Hyderabad Bullet Train Hub: ₹5,454 करोड़ से बनेगा बुलेट ट्रेन हब, केंद्र-राज्य की हिस्सेदारी का ये है प्लान!
Hyderabad Bullet Train Hub: हैदराबाद को देश के प्रमुख बुलेट ट्रेन हब के रूप में विकसित करने की योजना है। यह शहर बुलेट ट्रेन कनेक्टिविटी के मुख्य शहर के तौर पर विकसित किया जा रहा है। इससे दक्षिण भारत के परिवहन नक्शे को बदलने की उम्मीद जगा दी है। हैदराबाद से पुणे-मुंबई, बेंगलुरु और चेन्नई को जोड़ने वाले तीन हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर प्रस्तावित हैं। इस फंडिंग और हिस्सेदारी मॉडल पर केंद्र और राज्य सरकारों के बीच चर्चा अंतिम चरण में है।
हैदराबाद के लिए बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के तहत ₹5,454 करोड़ के खर्च का अनुमान है। इतनी बड़ी रकम का आवंटन पीपीपी मॉडल के तहत किया जा सकता है। सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि इस प्रोजेक्ट को डेडलाइन में पूरा करने पर केंद्र सरकार का जोर है।

(तस्वीर AI से ली गई है।)
Hyderabad Bullet Train Hub: केंद्र-राज्य हिस्सेदारी का संभावित मॉडल
- सूत्रों के मुताबिक, इस परियोजना में हैदराबाद से जाने वाली तीनों बुलेट ट्रेन (पुणे, बेंगलुरु और चेन्नई) ट्रेन मुंबई-अहमदाबाद मॉडल के आधार पर तैयार किया जा सकता है।
- केंद्र सरकार (रेल मंत्रालय): कुल इक्विटी का लगभग 50% वहन करेगी। राज्य सरकारें: तेलंगाना, कर्नाटक, महाराष्ट्र और तमिलनाडु को अपनी-अपनी सीमा के हिस्से के लिए लगभग 25-25% योगदान देना पड़ सकता है।
- विदेशी ऋण: परियोजना लागत का करीब 81% हिस्सा जापान की संस्था JICA जैसे अंतरराष्ट्रीय स्रोतों से कम ब्याज वाले कर्ज के जरिए जुटाने की योजना है।
Bullet Train Project: PPP मॉडल पर भी विचार
दक्षिण मध्य रेलवे (SCR) के अधिकारियों के अनुसार, भारी लागत को देखते हुए पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (Public-Private Partnership-PPP) विकल्प पर भी विचार किया जा सकता है। तेलंगाना सरकार की मौजूदा वित्तीय स्थिति जैसे MMTS के ₹380 करोड़ बकाये को देखते हुए निजी निवेश को अहम माना जा रहा है। बजट 2026-27 में तेलंगाना रेलवे को रिकॉर्ड ₹5,454 करोड़ का आवंटन मिला है। फिलहाल प्राथमिकता DPR, अलाइनमेंट डिजाइन और रूट सर्वे को दी जा रही है।
तीन कॉरिडोर से बदलेगी तस्वीर
हैदराबाद पुणे/मुंबई: 1 घंटा 55 मिनट
हैदराबाद-बेंगलुरु: करीब 2 घंटे
हैदराबाद-चेन्नई: लगभग 2 घंटे 55 मिनट
शमशाबाद क्षेत्र को इन तीनों लाइनों को जोड़ने वाले मुख्य टर्मिनल हब के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे आईटी, फार्मा और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बड़ा बूस्ट मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना न केवल दक्षिण भारत की कनेक्टिविटी बदलेगी, बल्कि निवेश, रोजगार और शहरी विकास के अवसर भी खोलेगी।
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