2024 के चुनावी समर में मोदी से कैसे लड़ेगा इंडिया गठबंधन? सामने हैं ये 5 बड़ी चुनौती
Lok sabha elections 2024, देश में इस साल के मध्य में आम लोकसभा चुनाव होने हैं। इन चुनावों को लेकर सत्ता और विपक्ष दोनों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। वहीं विपक्ष में कई दल इंडिया गठबंधन बनाकर बीजेपी और नरेंद्र मोदी को चुनौती देने की तैयारी में हैं।
वहीं बीजेपी और पीएम मोदी राम मंदिर, मोदी की गारंटी जैसे मुद्दों के साथ चुनाव में उतरने की तैयारी में है। लेकिन विपक्षी दलों के सामने इस चुनाव में कई बड़ी चुनौतियां मौजूद हैं। अगर विपक्ष को बीजेपी से जीतना है। तो इन मुद्दों पर सहमति बननी जरूरी है।

आइडिया और नैरेटिव स्पष्ट नहीं
फिलहाल विपक्ष दलों के लिए बीजेपी के राष्ट्रवाद और हिंदुत्व नैरेटिव का काउंटर करना मुश्किल है। पिछले कुछ सालों में इन दोनों मसलों पर बीजेपी बहुत मजबूत हुई है। इस समय विपक्ष के सामने सबसे बड़ा अनसुलझा सवाल यही है कि वह नरेंद्र मोदी की अगुआई में बीजेपी के नैरेटिव को किस तरह काउंटर करे। विपक्ष ने कभी सॉफ्ट हिंदुत्व तो कभी अपना राष्ट्रवाद सामने लाकर इसे काउंटर करने की कोशिश जरूर की है, लेकिन कोई खास सफलता नहीं मिली।
विपक्ष में PM का चेहरा कौन?
2014 से बीजेपी नरेंद्र मोदी के चेहरे पर चुनाव लड़ती आ रही है। बीजेपी को इसमें सफलता भी मिली है। बीजेपी हर चुनाव में मोदी के चेहरे से साथ उतरती है। लेकिन विपक्ष की तरफ से फिलहाल कोई ऐसा चेहरा नहीं है तो मोदी को टक्कर दे सके। इंडिया गठबंधन भी अभी तक यह तय नहीं कर पाया है कि, वे किस चेहरे के साथ इस चुनाव में उतरने वाले हैं।
सीट शेयरिंग बनी चुनौती
लोकसभा चुनाव में बीजेपी को चुनावों में चुनौती देने के लिए इंडिया गठबंधन के बैनर तले एक मंच पर 28 विपक्षी पार्टियां आईं हैं। लेकिन इन पार्टियों में के बीच सबसे मुश्किल मुद्दा सीट शेयरिंग को लेकर है। सभी विपक्षी दल 4 बार मीटिंग कर चुके हैं। लेकिन अभी सीट शेयरिंग को लेकर बात नहीं बन पा रही है। पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और पंजाब में सीट शेयरिंग को लेकर काफी दिक्कतें हैं। बंगाल में ममता अकेले चुनाव में जाना चाह रही है, तो महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे 23 सीटें मांग रहे हैं। वहीं पंजाब में कांग्रेस के नेताओं ने पार्टी आलाकमान को साफ बता दिया है कि वो 2024 के लोकसभा चुनावों में अकेले लड़ना चाहते हैं।
साझा एजेंडे पर असहमति
विपक्ष अब तक बीजेपी के सामने अपना साझा और समानांतर एजेंडा भी नहीं रख पाया। इंडिया गठबंधन में अलग-अलग विचारधारा के दलों शामिल होने के चलते कई बार साझा एजेंडे पर एक राय नहीं बन पा रही है। कई बैठकों के बाद भी इंडिया गठबंधन किसी साझा एजेंडे पर नहीं पहुंच पाई है। महंगाई, बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर विपक्ष सरकार को घेर रहा है। विपक्षी नेताओं के खिलाफ एजेंसियों के कथित दुरुपयोग का मुद्दा भी विपक्ष उठा रहा है। इसके अलावा जातिगत जनगणना की मांग को भी विपक्ष जोरों से उठा रहा है। हालांकि, हालिया विधानसभा चुनाव के नतीजों से दिखता है कि विपक्ष की जाति जनगणना की मांग फेल हो गई है।
हिंदुत्व के मुद्दों का कैसे करे काउंटर
बीजेपी ने 'फिर आएगा मोदी' कैंपेन सॉन्ग के जरिए 2024 के लोकसभा चुनाव का एजेंडा सेट कर दिया है। 22 जनवरी को रामलला की मूर्ति के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में प्रधानमंत्री मुख्य यजमान होंगे। इस मौके पर वह भाषण भी देंगे। जिसके जरिए बीजेपी खुद को हिंदुओं की हितैषी पार्टी बताने में जुटी हुई है।राम मंदिर के अलावा काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, महाकाल कॉरिडोर निर्माण जैसे कदमों से पार्टी अपने हिंदुत्व एजेंडे को और धार दे रही है। विपक्ष के पास फिलहाल इस मुद्दे को काउंटर करने का कोई विकल्प नजर नहीं आ रहा है।












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