ग्रीन रैंकिंग में दुनिया के पांच पिछड़े देशों में शामिल भारत
नई दिल्लीः वायु प्रदूषण और वन संरक्षण उपायों के खराब प्रबंधन के कारण इस साल भारत ग्रीन रैंकिंग में 177 वें स्थान पर आ गया है, दो साल पहले भारत141 वें स्थान पर था। वैश्विक पर्यावरण प्रदर्शन सूचकांक (ईपीआई) की ताजा रैंकिंग स्विट्जरलैंड के दावोस में विश्व आर्थिक मंच की बैठक के दौरान मंगलवार को जारी की गई। 180 देशों की सूची में भारत पांच सबसे निचले देशों में शामिल है।

वैश्विक पर्यावरण प्रदर्शन सूचकांक की रिपोर्ट 10 श्रेणियों के अलग-अलग 24 मुद्दों पर रिसर्च की गई है। इसमें प्रदर्शन वायु की गुणवत्ता, जल एवं स्वच्छता, सीओ 2 उत्सर्जन तीव्रता (जीडीपी के प्रति इकाई उत्सर्जन), जंगलों (वनों की कटाई) और अपशिष्ट जल उपचार शामिल हैं।
अगर वायु गुणवत्ता की बात की जाए तो भारत के कई इलाको में ये खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत, चीन, पाकिस्तान की वायु गुणवत्ता काफी खराब है, जिसके कारण सेहत से जुड़ी कई समस्याएं हो रही हैं।
इस रिपोर्ट में भारत की 'उज्ज्वला योजना' का भी जिक्र किया गया है, जिसमें गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों को एलपीजी कनेक्शन मिलता है। इस रिपोर्ट में इस बात का विशेष उल्लेख किया गया है कि अगर इस योजना को सही तरीके से लागू किया जाता है तो इसके सकारत्मक प्रभाव पड़ेगा।
इस रिपोर्ट को डब्ल्यूईएफ के सहयोग से येल और कोलंबिया विश्वविद्यालय द्वारा तैयार किया गया है। रिपोर्ट में जनसंख्या वृद्धि से विकास पर प्रभाव पड़ने की भी बात कही गई है। इस रिपोर्ट में चीन का 120 वां स्थान दिया गया है।
रिपोर्ट में स्विट्ज़रलैंड की जमकर तारीफ की गई है। स्विट्ज़रलैंड पहले स्थान पर है तो वहीं इसके बाद फ्रांस, डेनमार्क, माल्टा और स्वीडन का स्थान है।
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