कैसे 2,800 करोड़ रुपये में हुई कोरोना की सिर्फ इन दो दवाओं की बिक्री ? पूरी कहानी समझिए
मुंबई, 12 अक्टूबर: कोरोना की दूसरी लहर के बारे में बात करते ही आज भी आदमी कांप उठता है। उस दौरान जिसके नाते-रिश्तेदार या दोस्त बीमार पड़े उनपर क्या गुजरी यह वही जानते हैं। अस्पतालों में बेड की किल्लत, दवाई दुकानों से जे जरूरी दवा गायब और अपनों की सांसें चलती रहें इसलिए ऑक्सीजन की कतार में कई-कई घंटों तक का इंतजार। एक नई रिसर्च से पता चला है कि सिर्फ 15 महीनों में ही देश में कोरोना के उपचार के लिए दो एंटी-वायरल दवाओं की बिक्री का आंकड़ा 2,000 और 700 फीसदी तक बढ़ गया था। इस दौरान सिर्फ इन्हीं दो दवाओं- रेमडेसिवीर और फेविपिराविर की 2,800 करोड़ रुपये की बिक्री हुई।

रेमडेसिवीर और फेविपिराविर: 2,800 करोड़ रुपये की बिक्री
सिर्फ पिछले 15 महीनों में ही भारतीयों ने कोविड-19 के इलाज में इस्तेमाल हुई दो दवाओं की 25 करोड़ गोलियों और 50 लाख इंजेक्शन की शीशियों का इस्तेमाल किया है, जिसपर उन्होंने रिकॉर्ड आंकड़ों के हिसाब से कम से कम 2,800 करोड़ रुपये खर्च कर डाले हैं। कोरोना के इलाज के दौरान इस्तेमाल हुईं ये दवाइयां हैं- रेमडेसिवीर और फेविपिराविर। इनमें ब्लैक में बेची गई इन चर्चित दवाओं का कोई रिकॉर्ड नहीं शामिल है। ये दोनों वो दवाइयां हैं जिनको लेकर कोरोना की दोनों लहरों के दौरान सोशल मीडिया पर खूब कोहराम मचा हुआ था। इनकी इतनी ज्यााद किल्लत हो गई थी कि लोग मुंह मांगी कीमतों पर अपनों की जान बचाने के लिए इसे खरीदने को तैयार हो रहे थे।

52 लाख शीशियां और 25.2 करोड़ गोलियों की बिक्री हुई
फेविपिराविर जापान में विकसित एक एंटी-वायरल दवा है, जिसपर दुनियाभर में कई तरह के ट्रायल हो रहे हैं। वहीं, रेमडेसिवीर उन दवाओं में से है, जिसका कोविड के मरीजों पर धड़ल्ले से इस्तेमाल किया गया है और यह भारत के कोविड ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल में भी शामिल रहा है। न्यूज18 डॉट कॉम ने अमेरिका स्थित फार्मा रिसर्च कंपनी आईक्यूविया के आंकड़ों के हवाले से कहा है कि भारत में रेमडेसिवीर इंजेक्शन की 52 लाख शीशियां और फेविपिराविर के करीब 1.5 करोड़ स्ट्रिप्स बेची गई। फेबिफ्लू ब्रांड के नाम से बिकने वाली इस दवा की एक स्ट्रिप में 17 गोलियां होती हैं, जिसके हिसाब से कुल 25.2 करोड़ गोलियों की बिक्री हुई।

रेमडेसिवीर की बिक्री में 2,000 फीसदी का इजाफा
आंकड़ों से पता चलता है कि महामारी फैलने के बाद से एंटीवायरल श्रेणी की दवाओं की बिक्री में रिकॉर्ड इजाफा हुआ है। इससे पता चलता है कि कुल दवा बिक्री में एंटी-वायरल दवाई का हिस्सा 70 फीसदी है, जिसमें सबसे ज्यादा हिस्सेदारी रेमडेसिवीर और फेविपिराविर की है, जो कि पिछले एक साल में तीन गुनी हो गई है। अगस्त, 2020 में इस श्रेणी की 1,082 रोड़ रुपये की दवाई बिकी, जो कि अगस्त, 2021 तक आते-आते 3,601 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। इस दौरान रेमडेसिवीर की बिक्री में 23 गुना या 2,000 फीसदी का इजाफा हुआ। यानी इसकी बिक्री 61 करोड़ रुपये से बढ़कर 1,413 रुपये तक पहुंच गई। वहीं फेविपिराविर की बिक्री में 8 गुना या 700 प्रतिशत का इजाफा हुआ। इसकी बिक्री 148 करोड़ रुपये से बढ़कर 1,185 रुपये की हो गई।
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ब्लैक मार्केट में बिकी दवाइयों का आंकड़ा नहीं
खासकर कोरोना की दूसरी लहर में इन दवाओं की किल्लत से किस कदर हाहाकार मचा था, यह वही जानते हैं जिनके अपने उस दौरान कोविड संक्रमित हुए थे। इनकी कालाबाजारी की खबरों से कोहराम मचा हुआ था, जिसके बाद सरकार ने सख्ती शुरू की और कई जगह छापेमारी की कार्रवाई को अंजाम दिया गया। रेमडेसिवीर बनाने वाली कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि 'बिक्री का आंकड़ा बहुत ज्यादा हो सकता है, विशेष रूप से रेमडेसिवीर के लिए, क्योंकि यह दवा काला बाजार में पहुंच गई थी और बहुत अधिक कीमतों पर बेची गई थी। यही नहीं चरम के दौरान और भी ज्यादा बिक्री हो सकती थी, लेकिन तब निर्माण की क्षमता कम थी।'

केस बढ़ने के साथ बिक्री में इजाफा
रेमडेसिवीर जब जून, 2020 में लॉन्च की गई थी, तब भारत में कोरोना के करीब 15,000 केस थे और इसकी 1,000 शीशियों की बिक्री हुई। सितंबर आते-आते जो कि पहली लहर का चरम था, इसकी 3.41 लाख शीशियां बिक गईं। नवंबर तक इसकी बिक्री 4 लाख शीशियों तक पहुंच गई, लेकिन उसके बाद इसकी ब्रिकी कम होने लगी, क्योंकि कोरोना के मामले भी घटने लगे थे। लेकिन, दूसरी लहर में तो सारे रिकॉर्ड ही टूट गए। अप्रैल, 2021 में 287 करोड़ रुपये में 9.65 लाख शीशियां बिकीं। मई में यह संख्या 7.87 शीशियों तक गई। यह भारत में कोविड की दोनों लहरों का चरम था, जब रोजाना 4 लाख से भी ज्यादा केस आने लगे थे और अस्पतालों में जगह नहीं बची थी। इसी तरह फेविपिराविर की बिक्री जून, 2020 में 46,000 स्ट्रिप्स थी, जो कि अप्रैल, 2021 में 54 लाख स्ट्रिप्स तक पहुंच गई। फेबिफ्लू ब्रांड से फेविपिराविर बेचेने वाली सबसे टॉप कंपनी ग्लेनमार्क है, वहीं रेमडेसिवीर सिप्ला सिप्रेमी, जायडस कैडिला रेमडैक और मायलैन देसरेम के नाम से बेचती हैं।












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