I.N.D.I.A:246 सीटों पर दो-दो विपक्षी पार्टियां लड़ी थीं एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव, 2019 के बाकी आंकड़े देखिए

विपक्षी दलों ने 23 जून को जो पटना में पहली बैठक की थी, उसमें काफी चीजें स्पष्ट नहीं हुई थीं। लेकिन, 18 जुलाई वाली बेंगलुरु की बैठक कई मायने में बहुत ही महत्वपूर्ण रही है। सबसे पहले तो 26 दलों के विपक्षी गठबंधन ने अपना एक नाम I.N.D.I.A.तय किया है।

बेंगलुरु की बैठक इस मायने में काफी महत्वपूर्ण रही है कि इसमें बीजेपी और मोदी सरकार के विरोध में एक-दूसरे की कट्टर-विरोधी पार्टियां भी एक ही प्लेटफॉर्म पर आने के लिए तैयार हुई हैं। उदाहरण के लिए कांग्रेस पार्टी और आम आदमी पार्टी।

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करीब आधी सीटों पर एक-दूसरे के खिलाफ लड़े विपक्षी दल
लेकिन, अगर 2019 के लोकसभा चुनावों के आंकड़े को देखें तो देश की कुल लोकसभा सीटों की करीब आधी ऐसी सीटें हैं, जहां इन विपक्षी दलों ने ही जी-जान से एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ा था। इसपर चर्चा करना इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इन्होंने अपने गठबंधन का थीम रखा है 'यूनाइटेड वी स्टैंड' यानी संगठन में शक्ति है।

246 सीटों दो विपक्षी दलों में हुआ मुकाबला
सीधे मुद्दे की बात पर आएं तो 2019 के लोकसभा चुनावों में देश में कम से कम 246 ऐसी लोकसभा सीटें थीं, जिनपर इन 26 विपक्षी दलों में से दो के बीच जोरदार लड़ाई हुई थी। गौरतलब है कि आज भी पश्चिम बंगाल में कांग्रेस-लेफ्ट और टीएमसी के बीच भयंकर राजनीतिक लड़ाई है। इसी तरह केरल में कांग्रेस और लेफ्ट एक-दूसरे को फूटी आंखें नहीं सुहाते।

107 सीटों पर तीन-तीन दल थे आमने-सामने
2019 के चुनावों के आंकड़ों के विश्लेषण से यह भी पता चलता है कि 107 लोकसभा सीटों पर I.N.D.I.A.के तीन सहयोगी दलों के बीच आपस में जोरदार मुकाबला हुआ था। वहीं 19 लोकसभा सीटें ऐसी हैं, जहां इन 26 विपक्षी दलों की चार-चार पार्टियां आमने-सामने चुनाव लड़ीं थीं।

शिवसेना-एनसीपी के आंकड़े शामिल नहीं
यही नहीं, तीन सीटों पर इन्हीं विपक्षी दलों में से कम से कम पांच राजनीतिक दल चुनावी मुकाबले में उतरे थे। खास बात ये है कि इन आंकड़ों में तब की शिवसेना और एनसीपी के आंकड़ों को मौजूदा परिस्थितियों के चलते शामिल नहीं किया गया है।

267 सीटों पर नहीं हुई आपसी लड़ाई
इस तरह से सिर्फ 267 ऐसी संसदीय सीटें ही बच गई हैं, जहां पर मौजूदा संयुक्त विपक्षी गठबंधन में शामिल पार्टियां आपस में मुकाबले में नहीं उतरीं थीं। इस बार अगर बीजेपी के खिलाफ एकजुट होकर 2024 का लोकसभा चुनाव लड़ने की तैयारी हो रही है तो भी इस संभावना को पूरी तरह से खारिज नहीं किया जा सकता कि इन दलों के बीच कुछ सीटों पर दोस्ताना मुकाबला देखने को न मिले।

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    2019 के चुनावों में बीजेपी अकेले 303 सीटें जीती थी। उसे 37.7% वोट मिले थे और वह पीएम नरेंद्र मोदी की अगुवाई में लगातार दूसरी बार सरकार बनाने में सफल हुई थी। वहीं कांग्रेस को सिर्फ 52 सीटें मिली थीं और उसे 10% से भी कम वोट मिले थे। अगर बीजेपी की अगुवाई वाले एनडीए गठबंधन के आंकड़ें को शामिल कर दें तो पिछले चुनाव में विपक्षी दलों का पलड़ा बहुत ही कमजोर नजर आता है।

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