात भी सामने आई है कि दोनों सेनाओं के जनरल ने पूर्वी लद्दाख के क्षेत्रों पर अपना-अपना दावा पेश किया। सूत्रों के हवाले से अखबार ने लिखा है कि 22 जून को हुई मीटिंग में दोनों पक्ष इस बात पर रजामंद हुए हैं कि टकराव वाले क्षेत्र से पीछे हटना होगा। इस प्रक्रिया में दो हफ्तों तक का समय लग सकता है। यह बात सही है कि भारत और चीन के बीच गलवान घाटी 15 जून को हुई हिंसा के बाद दोनों पक्षों ने हिस्सों पर मजबूती से अपना दावा पेश किया।












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