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IAF प्रमुख राहा ने कहा आज भी भारत के लिए एक फांस की तरह है पीओके

नई दिल्‍ली। गुरुवार को इंडियन एयरफोर्स (आइएएफ) के मुखिया एयरमार्शल अरुप राहा ने पाकिस्‍तान पर हमला बोला। राहा ने वर्ष 1947 का दौर याद किया और कहा कि इस समय सीमा पार से आने वाले आक्रमणकारियों को वहां की सेना का पूरा समर्थन मिला और उन्‍होंने पूरी कोशिश की कि जम्‍मू कश्‍मीर पर कब्‍जा कर लिया जाए।

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क्‍या होता अगर आइएएफ न पहुंचती

वर्ष 1947 में पाक सेना की मदद से हुए आक्रमण के बारे में और ज्‍यादा जानकारी देते हुए राहा ने बताया कि सन 47 में भारी संख्‍या में सेना की टुकड़‍ियां साजो-सामान के साथ जम्‍मू कश्‍मीर के बड़े हिस्‍से तक आ पहुंची थीं।

उस समय जम्‍मू कश्‍मीर में सेना मजबूत नहीं थी। तब आईएएफ ने एक अहम भूमिका अदा की और आक्रमणकारियों को रोकने में कामयाब हो सके।

रााहा की मानें तो पिछली कुछ लड़ाइयों में आइएएफ की ताकत का कारगर प्रयोग नहीं किया गया था। जब जम्मू-कश्मीर में आर्मी मजबूत स्थिति में नहीं थी उस दौरान वायुसेना ने विशेष रूप से परिवहन शाखा के साथ महत्वपूर्ण भूमिका अदा की।

भारत ने मांगी थी यूएन से मदद

राहा ने बताया कि तब भारत संयुक्‍त राष्‍ट्रसंघ (यूएन) के पास गया ताकि इसका शांतिपूर्ण समाधान निकाला जा सके क्‍योंकि तब तक स्थिति नैतिकता के बाहर हो गई थी। इसके बावजूद समस्‍या आज तक मौजूद है और अब रोज पीओके एक फांस की तरह से चुभता है।

पीएम मोदी के बाद अब राहा

राहा का बयान ऐसे समय में आया है जब पीओके में पहले से ही सेना और पाक सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों का दौर जारी है। यहां के स्‍थानीय नागरिक सेना और सरकार की ओर से उन पर ढहाए जा रहे जुल्‍मों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं।

15 अगस्‍त यानी देश की आजादी के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पीओके और बलूचिस्‍तान की आजादी के लिए आवाज बुलंद की थी। पीएम मोदी की उस अपील ने पाक को काफी परेशान कर दिया था।

क्‍या हुआ था सन 47 में

अक्‍टूबर 1947 की शुरुआत में पाकिस्‍तान आर्मी ने कबायली लोगों की मदद से जम्‍मू कश्‍मीर में दाखिल होने के मकसद से ऑपरेशन गुलमर्ग की शुरुआत की।

22 अक्‍टूबर 1947 करीब 5,000 कबायली लोग जिन्‍हें पाक आर्मी का समर्थन हासिल था, एबटाबाद से कश्‍मीर घाटी में आए गए।

उस समय राज्‍य में महाराजा हरि सिंह का शासन था। महाराजा ने 26 अक्‍टूबर 1947 को इंस्‍ट्रूमेंट ऑफ एक्‍सेशन साइन किया।

इसके बाद जम्‍मू कश्‍मीर एक स्‍वायत्‍त राज्‍य के तौर पर भारत का हिस्‍सा बना। फिर यहां पर इंडियन आर्मी दाखिल हुई और आक्रमणकारियों को बाहर निकाला गया।

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