योगी की नई फ़िल्म सिटी से मुंबई को कितना ख़तरा

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दो दिन के दौरे पर मुंबई पहुंचे जहाँ पहुंचते ही उन्होंने अभिनेता अक्षय कुमार से मुलाक़ात की और अब उनका 50 से अधिक अभिनेता, फिल्म निर्माताओं और निर्देशकों से मुलाकात का कार्यक्रम है.
उनके मुंबई आने का मक़सद नोएडा में बनने जा रही भारत की सबसे बड़ी और अत्याधुनिक फिल्म सिटी है, जिसकी रूप रेखा पर वह फ़िल्म जगत के दिग्गजों से ना केवल चर्चा करना बल्कि उनकी ज़रूरतों पर भी अमल करना चाहते हैं. यह फिल्म सिटी यमुना एक्सप्रेस-वे से सटे ग्रेटर नोएडा सेक्टर-21 में 1,000 एकड़ में बनाने की योजना है.
हालाँकि उनके इस प्रयास को लेकर मुंबई के फ़िल्म उद्योग से जुड़े लोगों की राय बँटी हुई है.
'अमिताभ, शाहरूख और सलमान क्यों नहीं मिले?'
ऑल इंडिया सिने वर्कर्स एसोसिएशन के प्रमुख सुरेश श्यामलाल गुप्ता को नहीं लगता ये पहल उतनी कामयाब हो पाएगी.
वो कहते हैं," वैसे तो देखा जाए तो लखनऊ में कई फ़िल्मों की शूटिंग चल रही है. ये कभी-कभार तो मुमक़िन है लेकिन ज़्यादा फ़िल्मों की शूटिंग नहीं हो पाएगी. मुंबई में औरतें सुरक्षित महसूस करती है. मुंबई में 30 प्रतिशत महिलाएं हैं जो उत्तर प्रदेश की हैं और फ़िल्मों से जुडी हैं. दिन रात काम करने की जो आज़ादी यहाँ है क्या वो आज़ादी उनको वहां मिल पाएगी?"
उन्होंने साथ ही कहा,"योगी जी आए लेकिन उनसे मिलने अभिनेता अक्षय कुमार और वो लोग ही गए जो मोदी जी की बात टाल नहीं सकते. लेकिन अमिताभ बच्चन, शाहरुख़ और सलमान जैसे कलाकार नहीं गए क्योंकि कोई भी वहां नहीं जाना चाहता. सबके लिए सुरक्षा का मुद्दा है."
सुरेश श्यामलाल गुप्ता साथ ही ध्यान दिलाते हैं कि नोएडा में पहले से बनी फ़िल्म सिटी सफल नहीं हुई है.
वह कहते हैं, '' एक फ़िल्म सिटी है नोएडा में आप उसे उभार नहीं पाए और अब बात कर रहे हैं कि अत्याधुनिक फिल्म सिटी बनाएंगे. आपने अभी एक नींव भी नहीं रखी और अभी से इस पर क्यों बात करना...मुझे लगता है 2022 में उत्तर प्रदेश में चुनाव है और उन चुनावों को ध्यान में रखकर एक माहौल तैयार किया जा रहा है."

फ़िल्मों का प्रोडक्शन बढ़ेगा
वहीं जाने माने फ़िल्म विश्लेषक और डिस्ट्रीब्यूटर राज बंसल इस पहल का स्वागत करते हैं.
उन्होंने कहा," हमने कोशिश की थी जयपुर में कुछ करने की लेकिन कुछ हो नहीं पाया. अब जब उत्तर प्रदेश सरकार इसकी पहल कर रही है ये बहुत अच्छी शुरुआत है. इस आधुनिक फ़िल्म सिटी के आने से फ़िल्मों का प्रोडक्शन बढ़ जाएगा क्योंकि मुंबई में फ़िल्मों के लिए काम बहुत सीमित था.
वो कहते हैं, "टीवी सीरियल का काम है, अब तो वेब सीरीज भी बनने लगी हैं. बड़े-बड़े सेट लग जाते थे, फ़िल्म सिटी बुक हो जाया करती थी तो बाकियों को इंतज़ार करना पड़ता था लेकिन अब नोएडा में बड़ी फ़िल्म सिटी के साथ तैयार होगी तो काम ज़्यादा बढ़ेगा."
बॉलीवुड के बड़े-बड़े सितारे मुंबई में रहते हैं तो क्या वो नोएडा फ़िल्म सिटी में लम्बे समय तक रहना पसंद कर पाएंगे?

इस सवाल पर राज बंसल कहते हैं,"अब चीज़ें बदल गई हैं. पहले कलाकार एक दिन शूटिंग पर आता था तो तीन दिन नहीं आता था लेकिन अब जब वो फ़िल्म की शूटिंग के लिए घर से दूर रहेगा तो अपना पूरा समय शूटिंग में व्यस्त रखेगा और अपना काम जल्द से जल्द ख़त्म करने की सोचेगा....मुंबई से दिल्ली जाने की बात करें तो अब बेहद आसान है. 25 से 30 फ्लाइट्स हैं, कलाकारों के रुकने के लिए 5 सितारा होटल है. कोई दिक्कत नहीं है."
'सिर्फ़ ऐलान बन कर ही ना रह जाए'
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए राज बंसल कहते हैं कि मुंबई में फ़िल्म उद्योग में काम करने वाले कामगारों को भी कोई नुकसान नहीं होगा, जैसे दक्षिण की फिल्मों की टीम अलग होती है, वहां के वर्कर अलग होते हैं.
पर वो साथ ही चिंता जताते हुए कहते हैं कि 'मुझे बस एक ही बात का डर है कि इस तरह की घोषणा पहले भी हुई हैं'.
'भारत में कुछ शूटिंग सिर्फ़ फ़िल्मसिटी में ही मुमक़िन'
फेडरेशन आफ़ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉई यूनियन के अध्यक्ष बीएन तिवारी को भी लगता है कि नोएडा में फ़िल्म सिटी बनने से फ़िल्म इंडस्ट्री को फ़ायदा होगा.
वो कहते हैं,"हाल फ़िलहाल की बात करूं तो लखनऊ में आप जाकर देखें वहां भी बड़ी-बड़ी फिल्मों की शूटिंग चल रही है क्योंकि आज वहां की सरकार दो से ढाई करोड़ तक की सब्सिडी दे रही है. आज कोई भी प्रोड्यूसर फ़िल्म बनाता है तो शुरू से ही सुविधा की तलाश रहती है कि हम कहां पर सूट करें जहाँ हमें सस्ता पड़े."
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बीएन तिवारी कहते हैं कि," अब ऐसा हो गया है जहां सुविधाएं मिलेंगी वहीं काम होगा. यह यूपी सरकार इतनी भागीदारी दिखा रही है. मुंबई आकर लोगों से मिलना और इसपर चर्चा करना. कई बड़े-बड़े कलाकार अक्षय कुमार, अजय देवगन, शाहरुख़ ख़ान और सब सलमान ख़ान ने भी उत्तर प्रदेश जाकर शूट किया है. सबको सुविधा मिल रही है तभी तो सब वहां जा रहे हैं शूटिंग करने."
महाराष्ट्र सरकार की भूमिका पर बीएन तिवारी कहते हैं कि ''हमने सरकार से कितनी बार बात की लेकिन उसके बाद भी कोई सुविधा नहीं मिली. कोरोना काल में लोगों का काम बंद था मैंने कितने पत्र लिखे, बात करने की कोशिश की कि सरकार मुआवज़ा दे मजदूरों को लेकिन कुछ भी नहीं हुआ. कोई सुनवाई नहीं हुई को किससे बात करें?"
वो कहते हैं,"इतिहास देखें तो पहले लाहौर में थी फिल्म इंडस्ट्री वहां से कोलकाता आई और फिर कोलकाता में जब यूनियनबाजी शुरू हुई तो वहां से लोग छोड़ कर मुंबई आ गए और मुंबई में अगर ऐसा होगा तो वो कहीं और चले जाएंगे."
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