कश्मीर में अफ़वाहों के बीच कैसे बीता दिन

जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक
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जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक

शुक्रवार से जमात-ए-इस्लामी और कुछ शीर्ष अलगाववादी नेताओं को हिरासत में लिए जाने के बाद से भारत प्रशासित कश्मीर घाटी में अनिश्चितता और दहशत का माहौल है.

शुक्रवार देर रात जेकेएलएफ़ प्रमुख यासीन मलिक को हिरासत में लिया गया और उन्हें कोठीबाग पुलिस स्टेशन में रखा गया है.

शनिवार को कश्मीर में बड़ी संख्या में सेना को भेजे जाने पर यह अफ़वाह जोरों पर थी कि कश्मीर पर केंद्र सरकार कुछ बड़े क़दम उठा रही है. लेकिन यह स्पष्ट नहीं था कि क्या होने जा रहा है.

कश्मीर
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बड़ी गिरफ़्तारियों और अनुच्छेद 35-ए के साथ संभावित छेड़छाड़ की आशंका के मद्देनज़र अलगाववादियों ने रविवार को कश्मीर बंद का ऐलान किया था. अलगाववादियों और व्यापार मंडल ने धमकी दी है कि अगर अनुच्छेद 35-ए में कोई छेड़छाड़ की गई तो इसके ख़िलाफ़ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू किया जाएगा.

ऑल पार्टी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस ने अपने एक बयान में कहा है कि नहीं ख़त्म होने वाली यह लड़ाई और लगातार गिरफ़्तारियां भारत की हताशा के संकेत हैं और उन्होंने (भारत ने) पूरे आवाम के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ दिया है.

अलगाववादियों के बुलाए बंद की वजह से कश्मीर में रविवार को जनजीवन पूरी तरह से ठप रहा, दुकानें नहीं खुलीं और सड़कें सूनी रहीं.

रविवार को विरोध प्रदर्शनों को रोकने के लिए, प्रशासन ने पूरे कश्मीर में सुरक्षाबलों की भारी तैनाती की साथ ही श्रीनगर शहर के कई इलाक़ों में प्रतिबंध लगाए.

जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक
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जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक

राज्यपाल की अपीलः अफ़वाहों पर ध्यान न दें

राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने रविवार को कश्मीर की आवाम को बताया कि सुरक्षाबलों की तैनाती चुनाव को लेकर की गई है. उन्होंने लोगों से इसे किसी अन्य कारणों से नहीं जोड़ने की अपील की.

बीबीसी से उन्होंने बताया, "कश्मीर में लोग अफ़वाहें फैला रहे हैं और मैं क्या कर सकता हूं, इसे कैसे रोकूं? कुछ हलकों में फैल रही बड़ी अफ़वाहों पर लोगों को यकीन नहीं करना चाहिए और शांति बनाए रखनी चाहिए. ये अफ़वाहें अनावश्यक रूप से लोगों के मन में भय पैदा कर रही हैं, जिससे आम जीवन में तनाव पैदा हो रहा है. फ़ौज ने सुरक्षा से जुड़ी कुछ ऐहतियात बरती है, ये पुलवामा में हुए हमले को लेकर उठाए जा रहे उपाय हैं."

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उन्होंने कहा, "पुलवामा में हमले और भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को बाधित करने की पुरज़ोर कोशिशों में लगे चरमपंथी संगठनों के किसी भी संभावित करतूत से मुक़ाबले करने को लेकर सुरक्षाबल ये क़दम उठा रही है. इस सुरक्षा तैनाती को केवल चुनाव प्रक्रिया के संदर्भ में देखा जाना चाहिए. अगले कुछ दिनों में भारतीय चुनाव आयोग की एक बड़ी टीम यहां का दौरा कर चुनावी प्रक्रिया से जुड़े अंतिम फ़ैसले लेने वाली है. अगले कुछ दिनों में और सुरक्षाबल तैनात किए जाएंगे.''

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जब उनसे यह पूछा गया कि जमात-ए-इस्लामी के कार्यकर्ताओं और अन्य अलगाववादियों को हिरासत में क्यों लिया गया तो उन्होंने जवाब दिया, "कश्मीर में यह कोई नई बात नहीं है. ये लोग राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर कट्टरता फैलाते हैं, विशेष रूप से जमात के लोग. दक्षिण कश्मीर में ये लोग युवाओं को कट्टरपंथी बनाते हैं. जब भी कोई मुठभेड़ होती है, ये मस्जिदों से लोगों को पथराव के लिए उकसाते हैं."

पेट्रोल, डीज़ल, कश्मीर
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पेट्रोल, डीज़ल, कश्मीर

पेट्रोल-डीज़ल की आपूर्ति सीमित की गई

स्थानीय प्रशासन ने रविवार को पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति को सीमित करने के आदेश दिए, इससे दहशत के माहौल में घिरे कश्मीर में स्थिति और भी विकट हो गई.

कश्मीर के संभागीय आयुक्त बशीर अहमद खान ने रविवार को बताया कि श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग के लगातार बंद रहने के कारण इलाक़े में कुछ पेट्रोलियम उत्पादों की राशनिंग के आदेश दिए गए हैं.

अलगाववादी नेतृत्व ने अपनी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा है कि क़रीब 200 जमात-ए-इस्लामी कार्यकर्ताओं और अलगाववादी नेताओं को गिरफ़्तार किया गया है.

एक अलगाववादी नेता के भाई ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि 23-24 फ़रवरी की रात को पुलिस ने उनके भाई के घर पर उनकी तलाशी में छापा मारा. उन्होंने बताया कि उनके भाई पिछले कुछ दिनों से घर पर मौजूद नहीं थे.

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इस बीच, रविवार को दक्षिण कश्मीर के कुलगाम ज़िले में सुरक्षाबलों और चरमपंथियों के बीच मुठभेड़ हुई. इसमें पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) अमन ठाकुर की मौत हो गई है जबकि सेना का एक जवान घायल हुआ है.

अपुष्ट रिपोर्ट्स में बताया गया है कि मुठभेड़ में तीन चरमपंथी भी मारे गए हैं.

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