Hyperloop: देश में जल्द शुरू होगा दुनिया का सबसे लंबा हाइपरलूप ट्यूब, जानिए परिवहन पर इसका कितना असर पड़ेगा
Hyperloop: देश में एक ऐसा हाइपरलूप ट्यूब तैयार हो रहा है जो भारत के परिवहन तंत्र में क्रांति ला देगा। इससे ट्रैवल करना तो आसान हो ही जाएगा इसके साथ ही साथ आपके सयम की भी काफी बचत होगी। इसके शुरू होने के बाद आप 200 किलोमीटर का सफर महज 20 मिनट में तय कर सकेंगे।
रेलवे इस हाइपरलूप ट्यूब को IIT मद्रास की मदद से बना रहा है। इसकी जानकारी रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर एक पोस्ट के माध्यम से दी है।

Hyperloop: क्या है हाइपर लूप ट्रैक?
हाइपर लूप को भविष्य की शानदार तकनीक मानी जा रही है, जो भविष्य के यातायात को और सुगम बनाएगा। इस टैक्नॉलजी के तहत ट्रेन को एक खास तरह के ट्यूब में हाई स्पीड से चलाया जाएगा। उम्मीद है कि जल्द ही इसका ट्रायल शुरु हो जाएगा। अगर इस टेस्ट ट्रायल में सब कुछ ठीक रहा तो देश में पब्लिक ट्रांसपोर्ट का पूरा ढांचा ही बदल जाएगा।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने एक पोस्ट में लिखा कि, "एशिया की सबसे लंबी हाइपरलूप ट्यूब 410 मीटर...जल्द ही दुनिया की सबसे लंबी होगी हाइपरलूप होगी।" इसे लेकर अश्विनी वैष्णव ने कुछ दिन पहले भी एक्स पर एक पोस्ट साझा किया था और टेस्ट ट्रैक के तैयार होने पर बधाई भी दी थी। उन्होंने कहा था कि 422 मीटर के इस हाइपरलूप टेस्ट ट्रैक को IIT मद्रास की मदद से तैयार किया गया है।
Hyperloop कैसे काम करता है
आसान भाषा में समझें तो हाइपरलूप एक ऐसी टेक्नोलॉजी है जो वैक्यूम ट्यूब में विशेष कैप्सूल के जरिए हाई स्पीड से चल सकती है। हाइपरलूप एक लंबे सिलिंडर की तरह या किसी लंबे बड़े पाइप की तरह होता है जिसके अंदर ऐरोडायनैमिक पॉड्स या कैप्स्यूल्स काफी तेज रफ्तार में दौड़ेंगी।
देखिए कोई भी चीज जब जमीन पर चलती है तो उसमें घर्षण यानी Friction होता है जिसके कारण उसकी स्पीड कम हो जाती है और इसके साथ ही उस में काफी एनर्जी खर्च होती है। ये समस्या हाइपरलूप में नहीं है। इसमें स्टेशन पहुंचकर यात्री जब पॉड में बैठ जाएगा तो वो चारो तरफ से सील हो जाएगी और इसके बाद Linear इलेक्ट्रिक मोटर ऑन हो जाएगी। इस के बाद पॉड हाइपर लूप में चलना शुरू कर देगी।












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