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नकली डिग्री कारोबार पर नकेल, बिल पेश करेंगी स्मृति इरानी

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नई दिल्ली। रील लाइफ से रियल लाइफ में आई स्मृति इरानी ने उनकी शैक्षिक योग्यता पर सवाल उठाने वालों को करारा जवाब देने के लिए कमर कस ली है। स्मृति इरानी ने नकली डिग्री के कारोबार को पूरी तरह से प्रतिबंधित करने के लिए ठंडे बस्ते में पड़ा एकेडमिक डिपोसिटरी बिल लाने तैयारी कर ली है। खबर है कि शिक्षा मंत्री स्मृति इरानी नकली डिग्री के कारोबार को रोकने के लिए तैयार किए बिल के ड्राफ्ट को जल्द ही पेश कर सकती हैं।

कानून मंत्रालय ने दी हरी झंडी

कानून मंत्रालय की ओऱ से इस बिल को हरी झंडी मिल चुकी है। जिसके बाद प्रयास तेज कर दिए हैं। स्मृति इस बिल को लाने के लिए अन्य मंत्रियों से भी चर्चा कर रही हैं। आपको बता दें कि यह बिल वर्ष 2011 में भी पेश किया जाना था।

उस समय के मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल ने इस बिल को केबिनेट कमेटी को भेज दिया था। जिसकी अध्यक्षता ऑस्कर फ्रनांडिस कर रहे थे। लेकिन कुछ अंदरूनी कारणों की वजह से वह बिल फाइलों में ही दबा रह गया था। अब फाइलों में दबे बिल को वास्तविक रूप दिया जा सकता है।

महत्वपूर्ण बिंदुओं से जानिए क्या फायदा होगा

  • नेशनल एकेडमिक डिपोसिटरी बिल आया तो देश में नकली डिग्री के कारोबार पर रोक लगना लगभग तय है। इस बिल के मुताबिक नियमानुसार देश के सभी विश्विद्यालयों औऱ बोर्ड को हर साल दिया जाने वाले शैक्षिक प्रमाण पत्र व क्षैक्षिक इनाम का एक डाटा तैयार करने होगा। कागजों में ही नहीं बल्कि इलेक्ट्रोनिक यानी सारा डाटा इंटरनेट और कम्प्यूटर पर होगा।
  • हर एक दस्तावेज का एक बारकोड होगा जिसके माध्यम से किसी नकली शैक्षिक योग्यता के दस्तावेज की जांच हो सकेगी। कम्प्युटर में बारकोड डालते ही असली वाला दस्तावेज दिखने लगेगा। जिसके बाद दोनो का मिलान करके पता लगाया जा सकेगा कि दोनों में से कौन सी नकली है और कौन सी असली है।
  • यह अनिवार्य होगा कि सभी राज्यों को अपने विश्वविद्यालयों और शैक्षिक संस्थान अपने यहां डाटाबेस तैयार करें। ऐसा नहीं होने पर यह नियमों के विपरीत माना जाएगा।
  • हर दस साल में सरकार की एक कमेटी की ओर से इस बात की निरीक्षण किया जाएगा कि कौन से संस्थान या राज्य व केंद्रीय विश्विद्यालय अपने यहां सही तरीके से डाटाबेस बनाए रखने के लिए क्या-क्या कदम उठा रहे हैं।
  • यदि कोई आपराधिक या नकली डिग्री से जुड़ा मामला पकड़ा जाता है तो बिल के तहत ऐसी जानकारियों का भी डाटाबेस तैयार किया जाएगा।
  • कोई भी व्यक्ति अपने दस्तावेज की सत्यता जांचने के लिए अप्लाई कर सकेगा।
  • यदि किसी ने अपने दस्तावेज की सत्यता जांचने के लिए अपील की है तो अपील के सात दिन के भीतर सत्यता की जांच करनी होगी।
  • शैक्षिक संस्थानों में शिक्षा से जुड़ा सारा डाटा इलेक्ट्रोनिक फॉरमेट में रखा जाना अनिवार्य होगा।
  • कोई भी शैक्षिक संस्थान अपने यहां इस पूरे डाटाबेस को बनाए रखने व रख-रखाव के लिए एक कमेटी या एजंसी स्थापित कर सकेगा।
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