'राधाकृष्णन से कुछ पर्सनल नहीं', उपराष्ट्रपति उम्मीदवार पर ये क्या बोल गए सुदर्शन रेड्डी, RSS पर कही बड़ी बात
B Sudershan Reddy VS CP Radhakrishnan: INDIA गठबंधन के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज बी. सुदर्शन रेड्डी ने अपने दिल की बातें खुलकर सामने रखी हैं। उनका कहना है कि उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि वे उपराष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने NDA के उपराष्ट्रपति उम्मीदवार सी.पी. राधाकृष्णन को लेकर भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने ये भी बताया है कि कैसे विपक्षी गठबंधन ने उन्हें उपराष्ट्रपति उम्मीदवार के लिए चुना।
बी. सुदर्शन रेड्डी ने कहा, ''नामांकन से दो दिन पहले तक मेरे मन में कोई ख्वाब भी नहीं था कि मैं उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ूंगा। मैंने वैसे भी कोई चुनाव नहीं लड़ा, मैं लगभग 30 वर्षों से अधिक समय से कानूनी पेशे में हूं। मैंने केवल बार एसोसिएशन का चुनाव लड़ा था। मैं चुनाव और चुनाव प्रक्रिया से परिचित हूं, लेकिन मैंने चुनाव नहीं लड़ा। मैंने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन मैं उपराष्ट्रपति का चुनाव लड़ूंगा।''

बी. सुदर्शन रेड्डी ने आगे कहा, ''यह प्रस्ताव कांग्रेस पार्टी की ओर से आया, कांग्रेस पार्टी के कुछ महत्वपूर्ण पदाधिकारियों ने प्रस्ताव रखा और मैंने अपना विचार व्यक्त किया कि मेरे लिए किसी विशेष पार्टी की ओर से उम्मीदवार बनना कठिन हो सकता है। अगर INDIA गठबंधन सहमत हों और वे सभी एक साथ आएं तो मैं चुनाव लड़ूंगा, बस इसी तरह ये पूरी बात हुई।"
NDA उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन को लेकर क्या बोले बी. सुदर्शन रेड्डी?
बी. सुदर्शन रेड्डी ने साफ किया कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि दो अलग-अलग विचारधाराओं का मुकाबला है। उनका कहना है कि वे बीजेपी उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन से व्यक्तिगत तौर पर कभी मिले तक नहीं हैं।
बी. सुदर्शन रेड्डी ने कहा, ''मेरी असहमति सीपी राधाकृष्णन से नहीं है। मेरा उनके साथ पर्सनल कुछ नहीं है। मैं RSS की विचारधारा से असहमत हूं। मैं एक लिबरल कॉन्स्टीट्यूशनल डेमोक्रेट हूं और बाबा साहेब की विचारधारा -सेक्युलरिज्म, सोशल जस्टिस और फ्रैटर्निटी -में विश्वास करता हूं।''
बी. सुदर्शन रेड्डी ने कहा,
"यह लड़ाई नहीं है, यह विचारों का टकराव है। दूसरा पक्ष प्रचार कर रहे थे कि यहां एक व्यक्ति है, जो जीवन भर RSS का एक पूर्ण सदस्य रहा है, तो मैं उस विचारधारा से असहमत हूं, सी.पी. राधाकृष्णन जी से नहीं। सी.पी. राधाकृष्णन और मेरे बीच कुछ भी व्यक्तिगत नहीं है। हम एक-दूसरे से कभी मिले भी नहीं हैं। इसलिए मैं चाहता था कि यह एक सभ्य प्रतियोगिता हो, व्यक्तियों के बीच नहीं बल्कि दो अलग-अलग विचारधाराओं के बीच... इसीलिए मैंने कहा कि यह एक वैचारिक लड़ाई है।"
रेड्डी चाहते हैं कि यह चुनाव हाल के वर्षों का सबसे सभ्य और सम्मानजनक चुनाव बने। उन्होंने कहा, "इसमें न व्यक्तिगत हमले हों, न कटाक्ष, न ही अपमानजनक टिप्पणियां। उपराष्ट्रपति जैसे उच्च संवैधानिक पद का उम्मीदवार वही व्यवहार करे, जिसकी वह बात करता है।"
अमित शाह के नक्सलवाद को समर्थन देने के आरोप पर क्या बोले सुदर्शन रेड्डी?
दरअसल, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को बयान देते हुए कहा था कि सुदर्शन रेड्डी वही जज हैं, जिन्होंने ऐसा फैसला दिया था जिससे वामपंथी उग्रवाद और नक्सलवाद को परोक्ष रूप से समर्थन मिला। शाह का दावा था कि अगर सलवा जुडूम के खिलाफ वह जजमेंट न आया होता तो 2020 तक नक्सलवाद पूरी तरह खत्म हो चुका होता।
अमित शाह की इस टिप्पणी पर सुदर्शन रेड्डी ने पलटवार करते हुए कहा, "मैं इस मुद्दे पर उनसे बहस नहीं करना चाहता। सलवा जुडूम का जो फैसला आया था, वह सिर्फ मेरा व्यक्तिगत निर्णय नहीं था, बल्कि सुप्रीम कोर्ट का सामूहिक निर्णय था। शाह जी को चाहिए कि वे उस पूरे 40 पेज के फैसले को पढ़ें। अगर उन्होंने ध्यान से पढ़ा होता तो शायद ऐसी टिप्पणी करने से बचते।"
राहुल गांधी की 'कास्ट सर्वे' पहल पर रेड्डी का बड़ा बयान
बी. सुदर्शन रेड्डी ने कहा कि राहुल गांधी ने 90% सफलता पहले ही हासिल कर ली है। तेलंगाना कास्ट सर्वे के बाद केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रतिक्रिया देनी पड़ी और अब राष्ट्रीय जनगणना के साथ कास्ट सर्वे भी होगा। उन्होंने कहा, "इससे बड़ा और क्या चाहिए? राहुल गांधी ने जो मुद्दा उठाया था, उसका असर साफ दिख रहा है।"
बी. सुदर्शन रेड्डी का संदेश साफ है - यह चुनाव व्यक्तिगत नहीं बल्कि विचारधारात्मक है। वे चाहते हैं कि लोकतंत्र में यह मुकाबला सभ्यता और विचारों पर आधारित हो।












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