India China Relation: भारत ने चीन की चालाकी की चित्त, एशियाई साझेदार संग मिलिट्री ड्रिल देख तड़पा ड्रैगन
India China Relation: भारत की बढ़ती ताकत और वैश्विक पहचान से चीन हमेशा विचलित होता रहा है। भारत की चुनौतियां बढ़ाने के लिए एशियाई देशों पर डोरे डालने और उनकी जमीन का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए करना बीजिंग की ताकत रही है। मालदीव, नेपाल, श्रीलंका से लेकर पाकिस्तान तक चीन के कर्ज के बोझ से दबे हैं और इनकी मदद के पीछे ड्रैगन का असली मकसद अपनी ताकत मजबूत करना है। इन चुनौतियों और चीन की चालकियों को समझते हुए भारत भी सतर्कता से ठोस कदम उठा रहा है। भारत ने मंगोलिया के साथ मिलिट्री ड्रिल की है।
India China Relation: बीजिंग को उसकी भाषा में जवाब
नई दिल्ली ने बीजिंग को उसकी भाषा में जवाब देना शुरू कर दिया है। मंगोलिया को चीन का बैकयार्ड कहा जाता है। भारत और चीन के बीच मंगोलिया एक प्रभावी युद्धक्षेत्र के तौर पर उभर सकता है। पिछले दिनों चीन ने मंगोलिया और रूस के साथ एक त्रिपक्षीय समझौता किया था। मंगोलिया रणनीतिक और भौगोलिक दृष्टि से भारत और चीन के बीच एक अहम क्षेत्र है। भारत ने चीन की विस्तारवादी मंशा को समझते हुए द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास 'नोमैडिक एलिफेंट 2025' किया है। यह मिलिट्री ड्रिल 31 मई को शुरू हुई है।

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मंगोलिया और भारत की दोस्ती क्यों खटक रही चीन को?
भारत और मंगोलिया के बीच द्विपक्षीय मिलिट्री ड्रिल नई बात नहीं है। 'नोमैडिक एलिफेंट' जैसी ड्रिल भारत सालों से करता है। मौजूदा वैश्विक हालात में चीन को भारत और मंगोलिया का करीब आना अखड़ रहा है। इसकी वजह है कि बीजिंग ने रूस से चीन तक पावर ऑफ साइबेरिया 2 पाइपलाइन परियोजना के लिए मंगोलिया में भारी निवेश किया है। इसकी लागत करीब 100 अरब डॉलर है। इस पाइपलाइन के जरिए रूस से 50 बिलियन क्यूबिक मीटर गैस चीन लाता है।
भारत के लिए मंगोलिया से बेहतर संबंध बनाना कूटनीतिक रणनीति
भारत और मंगोलिया के बीच ऐतिहासिक स्तर पर संबंध रहे हैं। पीएम मोदी ने 2015 में इस लैंड लॉक देश की यात्रा की थी और यहां की संसद को भी संबोधित किया था। भारत की कोशिश है कि मंगोलिया के साथ सिर्फ सैन्य नहीं बल्कि आर्थिक और धार्मिक रिश्तों को भी मजबूत बनाया जाए। भारत मंगोलिया को एक वैकल्पिक गेटवे के तौर पर इस्तेमाल करना चाहता है। कोकिंग कोल, तांबा और रेयर अर्थ एलिमेंट्स जैसे महत्वपूर्ण खनिज मंगोलिया के रास्ते रूस से लाने की परियोजना पर भारत काम कर रहा है। इससे भारत को चीन से होकर नहीं गुजरना पड़ेगा।
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