93 फीसदी एमबीए ग्रेजुएट के पास नौकरी का टोटा, सैकड़ों संस्थान बंद होने की कगार पर
लखनऊ। उच्च शिक्षा का हाल किस कदर देश में गिर रहा है इस बात का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि देश के 93 फीसदी एमबीए पास युवा नौकरी के लायक नहीं है। देश के साढ़े पांच हजार बिजनैस मैनेजमेंट स्कूल में पढ़ रहे छात्रों को नौकरी के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। इन युवाओं को दस हजार रुपए की नौकरी भी ढूंढना मुश्किल हो रहा है। एसोसिएटेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में इस चौंकाने वाले आंकड़े का खुलासा हुआ है।
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मैनेजमेंट स्कूलों की इस हाल का मुख्य कारण घटिया शिक्षा व्यवस्था है। महज सात फीसदी छात्रों को ही एमबीए करने के बाद नौकरी मिल पा रही है। इस सर्वे में आईएआईएम और सरकारी संस्थानों के अलावा देश के टॉप 20 बिजनेस स्कूलों को भी शामिल किया गया है। खास बात यह है कि एमबीए कोर्स के लिए तीन से पांच लाख रुपए की फीस दे रहे हैं। लेकिन कैंपस प्लेसमेंट में उन्हें 8 से 10 हजार रुपए की नौकरी मिल रही है।

सीटें बढ़ रही हैं पर नौकरी नहीं
वर्ष 2011-12 एमबीए के लिए 3.6 लाख सीटें थी जोकि 2015-16 में 5.20 लाख हो गयी।

सैकड़ों संस्थान बंद हो रहे हैं
इस दौरान 220 संस्थान बंद हुए और इस वर्ष 120 बंद होने की कगार पर हैं।

इन शहरों के संस्थान भी हैं शामिल
लखनऊ, दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, कोलकाता, बंगलूरू, अहमदाबाद, हैदराबाद और देहरादून में 220 संस्थान बंद हो गये।

कैंपस प्लसमेंट में भी नहीं मिल रही नौकरी
वर्ष 2014 से 2016 के बीच 45 फीसदी नौकरियों में गिरावट आयी है। इसमें आईआईएम भी शामिल हैं।

एमबीए करना चाहते हैं इंजीनियरिंग सेक्टर में नौकरी
एमबीए करने के बाद 97 फीसदी युवा आईटी सेक्टर में नौकरी करना चाहते हैं। इनमें से सिर्फ 18.43 फीसदी लोग ही आईटी सेक्टर में काम करने के योग्य हैं।












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