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I-PAC रेड पर ED को बड़ा झटका, प्रवर्तन निदेशालय की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में क्यों टली सुनवाई?

I-PAC Raid Case: प्रवर्तन निदेशालय (ED) और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच चल रहे टकराव से जुड़े I-PAC छापेमारी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल कोई फैसला नहीं दिया है। इस पूरे मामले पर शीर्ष अदालत 10 फरवरी को सुनवाई करने वाली थी लेकिन अब सुनवाई को 18 फरवरी तक के लिए स्थगित कर दिया है।

यह याचिका ED की ओर से दायर की गई है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अन्य राज्य अधिकारियों ने जांच एजेंसी की तलाशी कार्रवाई में बाधा डाली।

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ED Plea Supreme Court क्या है पूरा मामला?

यह मामला कोयला तस्करी (Coal Pilferage Scam) से जुड़े एक कथित घोटाले की जांच से संबंधित है। इसी सिलसिले में ED ने हाल ही में राजनीतिक सलाहकार कंपनी I-PAC (Indian Political Action Committee) के कोलकाता स्थित कार्यालय और इसके एक निदेशक के ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया था। ED का आरोप है कि इस दौरान राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और जांच एजेंसी के काम में दखल दिया। ED का दावा है कि खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी मौके पर पहुंचीं और उन्होंने अधिकारियों से सवाल-जवाब किए, जिससे तलाशी अभियान बाधित हुआ।

Supreme Court Hearing Adjourned: सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?

मंगलवार को इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की पीठ न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति संदीप मेहता के सामने होनी थी। हालांकि, वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल के अस्वस्थ होने की जानकारी अदालत को दी गई, जिसके बाद सुनवाई को टालने का अनुरोध किया गया। इस पर केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी सुनवाई स्थगित करने पर सहमति जताई। इसके बाद अदालत ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख 18 फरवरी तय कर दी।

ED का क्या आरोप है?

ED ने अपनी याचिका में कहा है कि किसी भी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को जांच एजेंसी के वैधानिक काम में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है। एजेंसी का कहना है कि तलाशी के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के बजाय राज्य प्रशासन ने दबाव की स्थिति पैदा की, जिससे जांच प्रभावित हुई।

इस मामले को लेकर सियासी घमासान भी तेज हो गया है। भाजपा लगातार ममता बनर्जी सरकार पर जांच एजेंसियों के काम में बाधा डालने का आरोप लगा रही है, जबकि तृणमूल कांग्रेस इसे केंद्र की बदले की राजनीति बता रही है। TMC का कहना है कि केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं को डराने और दबाने के लिए किया जा रहा है।

अब सभी की नजरें 18 फरवरी पर टिकी हैं, जब सुप्रीम कोर्ट इस संवेदनशील मामले की सुनवाई करेगा। यह मामला न सिर्फ कानून और जांच एजेंसियों की स्वतंत्रता से जुड़ा है, बल्कि केंद्र और राज्य सरकारों के बीच अधिकारों की टकराहट को भी उजागर करता है। अगर अदालत ED के आरोपों को गंभीर मानती है, तो यह फैसला आने वाले समय में जांच एजेंसियों और राज्य सरकारों के रिश्तों पर बड़ा असर डाल सकता है।

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