लद्दाख में जिद्दी चीन को जवाब देने के लिए तैयार भारत, आर्थिक मोर्चे पर लिए जाएंगे नए फैसले!
नई दिल्ली। पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग झील और गोगरा-हॉट स्प्रिंग्स इलाके के कुछ हिस्सों को छोड़ने के लिए राजी नहीं है। लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर डि-एस्कलेशन को लेकर उसका अड़ियल रवैया बरकरार है। ऐसे में अब भारत सरकार आर्थिक मोर्चे पर चीन के खिलाफ नए कदम उठाने की तैयारी कर रही है। इस मसले पर नजर रख रहे विशेषज्ञों की मानें तो भारत सरकार यह साफ कर देना चाहती है कि उसके लिए बिजनेस अहम है और अगर चीन अपनी जिद पर अड़ा है तो फिर वह यहां पर उसे जवाब देगी।

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पांच मई से जारी है टकराव
भारत और चीन के बीच पांच मई से लद्दाख में टकराव जारी है। सोमवार को चाइना स्टडी ग्रुप (सीएसजी) ने लद्दाख में पीएलए के एक्शन को लेकर चर्चा कीी और साथ तिब्बत के अक्साई चिन इलाके में चीन की आक्रामकता पर भी बात की। सीएसजी में भारत के कई वरिष्ठ मंत्रियों के अलावा मिलिट्री लीडर्स और ब्यूरोक्रेट शामिल हैं। यह वह यूनिट है जो सरकार को चीन पर कार्रवाई लेने के विकल्प सुझाती है। चीन ने कहा है कि वह भारत के साथ रिश्ते सामान्य करने का इच्छुक है। लेकिन केंद्र सरकार और सेना की तरफ से भी यह संदेश स्पष्ट दे दिया गया है कि लद्दाख में अप्रैल 2020 वाली यथास्थिति हर हाल में बहाल होनी चाहिए। सूत्रों के मुताबिक सेना को आदेश दे दिया गया है कि लद्दाख में 1597 किलोमीटर लंबी एलएसी की सभी फॉरवर्ड पोजिशंस पर वह मौजूद रहे।
डि-एस्कलेशन से पीछे हटा चीन
पांच जुलाई को भारत और चीन के बीच स्पेशल रिप्रजेंटेटिव्स (एसआर) तंत्र के तहत दो घंटे तक वार्ता हुई थी। दोनों पक्ष उस समय पूर्ण डिसइंगेजमेंट और डि-एस्कलेशन के लिए राजी हुए थे। लेकिन एक माह बाद भी स्थिति जस की तस है और पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) के जवान अड़े हुए हैं। अमेरिका ने चीन की टेक्नोलॉजी कंपनी हुआवे और इसकी समर्थक कंपनियों के खिलाफ एक्शन लिया है। ऐसे में भारत भी चीनी कंपनी और इसकी सहायक कंपनियों को भावी प्रोजेक्ट्स से बाहर कर सकता है। सरकार की तरफ से साफ कर दिया गया है कि द्विपक्षीय संबंध प्रत्यक्ष तौर पर बॉर्डर पर शांति और स्थिरता से जुड़े हुए हैं।












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