Inside story: जानिए क्यों किया चीनी सेना ने कर्नल बाबू और बाकी जवानों पर हमला, सिर्फ 5 किमी को लेकर हुआ था बवाल!
नई दिल्ली। पूर्वी लद्दाख में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर भारत और चीन के बीच जारी टकराव अब एक तनावपूर्ण मोड़ पर पहुंच गया है। 45 साल बाद एलएसी पर हुए संघर्ष में भारत के एक ऑफिसर समेत 20 सैनिक शहीद हो गए। सब हैरान हैं कि जब डि-एस्कलेशन की कोशिशें जारी थीं तो फिर अचानक सोमवार रात अचानक ऐसा क्या हो गया कि चीन की सेना ने अचानक हमला कर दिया। इस हमले में कर्नल संतोष बाबू और बाकी जवान चपेट में आ गए।

सोमवार रात 11:30 बजे शुरू हुआ बवाल
सूत्रों की तरफ से बताया जा रहा है कि सारा मसला सोमवार रात 11:30 बजे से शुरू हुआ था। उस समय दोनों तरफ से जवानों का पीछे हटने का सिलसिला जारी था। इसी समय कर्नल संतोष बाबू ने चीनी जवानों से पांच किलोमीटर पीछे चले जाने को कहा। चीन की सेना इसी बात से भड़क गई और उसने अपशब्द कहने शुरू कर दिए। इसके बाद दोनों तरफ से मारपीट शुरू हो गई और फिर चीनी जवानों ने पत्थर और सरिया से हमला कर दिया। बताया जा रहा है कि चीन को भी भारतीय सेना की तरफ से करारा जवाब दिया गया था। बताया जा रहा है कि मंगलवार तड़के चीनी जवानों का हमला जारी था।

चीन के 43 सैनिक ढेर!
माना जा रहा है कि चीन के करीब 43 सैनिक इस हाथापाई में मारे गए हैं। विदेश मंत्रालय की तरफ से इस हिंसा पर आधिकारिक बयान जारी किया गया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव की तरफ से कहा गया है कि दोनों पक्षों को नुकसान झेलना पड़ा है। उन्होंने दो टूक कहा कि इस हिंसा से बचा जा सकता था अगर चीन उस समझौते को मानता जो छह जून को हुआ था। उन्होंने कहा कि हिंसा इसलिए हुई क्योंकि चीन की सेना ने एकपक्षीय कार्रवाई में एलएसी की यथास्थिति बदलने की कोशिश की थी।
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भारत ने चीन को दिया जवाब
अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच पूर्वी लद्दाख में जारी टकराव को खत्म करने के लिए दोनों तरफ से मिलिट्री और राजनयिक स्तर पर वार्ता जारी थी। सीनियर कमांडर्स छह जून को मिले थे और उस प्रक्रिया पर रजामंद हुए थे जिसके तहत डि-एस्कलेशन होना था। इसी समय कमांडर्स की कई दौर मीटिंग हुईं और वह एक निष्कर्ष पर पहुंचे थे। विदेश मंत्रालय के मुताबिक भारत को उम्मीद थी कि यह पूरी प्रक्रिया आसानी से अंजाम दी जाएगी लेकिन चीनी पक्ष की तरफ से स्थिति को मुश्किल बना दिया गया। प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि भारत हमेशा से ही सीमाई इलाकों पर शांति और स्थिरता का पक्षधर रहा है।

45 साल पहले LAC पर शहीद हुए थे भारतीय सैनिक
सन् 1975 के बाद से यह पहला मौका है जब चीन से लगी लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर सेना को अपने सैनिक गंवाने पड़े हैं। 45 साल पहले अरुणाचल प्रदेश में भारतीय दल जिस समय गश्त पर था उस पर चीनी जवानों ने हमला बोल दिया था। सेना की तरफ से जो आधिकारिक बयान जारी हुआ, उसमें कहा गया कि सोमवार रात को घटना उस समय हुई है जब डि-एस्कलेशन प्रक्रिया जारी थी। झड़प में जूनियर कमांडिंग ऑफिसर (जेसीओ) रैंक के ऑफिसर भी शहीद हुए हैं। इस संकट के बीच ही दोनों पक्षों के सीनियर मिलिट्री ऑफिसर्स मीटिंग कर रहे हैं ताकि हालात को नियंत्रण में किया जा सके।












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