IIT बॉम्‍बे के शोधकर्ताओं ने बनाई ऐसी मशीन जो बता देगा आपको हार्ट अटैक होगा या नहीं

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    मुंबई। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आईआईटी) बॉम्बे के शोधकर्ताओं ने एक ऐसा उपकरण बनाया है जो न केवल दिल के दौरे का पता लगा सकेगा बल्‍कि इस बात की भविष्‍यवाणी भी कर सकेगी कि किसी व्‍यक्ति को भविष्‍य में दिल का दौरा पड़ सकता है या नहीं। शोधकर्ताओं ने जो उपकरण बनाया है वो दिल के दौरे के मामले में रक्त में जारी दो रसायनों की एकाग्रता को मापता है और स्मार्टफोन पर रीडिंग दिखाता है। उपकरण को बनाने वालों के मुताबिक इस मशीन के चलते आप उन समयों को बचा सकते हैं जो दिल के दौरे के बारे में पता लगाने में अकसर लोग गंवा देते हैं जो जानलेवा साबित होता है।

    IIT बॉम्‍बे के शोधकर्ताओं ने बनाई ऐसी मशीन जो बता देगा आपको हार्ट अटैक होगा या नहीं

    इस उपकरण से इस बात का भी पता लगाया जा सकेगा कि छाती उठने वाले दर्द से वास्‍तव में दिल का दौरा पड़ सकता है या नहीं। बायोसाइंसेज और बायोइंजिनियरिंग के प्रोफेसर सौमीओ मुखर्जी द्वारा निर्देशित छात्र देबास्मिता मंडल और सौरभ अग्रवाल को इस उपकरण के लिए बीते मार्च में गांधीवादी यंग टेक्नोलॉजिकल इनोवेशन अवॉर्ड से नवाजा गया। 2018 प्राप्त किया।

    जानकारी के मुताबिक डिवाइस दो बायोमाकर्स या रसायनों की एकाग्रता को माप सकता है- मायोग्लोबिन और मायलोपेरॉक्सिडेस- जो दिल के दौरे के दौरान जारी किए जाते हैं। मायोग्लोबिन एक लौह युक्त प्रोटीन है जो जल्द ही म्योकॉर्डियल इंफार्क्शन के बाद रक्त प्रवाह में जारी होता है - दिल में रक्त प्रवाह की अचानक कमी या अवरोध जो कार्डियक अरेस्‍ट की ओर जाता है।

    "जबकि मायोग्लोबिन एक शुरुआती चरण में आने वाले दिल के दौरे का पता लगा सकता है, यह मायलोपेरॉक्सिडेज़ का माप है जो हमारे लिए पथभ्रष्ट रहा है। यदि मायलोपेरॉक्सिडेज़ का उच्च स्तर है, तो इसका मतलब है कि उसके पास एन्डोथेलियल अस्थिरता है, जिसका मतलब है कि रक्त वाहिका की भीतरी परत अस्थिर है और इसका एक हिस्सा बंद हो सकता है। सौमीओ मुखर्जी ने बताया कि यह हिस्‍सा छोटी धमनी में फंस गया तो दिल का दौरा पड़ सकता है।

    "इसका मतलब है कि उसे तुरंत दिल का दौरा नहीं पड़ेगा लेकिन यह फिक्‍स है कि आने वाले समय में उसे यह निश्चित रूप से होगा। चाहें वो दो महीनों में हो या फिर छह महीने या फिर एक साल। इसका फायदा यह भी होगा कि आप इसके उपाय अभी से शुरू कर सकते हैं। अभी इस टेस्‍टिंग में 15 से 20 मिनट तक लगते हैं। लेकिन इस पर काम कर रही टीम इसे कम कर 5 मिनट करने पर लगी हुई है। डिवाइस वर्तमान में 5,500 रुपये की लागत से बनाया गया है लेकिन शोधकर्ताओं का मानना ​​है कि जब एक वाणिज्यिक पैमाने पर डिवाइस का उत्पादन होता है, तो लागत घटकर 1,500 हो सकती है।

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    English summary
    Researchers at the Indian Institute of Technology (IIT), Bombay, have developed an affordable sensory device that can not only detect a heart attack early on but also predict if a person is likely to have a heart attack in future.

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