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मार्क्स से मत आंकिए क्षमता को, 12वी में मुश्किल से पास बना IAS तो 11वीं में फेल बन गया IPS

नई दिल्‍ली। परीक्षा में मिले अंक के आधार पर किसी की योग्यता का आकलन नहीं किया जा सकता। बोर्ड परीक्षा में कम मार्क्स लाने वाले छात्र भी बड़ी उपलब्धि हासिल कर सकते हैं। संकल्प और मेहनत से कुछ भी मुमकिन है। औसत छात्र भी इंजीनियर, डॉक्टर या आइएएस बन सकते हैं। इस लिए कम नम्बर आने से हताशा होने की जरूरत नहीं। हरियाणा के रहने वाले आइएएस अधिकारी नितिन सांगवान को 12वीं की परीक्षा में बहुत खराब मार्क्स मिले थे। उन्हें केमिस्ट्री में 24 तो फिजिक्स में 33 अंक मिले थे। केमिस्ट्री में उन्हें पास मार्क्स से सिर्फ एक अंक ज्यादा मिले थे। लेकिन इससे वे निराश नहीं हुए। उन्होंने अंक की चिंता किये बिना तैयारी शुरू की। हरियाणा के राज्यस्तरीय इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा में सफल हुए। आइआइटी मद्रास से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में विशेष पढ़ाई की। फिर आइएएस भी बने। उसी तरह बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय 11 वीं की परीक्षा में फेल हो गये थे। लेकिन रिजल्ट का उनके इरादों पर असर नहीं पड़ा। सकारात्मक सोच और मेहनत के बल पर वे आइपीएस बने। इसलिए 10वीं या 12वीं की परीक्षा में कम मार्क्स मिलने से सब कुछ खत्म नहीं हो जाता। नाकामी को अवसर में बदलिये क्यों कि जिंदगी परीक्षा के नतीजों से कहीं ज्यादा अहम है।

12वीं में कम नम्बर आये फिर भी कामयाब

12वीं में कम नम्बर आये फिर भी कामयाब

हरियाणा के चर्खी दादरी के रहने वाले नितिन सांगवान ने अपनी जिंदगी को रिजल्ट के दबाव से हमेशा मुक्त रखा। उनके पिता राज्य सरकार में मुलाजिम थे। औसत मध्यमवर्गीय परिवार की तरह नितिन इंजीनियर बनना चाहते थे। सीबीएसई पाठ्यक्रम से पढ़ाई की। लेकिन 12वीं की परीक्षा उनकी अच्छी नहीं गयी। केमिस्ट्री की लिखित परीक्षा उन्हें 24 अंक मिले। पास मार्क्स से एक नम्बर ज्यादा। हालांकि प्रैक्टिकल में 26 नम्बर लाने से उनका कुल मार्क्स 50 पर पहुंच गया। फिजिक्स की लिखित परीक्षा में 33 अंक मिले और प्रैक्टिकल में 27 जिससे कुल नम्बर साठ प्रतिशत पर पहुंच गया। नितिन को सबसे अधिक मैथ में 76 नम्बर मिले थे। सीबीएसई बोर्ड के रिजल्ट पैटर्न को देखते हुए नितिन के इस रिजल्ट को औसत से भी खराब कहा जा सकता है। इस बोर्ड में तो 80 से 90 फीसदी लाने वाले छात्रों पर भी कोई ध्यान नहीं देता। नितिन को बेशक कम नम्बर मिले लेकिन उनका ध्यान अपने लक्ष्य से नहीं भटका।

नितिन सांगवान की संकल्प शक्ति

नितिन ने राज्यस्तरीय इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा की तैयारी की। परीक्षा में सफल भी हुए। मैकेनिकल इंजीनियरिंग से बीई की डिग्री ली। फिर आइआइटी मद्रास से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन की पढ़ाई की। इनफोसिस में नौकरी की। कुछ बेहतर करने की तमन्ना हुई तो सिविस सर्विसेज एग्जाम क्रैक करने की ठानी। नौकरी करते हुए 2014 में वे यूपीएससी की परीक्षा में बैठे। आइआरएस बने। लेकिन इससे संतोष नहीं हुआ। 2015 में फिर परीक्षा दी। साइंस बैकग्राउंड के नितिन ने यूपीएससी की परीक्षा में सोशियोलॉजी को मेन सब्जेक्ट बनाया था। उन्हें 28वीं रैंक मिली और आइएएस के लिए चयनित हुए। अगर वे 12वीं के खराब रिजल्ट का रोना रोते रहते तो इस मुकाम पर कभी नहीं पहुंचते। इसलिए रिजल्ट से अधिक आपके इरादों की अहमियत है।

गुप्तेश्वर पांडेय की पोजिटिव सोच

गुप्तेश्वर पांडेय की पोजिटिव सोच

बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय भी एक प्रेरणादायी शख्सियत हैं। वे 1987 बैच के बिहार कैडर के आइपीएस अधिकारी हैं। वे गांव के सरकारी स्कूल में पढ़े। पढ़ाई में औसत से कम थे। छठी क्लास तक उन्हें अंग्रेजी के अक्षर का ज्ञान तक न था। लेकिन इसके बावजूद मन में कुछ बेहतर करने की जिद थी। 11वीं की परीक्षा में फेल हो गये थे। फिजिक्स और केमेस्ट्री में वे कमजोर थे। उन्हें जोर का झटका लगा। जाहिर है कोई छात्र किसी परीक्षा में फेल होता है तो उसे बेहद निराशा होती है। लेकिन यही वह समय होता है जब उसे धैर्य धारण करने की जरूरत होती है। यह धैर्य ही उसे निराश से आशा की तरफ ले जाता है। गुप्तेश्वर पांडेय इस रिजल्ट को पीछे छोड़ कर आगे बढ़े। वे कॉलेज की पढ़ाई के लिए पटना विश्वविद्यालय पहुंचे। ग्रेजुएशन के बाद वे यूपीएससी की परीक्षा में बैठे। 1987 में वे आइपीएस के लिए चुने गये। गुप्तेश्वर पांडेय खुद मानते हैं जब उनके जैसे औसत छात्र को सिविस सर्विसेज एग्जाम में कामयाबी मिल सकती है तो किसी और के लिए ऐसा करना मुश्किल नहीं है।

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