INDIA ब्लॉक में कांग्रेस के खिलाफ क्यों बन रहा है माहौल? 5 प्वाइंट में जानिए
26 विपक्षी दलों के गठबंधन इंडिया (इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस) में कांग्रेस को लेकर सहयोगी दलों में एक संदेह का माहौल पैदा होता जा रहा है। सबसे पहले मध्य प्रदेश विधानसभा चुनावों में तालमेल नहीं हो पाने की वजह से सपा के साथ इसका झगड़ा शुरू, जो अन्य दलों तक भी पहुंच चुका है।
इंडिया गठबंधन की एकता और उसको लेकर कांग्रेस की उदासीन भूमिका पर सबसे ताजा हमला बिहार के मुख्यमंत्री और इस विपक्षी एकता के सबसे बड़े सूत्रधार जेडीयू सुप्रीमो नीतीश कुमार ने किया है। माना जा रहा है कि कांग्रेस पांच राज्यों में अपनी जीत को लेकर काफी उम्मीदें पाल रही है।

कांग्रेस के रवैसे से इंडिया ब्लॉक में बढ़ी बेचैनी
इसके दम पर वह 3 दिसंबर के बाद खुद को इंडिया ब्लॉक के स्वाभाविक नेता के तौर पर देखने लगी है। शायद यही वजह है कि वह इंडिया ब्लॉक के अन्य दलों को फिलहाल कोई भाव नहीं दे रही है, जिससे उनके बीच बेचैनी बढ़ रही है।
1) नीतीश का 'इंडिया' से मोहभंग!
नीतीश कुमार ने पटना में सीपीआई की ओर से आयोजित 'भाजपा हटाओ, देश बचाओ रैली' में इंडिया ब्लॉक के प्रति कांग्रेस की उदासीनता को लेकर गुरुवार को अपने दिल का दर्द बयां किया है। बिहार में लेफ्ट पार्टियां सत्ताधारी महागठबंधन का हिस्सा हैं और इसमें शामिल सभी पार्टियां इंडिया ब्लॉक में शामिल हैं।
नीतीश ने कहा है, 'अभी काम ज्यादा नहीं हो रहा है....अभी 5 जगह विधानसभा का चुनाव है...ई कांग्रेस पार्टी तो उसी में ज्यादा इंटरेस्टेड है....हम लोग तो कांग्रेस पार्टी को आगे बढ़ाने के लिए एकजुट होकर काम कर रहे थे...लेकिन अभी उनको कोई ई सब चीज की चिंता है नहीं.....अभी तो वे लगे हुए हैं पांच राज्यों के चुनाव में.....आजकल कभी कोई चर्चा नहीं हो रही है.....'
2) तेलंगाना में टूटा गठबंधन
पटना से करीब 1,500 किलोमीटर दूर तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में कांग्रेस को लेकर वामपंथी दलों का मोहभंग हो गया। यहां कांग्रेस पार्टी सीपीआई-सीपीएम के लिए 119 सीटों में से दो-दो सीटें छोड़ने के लिए पहले से वैचारिक तौर पर राजी थी।
लेकिन, सीपीएम ने अल्टीमेटम दिया था कि अगर कांग्रेस वादे के मुताबिक उसकी वायरा और मिर्यालगुडा सीटें नहीं छोड़ीं तो वह अकेले चुनाव लड़ेगी। ईटी ऑनलाइन के मुताबिक यही हुआ और सीपीएम ने 17 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने के लिए नाम जारी कर दिए हैं। वह 20 सीटों तक अपने उम्मीदवार उतार सकती है। इसी तरह से सीपीआई भी कोठागुडेम और चेन्नूर विधानसभा सीट पर ताल ठोके हुए है और आगे का फैसला लेने के लिए कांग्रेस की आखिरी लिस्ट का इंतजार कर रही है।
3) तीन अन्य राज्यों में वामपंथियों ने अलग किया अपना रास्ता
इससे पहले रिपोर्ट के मुताबिक राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में कांग्रेस के साथ लेफ्ट पार्टियों की सीटों पर बातचीत टूट ही चुकी है। इसके बाद सीपीएम-सीपीआई दोनों पार्टियों ने तीनों राज्यों में अपने दम पर ही चुनाव लड़ने का ऐलान किया है।
4) सपा के साथ हुई कांग्रेस से किचिकच की शुरुआत
5 राज्यों में विधानसभा चुनावों को लेकर इंडिया ब्लॉक में कांग्रेस के साथ खटपट की शुरुआत समाजवादी पार्टी के साथ हुई थी। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव का कहना है कि कांग्रेस ने उनकी पार्टी के लिए मध्य प्रदेश में 6 सीटें छोड़ने पर विचार करने की बात कही थी।
लेकिन, उनके मुताबिक बाद में यह कहकर मुकर गए कि गठबंधन सिर्फ लोकसभा चुनावों के लिए बना है। इसको लेकर दोनों दलों के वरिष्ठ नेताओं के बीच सार्वजनिक तौर पर तू-तू, मैं-मैं की नौबत तक आ चुकी है।
5) 'इंडिया की हालत पतली'
इंडिया में शामिल दलों के कांग्रेस की ओर बढ़ रही नाराजगी को लेकर नेशनल कांफ्रेंस के नेता उमर अब्दुला अफसोस तक जता चुके हैं। उन्होंने हाल ही में यहां तक का है कि '....देखा जाए तो इंडिया अलायंस की हालत आज पतली है.....जो अंदरूनी झगड़े हैं वे नहीं होने चाहिए....खासकर इन चार-पांच राज्यों में जहां चुनाव हो रहे हैं....'












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