आइकिया भारतीय ग्राहकों के लिए ये रणनीति अपनाएगी

आइकिया स्टोर
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स्वीडन की फ़र्नीचर कंपनी आइकिया ने भारत में अपना पहला स्टोर हैदराबाद में खोला है.

भारत के बढ़ते मध्यम वर्ग की वजह से आइकिया के लिए यहां एक बड़ा मौका हो सकता है लेकिन इस बाज़ार की अपनी ख़ासियत हैं.

आइकिया का नीले रंग का बड़ा सा 13 एकड़ में फैला स्टोर हैदराबाद की हाईटेक सिटी में बनाया गया है.

इस हाईटेक सिटी में दूसरी अंतरराष्ट्रीय कंपनिया भी हैं जैसे माइक्रोसॉफ्ट, गूगल और फ़ेसबुक.

जिन लोगों ने इस ब्रांड के बारे में पहले नहीं सुना था, उनके लिए इस स्टोर के साइज़ ने ही काफ़ी जिज्ञासा पैदा कर दी है.

और फिर ऐसे भी काफ़ी लोग हैं जो इस ब्रांड को अच्छे से जानते हैं. जो भारतीय विदेशों में आते-जाते रहे हैं, वो आइकिया से परिचित हैं.

पिछले दशक में भारत में आने वाली अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को देखते हुए तो कुछ लोग कहेंगे कि आइकिया ने यहां आने में काफ़ी वक्त ले लिया.

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देर से एंट्री क्यों?

कंपनी के अंतरराष्ट्रीय चीफ़ एक्ज़ीक्यूटिव जेसपर ब्रोडीन का कहना है, "भारत का बाज़ार हमारे लिए सपना है."

"लेकिन ईमानदारी से कहें तो कुछ साल पहले जब हमने भारत में बिज़नेस के लिए सोचा था, तब हमें लगा था कि यहां टारगेट पूरा ना हो पाने का रिस्क काफ़ी है"

तो फिर क्या बदला? सरकार की नीतियां एक कारण हो सकता है. साल 2012 में भारत ने एकल ब्रांड रिटेल में 100 फीसदी एफ़डीआई की इजाज़त दे दी थी.

ये आइकिया के लिए महत्वपूर्ण था क्योंकि कंपनी साझा व्यापार के रास्ते नहीं जाना चाहती थी.

भारत में ई-कॉमर्स का बढ़ने से भी आइकिया को यहां मौका नज़र आया.

कंपनी भारत में अपने स्टोर की संख्या बढ़ाने की ओर काम कर रही है, लेकिन अगले साल से ही अपना सामान ऑनलाइन बेचना शुरू करना चाहती है.

टेक्नोपेक एडवाइज़र फ़र्म के अरविंद सिंघल कहते हैं, "भारत को लेकर कंपनी ने काफ़ी संयम बरता है. जितनी मेहनत और वक्त उन्होंने अपना पहला स्टोर खोलने में लगाया है, वो असामान्य है. इससे नज़र आता है कि वो यहां के बाज़ार में सफ़लता को लेकर उनका इरादा पक्का है."

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फ़र्नीचर एसेंबल करना होगा आसान

आइकिया ने भी भारत के मुताबिक खुद को ढालने की कोशिश की है.

स्टोर का जो साइज़ है वैसा भारत ने पहले नहीं देखा है.

पूरी दुनिया में आइकिया का सामान ग्राहक के पास पतले से पैक में पहुंचता है. ग्राहकों को खुद ही फ़र्नीचर के पार्ट्स खुद जोड़ने होते हैं.

भारतीय लोग इसके आदी नहीं हैं. यहां पर सस्ती मज़दूरी के चलते लोग फ़र्नीचर के काम को लेकर कारपेंटर पर ही निर्भर हैं.

ब्रोडीन कहते हैं, "हम अपने ग्राहकों को मनाने की कोशिश करेंगे कि क्या वो खुद एसेंबल करने वाला मॉडल आज़माना चाहेंगे? और इसका मकसद होता है कि ऐसा करने से आप पैसा बचा सकते हैं. लेकिन हम नासमझ नहीं हैं और हम दूसरे बाज़ारों में भी होम डिलीवरी और किचन इंस्टालेशन की सर्विस देते हैं. हमें पता है कि भारत में हमें बाकी किसी बाज़ार के मुक़ाबले ज़्यादा करना होगा."

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"इसलिए हमने कुछ कंपनियों, विशेषज्ञों और उन लोगों का नेटवर्क बनाया है जो ग्राहकों को फ़र्नीचर एसेंबल करने में मदद करेंगे."

आइकिया ने अपनी एक और प्रसिद्ध चीज़ बदली है - स्वीडन मीटबॉल्स.

स्टोर में हज़ार लोगों की सीटिंग वाला रेस्टोरेंट है जहां ये मिलती हैं.

लेकिन ये बीफ़ या पोर्क की मीटबॉल्स नहीं हैं क्योंकि इससे यहां धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती थीं. इसलिए, यहां चिकन और वेज मीटबॉल्स रखी गई हैं.

साथ ही कुछ और भारत विशेष खाना जैसे बिरयानी और दाल मक्खनी.

ये रेस्तरां दुनिया का सबसे बड़ा रेस्तरां है.

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कीमत का रखा है ध्यान

लोग आइकिया से सामान खरीदेंगे या नहीं, वो एक बात पर निर्भर करता है और वो है - कीमत.

अर्नस्ट एंड यंग के परेश पारेख़ कहते हैं, "भारतीय लोग कीमत को लेकर काफ़ी संवेदनशील होते हैं लेकिन वो गुणवत्ता को लेकर भी संवेदनशील होते हैं. आप उन्हें सस्ते दामों पर ख़राब माल नहीं दे सकते हैं. उन्हें दोनों चीज़ें चाहिए."

"भारतीय जल्दी भरोसा खत्म कर लेते हैं, इसलिए उन्हें पहली ही बार में कीमत और गुणवत्ता को लेकर ठीक शुरुआत करनी होगी."

आइकिया के दिग्गज़ों ने इस बात का ध्यान रखा है.

ब्रोडीन के मुताबिक, "भारत में हम जितना कर सकते थे उतना किया है. साढ़े सात हज़ार उत्पादों में से हमने हज़ार उत्पादों की कीमत 200 रुपए या उससे कम रखी है. पांच सौ उत्पादों की कीमत 100 रुपए तक है."

"इस ऑफ़र के साथ हम कीमत पसंद बाज़ार की शुरुआत कर रहे हैं."

पर भारत में दूसरी चुनौतियां हैं. आइकिया के हिसाब से बड़ी ज़मीन मिलना बड़े शहरों में तो मुश्किल है. और अगर मिलती हैं तो बहुत महंगी हैं.

आयात शुल्क भी एक समस्या है. अगर कीमत कम रखी जाएगी तो इसका मतलब निवेश वापस आने में ज़्यादा वक्त लगेगा.

आइकिया का कहना है कि वो भारत में डेढ़ अरब डॉलर का निवेश कर रहे हैं.

ब्रोडीन मानते हैं कि ये मुश्किल होगा. वो कहते हैं, "निवेश बड़ा है और कंपनी का फ़ायदा देखने के लिए हमें काफ़ी लंबा वक्त तय करना है लेकिन हम कोशिश करेंगे झेलने की."

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