सिविल सर्विसेज डे-सीएम केजरीवाल नहीं पीएम मोदी के शब्दों से मिलेगी प्रेरणा!
नई दिल्ली। बुधवार को सिविल सर्विसेज डे था और इस मौके पर राजधानी दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। यहां पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के कुछ सिविल सर्वेंट्स को सम्मानित किया।

पीएम ने की अपील, सीएम ने धमकाया
इसके अलावा उन्होंने देश के सिविल सर्वेंट्स से कहा कि वे कतई यह ना सोचें कि वे नौकरी कर रहैं बल्कि हमेशा देश सेवा की भावना मन में रखें।
अगर आपको याद हो तो मंगलवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जो खुद भी एक ब्यूरोक्रेट रह चुके हैं, उन्होंने इस दिन से एक दिन पहले आयोजित कार्यक्रम में एक धमकाने वाले अंदाज में देश के सिविल सर्वेंट्स से काम करने की अपील की थी।
Prime Minister Narendra Modi addresses Civil Services Day
केजरीवाल के शब्दों से कम होगा भरोसा
यहीं पर आकर यह बात साफ हो जाती है कि सीएम केजरीवाल के शब्द शायद उस ब्यूरोक्रेट का भरोसा और काम के लिए उसकी लगन को भी खत्म कर सकते हैं, जो ईमानदारी से देश के लिए अपना काम करने में यकीन रखता है।
अगर आपको हमारी बात पर यकीन नहीं है तो फिर आप खुद पढ़िए कि पीएम मोदी ने देश के सिविल सर्वेंट्स से क्या अपील की और सीएम केजरीवाल ने किन शब्दों का प्रयोग किया था।
Prime Minister Narendra Modi addresses Civil Services Day
क्या कहा पीएम मोदी ने
- जब विद्यार्थी परीक्षा देकर घर लौटता है तो रिजल्ट का इंतजार होता है।
- वहीं वह यह भी सोचता है कि अगले साल शुरू से पढ़ूंगा।
- लेकिन जिंदगी वे जी सकते हैं जो रुकावट को अवसर समझते हों।
- जो लोग थकावट नहीं महसूस करते वे आगे बढ़ते हैं।
- दायित्व बढ़ने के साथ ही कुछ नया करने की ऊर्जा भी बढ़नी चाहिए।
- कुछ नया करने की कोशिश ही देश में बदलाव लाएगी।
- सिर्फ प्रशासक या नियंत्रक बन जाना ही काफी नहीं है।
- सभी को बदलाव के लिए काम करना होगा।
- सबको को एक ऐसा माहौल बनाना होगा जहां सभी योगदान दे सके।
- 125 करोड़ लोगों की ऊर्जा देश को ऊंचाईयों पर ले जाएगी।
क्या कहा था सीएम केजरीवाल ने
- हम कुछ भी बर्दाश्त कर सकते हैं, लेकिन राजनीति नहीं।
- अगर आप राजनीति में रुचि रखते हैं तो इस्तीफा दें, चुनाव लड़ें।
- चुनाव लड़ने और जीतने के बाद हमसे मुकाबला करें।
- आम आदमी पार्टी की सरकार ने दिल्ली की जनता की आकाक्षाओं को पूरा किया है।
- चाहे आप पसंद करें या नहीं, लेकिन हम 10-15 सालों के लिए यहीं हैं।
- जो अधिकारी 45 से ऊपर के हैं, उनके पास कोई चारा नहीं है।
- नौकरशाहों को ईमानदार, पारदर्शी सरकार का हिस्सा होना चाहिए।
- दिल्ली के लोगों की सेवा करनी चाहिए।












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