आपके बच्चे को तो नहीं हैं Online Game की लत, एक्सपर्ट से जानें कैसे बचाएं?
Online game addiction: अगर आपके भी बच्चे ऑनलाइन गेम खेलते हैं तो आपको तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए क्योंकि ये ऑनलाइन गेम जान का दुश्मन बन चुका है। ऐसा ही दिल दहला देने वाला मामला मंगलवार को महाराष्ट्र में सामने आया है जिसमें पुणे के पिंपरी-चिंचवाड़ के 16 साल के लड़के ने ऑनलाइन गेम का टॉस्क पूरा करने के चक्कर में 14वीं मंजिल से छलांग लगाकर जान दे दी।
एक्सपर्ट की मानें तो अगर समय रहते मां-बाप बच्चे की इस लत पर कंट्रोल कर पाते तो उनके ऊपर ये दुखों का पहाड़ ना टूटता। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कैसे पहचाने कि आपके बच्चे को गेम की लत लग चुकी है और साथ ही जानते हैं कैसे इस लत से बच्चों को दूर करें?

कमरे से मिला लॉगआउट लिखा मैप
पहले बता दें पुणे में 10वीं में पढ़ने वाले उमेश श्रीराव के रूम से पुलिस को एक कागज मिला है जिसमें पेंसिंल से अपार्टमेंट से नीचे कूदने वाला टास्क का मैप बना हैं। इस पेपर पर लॉगआउट भी लिखा है। एक दूसरे पेपर में बने मैप में बताया गया है कि सुसाइड कैसे करना है?
टॉस्क पूरा करने के लिए 14वीं मंजिल से लगाई छलांग
बता दें उमेश अपनी इंजीनियर मां और छोटे भाई के साथ पुणे में रहता था और पापा नाइजीरिया में नौकरी करते हैं। ये घटना 25 जुलाई की है वो हर दिन की तरह खाना खाकर अपने कमरे में चला गया और उसकी मां दूसरे कमरे में छोटे बेटे के साथ थी तभी मां ने मोबाइल पर अपार्टमेंट ग्रुप पर बच्चे के छलांग लगाकर मौत का मैसेज मिला इसके बाद उन्होंने जाकर कमरे में देखा तो उमेश वहां पर नहीं था, 14वीं मंजिल से छलांग लगाने वाला उनका बेटा ही था।
छह महीने से बदल गया था व्यवहार
मां के अनुसार उमेश पिछले छह महीने से लोगों से बात करना छोड़ दिया था और घंटों अपने कमरे में ही बंद रहता था। अपने आप से बात करता था। पढ़ने में अच्छा था लेकिन पिछले कुछ समय से वो गुस्सा भी अधिक होने लगा था और ऑनलाइन गेम के टॉस्क के चक्कर में चाकू और आग से खेल रहा था। लैपटॉप पर पैरेंटल लॉक था लेकिन उनका बेटा उसे बायपास कर लिया था और लैपटॉप की हिस्ट्री हमेशा मिटा देता था।
किसी को नहीं पता है लैपटॉप का पासवर्ल्ड
कई ईमेल आईडी को यूज करके वो ऑनलाइन एक्टिविटी को पेरेंन्ट्स से छिपाता था। चूंकि मां-बाप को लैप टॉप का पासवर्ल्ड पता नहीं था इसलिए पुलिस साइबर एक्सपर्ट की मदद से ये पता करने की कोशिश कर रही है कि आखिर उमेश ऑनलाइन कौन सा गेम खेल रहा था।
पुलिस ने बताया ऑननाइन गेम की वजह से हुई मौत
पुलिस के अनुसार ये लड़का भी भारत में प्रतिबंधित ऑनलाइन गेम ब्लू व्हेल गेम जैसा ही कोई ऑनलाइन गेम खेलने का लती था जिसका टॉस्क पूरा करने के लिए उमेश ने 14वीं मंजिल से छलांग लगा दी। याद रहे 2017 में ऐसे ही मुंबई में 14 साल के छात्र मनप्रीत सिंह साहनी ने 7वीं मंजिल से कूद कर जान दे दी थी। इसी गेम के कारण भारत समेत अन्य देशों में लगभग 100 बच्चों ने जान दे दी थी।
जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट
वर्षों से युवाओं को मार्गदर्शन कर रहे करियर काउंसर और एक्सपर्ट दिनेश पाठक के अनुसार युवा पीढ़ी बड़ी तेजी से ऑनलाइन गेमिंग के आर्कषण में आ जाती है। मनोरंजन के लिए शुरू किया जाने वाला ऑनलाइन गेम खेल बड़ी जल्दी लत बन जाता है। शुरूआत में तो गेमिंग कंपनियां आकर्षित करने के लिए फ्री गेम खेलने का ऑफर देती हैं और ये गेम ऐसे डिजाइन होते हैं,जिससे लंबे समय तक खेलते रहें।
ऑनलाइन गेम बन जाता है नशा
कई बार ऑनलाइन गेम में पैसा कमाने का चस्का लग जाता है, जिसका असर उसकी जिंदगी और उसकी मानसिक दशा पर धीरे-धीरे पड़ने लगता है। ऑनलाइन गेमिंग का चस्का कई बार इस कदर बढ़ जाता है कि वो वो घर परिवार से स्वयं को दूर कर लेता है। इसके बगैर रह नहीं पाते हैं। तनाव और अवसाद का शिकार होने लगते हैं। कई बार टीन एजर और युवा अपना जीवन तक गवां देते हैं।
ऑनलाइन गेम की लत की ऐसे करें पहचान
- आउटडोर गेम खेलने के बजाय ऑनलाइन गेम खेलना ज्यादा पसंद करें।
- मना करने पर भी ना मानें और छिपकर ऑनलाइन गेम खेले1
- गेम खेलने के लिए झूठ बोलने लगे
- अचानक से लड़का या लड़की मोटा होने लगे
- नींद कम आए और सेहत ठीक ना रहे
- स्वभाव में चिड़चिड़ापन रहने लगे
- परिवार के साथ समय बिताने के बजाय अधिक समय तक अपने कमरे
ऑनलाइन गेमिंग से कैसे करें दूर
- बच्चों के साथ माता-पिता समय बिताए।
- बचपन से ही बच्चों के साथ फ्रेंडली व्यहार रखें।
- बच्चों पर नजर रखें कि वो क्या कर रहे हैं अगर गेम या मोबाइल पर समय बिता रहे हैं तो उन्हें प्यार से समझाएं
- बच्चों को बेवजह डांटे नहीं ताकि वो अपने मन की बात आपसे शेयर कर सकें।
- समय निकाल कर बच्चों के कमरे में जाकर उनके साथ बैठे और उनसे बातें करें।
MCI के चौंका देने वाले पढ़ें ये आंकड़े
संचार और सूचना मंत्रालय (एमसीआई) द्वारा घर-घर सर्वेक्षण किया गया जिसमें ये डरा देने वाली सच्चाई सामने आई थी।
- ऑनलाइन या वीडियो गेम खेलने वाले 13 से 18 वर्ष की आयु के लगभग पांच में से एक युवा (17 प्रतिशत) गेम में किसी ना किसी तरह game bullying का शिकार हुए।जिन्हें ऑनलाइन धमकाया गया उनमें से बहुत कम बच्चों ने अपने पेरेंन्ट्स से अपना एक्सपीरिएंस शेयर किया है।
- इस सर्वे में ये भी पाया गया कि आमतौर पर अपने बच्चों की गेमिंग गतिविधियों के बारे में उनके माता-पिता को जानकारी नहीं थी।
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