नीतीश कुमार के उत्तराधिकारी प्रशांत किशोर ने ली 'भीष्म' प्रतिज्ञा
पटना। नीतीश कुमार के उत्तराधिकारी माने जा रहे चुनावी रणनीतिकार और जदयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत ने बड़ी घोषणा की है। एक प्रकार से 'भीष्म' प्रतिज्ञा लेते हुए प्रशांत किशोर ने ऐलान कर दिया है कि वह आने वाले 10 साल तक चुनाव नहीं लड़ेंगे। प्रशांत किशोर सितंबर में जदयू के सदस्य बने थे और अक्टूबर में उन्हें पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद से नीतीश कुमार ने नवाजा। ऐसे में अटकलें लगाई जा रही थीं कि प्रशांत किशोर राज्यसभा या लोकसभा चुनाव लड़ सकते हैं, लेकिन प्रशांत किशोर ने साफ किया है कि वह राजनीति में बड़े पद की इच्छा लेकर नहीं आए हैं। उनका मकसद कुछ और है।

प्रशांत किशोर बोले- जनता की सेवा के इरादे से जदयू में आया
प्रशांत किशोर ने कहा, 'मैं राज्यसभा नहीं जा रहा हूं। लोकसभा चुनाव भी लड़ूंगा। जनता की सेवा के इरादे से जदयू में आया हूं और मेरा कोई लक्ष्य नहीं है।' गौर करने वाली बात यह है कि प्रशांत किशोर ने जब चुनाव लड़ने की बात कही तो इसमें उन्होंने विधानसभा चुनावों का जिक्र नहीं किया। बिहार में 2020 में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में प्रशांत किशोर ने अटकलों के लिए कुछ तो जगह छोड़ ही दी है।

जदयू के युवा नेताओं को दिया जीत का मंत्र
प्रशांत किशोर ने अगले 10 साल चुनाव न लड़ने की यह बात सोमवार को जदयू के छात्र नेताओं को संबोधित करते हुए कही। सीएम हाउस पर आयोजित जदयू के युवा नेताओं की बैठक में प्रशांत किशोर ने चुनावी प्रबंधन के बारे में भी युवा नेताओं को जानकारी दी। करीब 300 युवाओं को संबोधित करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि जनता के बीच जाएं, सेवा करें और पांच साल बाद पता लगाइए कि आप कहां खड़े हैं। उन्होंने युवाओं से कहा कि अगर खुद पर विश्वास है तो चुनाव जरूर लड़ें, आपको सफलता मिलेगी।

चुनाव न लड़ने की बात कहकर बड़ी लकीर खींच गए प्रशांत किशोर
प्रशांत किशोर लंबे समय से नीतीश कुमार के करीबी रहे। उन्हीं के सपोर्ट से आज वह जदयू में नंबर दो की हैसियत के नेता हैं। इस वजह से पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं में असंतोष का भाव है। शायद यही वजह है कि प्रशांत किशोर ने 10 साल तक चुनाव लड़ने की बात कही है। वह संदेश देना चाहते हैं कि उन्हें किसी पद का लालच नहीं है। यह बात और है कि नीतीश कुमार उन्हें अपना उत्तराधिकारी मानते हैं और पार्टी का भविष्य तक बता चुके हैं। प्रशांत किशोर माइक्रो पोल मैनेजमेंट के लिए जाने जाते हैं। वह बूथ लेवल कमेटियां बनाकर जमीनी सच के पास तक जाते हैं। प्रशांत किशोर जातिगत समीकरणों के आधार पर चुनावी कैंपेन और घोषणाओं पर बल देते हैं। चुनाव जिस नेता के नेतृत्व में लड़ा जाता है, उसकी निजी छवि पर आधुनिक तरीकों से काम करते हैं। छवि निर्माण में प्रशांत किशोर को महारत हासिल है। बिहार विधानसभा चुनाव 2015 में महागठबंधन के पास मोदी को चुनौती देने के लिए कोई खास हथियार नहीं था, लेकिन प्रशांत किशोर ने बड़ी होशियारी से नरेंद्र मोदी और अमित शाह को बाहरी साबित कर दिया। बिहारी के नाम पर महागठबंधन के दलों को अपने-अपने जातिगत वोट बैंक का मत प्राप्त हुआ। प्रशांत किशोर की इसी काबिलियत के नीतीश कुमार मुरीद हैं।












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