Coronavirus: WHO की चीफ साइंटिस्ट ने बताया, भारत पर कितना खतरा ?

नई दिल्ली- कोरोना वायरस ने चीन जैसे देश में देखते ही देखते तीन हजार से ज्यादा लोगों की जान ले ली। इसीलिए सवाल है कि अगर भारत में इसने महामारी का शक्ल अख्तियार किया तो क्या इससे निपटने में हम सक्षम हैं। इस पर नियंत्रण करने के लिए हमारी तैयारी कैसी है। क्योंकि, चीन हम से कहीं ज्यादा विकसित है, लेकिन फिर भी वहां यह बीमारी कहर बरपा गई। लेकिन, विश्व स्वास्थ्य संगठन की चीफ साइंटिस्ट ने भारत के बारे में जो कुछ भी कहा है वह हम सबके लिए बहुत ही राहत भरी खबर है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की चीफ साइंटिस्ट सौम्या स्वामिनाथन ने एक विस्तृत इंटरव्यू में भारत में इस बीमारी के बढ़ते खतरे के मद्देनजर काफी महत्वपूर्ण जानकारियां दी हैं और कहा है कि इसके लिए यहां एक राष्ट्रीय योजना तैयार है।

भारत में मरीजों की संख्या हो चुकी है 28

भारत में मरीजों की संख्या हो चुकी है 28

भारत में कोरोना वायरस के खतरे को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन के नजरिए पर बात करें उससे पहले यह जान लेना जरूरी है कि देश में इस वक्त Covid-19 के संक्रमण की क्या स्थिति है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्ष वर्धन ने बुधवार को इस बात की पुष्टि की है कि देश में कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की कुल संख्या 28 तक पहुंच चुकी है। इनमें दिल्ली में 1, आगरा में 6, इटली से आए 16 टूरिस्ट और एक भारतीय ड्राइवर को यह वायरस अपनी गिरफ्त में ले चुका है। इनके अलावा तेलंगाना में भी 1 शख्स और केरल में 3 लोगों का टेस्ट पोजिटिव आया है। इसका असर ये हुआ है कि लोगों में दहशत बढ़ी है और लोग मास्क जैसी चीजें धड़ल्ले से खरीदने लगे हैं, जिसकी वजह से बाजार में इनकी किल्लत हो गई है और कीमतों में भारी इजाफा हो गया है।

भारत के पास एक अच्छी राष्ट्रीय योजना है- डब्ल्यूएचओ

भारत के पास एक अच्छी राष्ट्रीय योजना है- डब्ल्यूएचओ

विश्व स्वास्थ्य संगठन की चीफ साइंटिस्ट सौम्या स्वामिनाथन ने सीएनएन-न्यूज 18 को दिए एक इंटरव्यू में कोरोना वायरस से निपटने के लिए भारत की तैयारियों पर काफी अहम जानकारी दी है। उन्होंने कहा है 'यह सब तैयारियों पर निर्भर करता है। यह वक्त हमारे लिए तैयार रहने का है। सौभाग्य से हमें पहले ही काफी चेतावनियां मिल चुकी थीं, क्योंकि इसकी शुरुआत चीन से शुरू हुई और दूसरे देशों में गई, इसलिए हमारे पास व्यवस्था तैयार करने के लिए कई हफ्ते थे। मैं समझती हूं कि हमारे पास एक अच्छी राष्ट्रीय योजना है। मैं समझती हूं कि भारत इससे निपटने में कामयाब होगा।'

'ज्यादातर मामलों में बहुत कम असर'

'ज्यादातर मामलों में बहुत कम असर'

जब उनसे पूछा गया कि अभी तक यह निर्णायक तौर पर तय नहीं है कि इसके फैलने का असल कारण क्या है, न ही इसके इलाज के लिए को दवा है। तो क्या ऐसा भी हो सकता है कि कुछ इंफेक्शन इतना कम हो कि पता ही न चलता हो। इस पर उन्होंने कहा कि 'इस वायरस के बारे में बहुत कुछ जान चुके हैं। ज्यादातर मामलों में इसका असर बहुत कम होता है, जैसे कि साधारण बुखार, सर्दी-जुकाम आदि जिससे आप ठीक भी हो जाते हैं। ऐसे भी लोग होंगे जिनपर इस वायरस का अटैक हुआ होगा, लेकिन उन्हें पता भी नहीं चला होगा। सिर्फ 15 से 20 फीसदी मामलों में ही वायरस ने बहुत ज्यादा असर किया है, जिसमें फेफड़े प्रभावित होते हैं, वायरल निमोनिया हो जाता है और आईसीयू में रखने की जरूरत पड़ जाती है। वैसे आमतौर पर इसका वायरस साधारण सर्दी जैसा ही है।'

'एक स्वस्थ्य इंसान को मास्क पहनने की कोई जरूरत नहीं'

'एक स्वस्थ्य इंसान को मास्क पहनने की कोई जरूरत नहीं'

आमतौर पर भारत के लोग मास्क या ग्लोव पहनने के लिए तैयार नहीं होते। ऐसे में क्या भारत में यह बीमारी और तेजी से फैल सकती है? इसपर स्वामीनाथन ने कहा कि 'बुनियादी स्वच्छता जैसे कि हाथ धोना, अपना फेस नाक और आंखें नहीं छूना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण है। जब आपको सर्दी-जुकाम है या अगर आप वायरस पीड़ित किसी मरीज की देखभाल कर रहे हैं, तभी आपको मास्क पहनने की आवश्कता है। एक स्वस्थ्य इंसान को मास्क पहनने की कोई जरूरत नहीं है। इससे मास्क की किल्लत ही बढ़ेगी।'

'अभी तक सरकार ने बहुत अच्छा काम किया है'

'अभी तक सरकार ने बहुत अच्छा काम किया है'

चीन ने कई शहरों को अलग-थलग कर दिया, यात्राओं पर पाबंदी लगा दी। लोगों को घरों से नहीं निकलने दिया। लेकिन, क्या भारत में ऐसा करना संभव है? इस पर विश्व स्वास्थ्य संगठन की चीफ साइंटिस्ट ने कहा कि 'हर देश खतरे का आंकलन करने के बाद ही कोई फैसला करते हैं। चीन ने जो कदम उठाए वह उस समय उनके लिए जरूरी था। भारत में वह स्थिति नहीं आई है। लेकिन, हमें इसके लिए तैयारी रखनी पड़ेगी और हर योजना के बारे में लोगों को बताना पड़ेगा। एक सोची-समझी योजना की आवश्यकता है। अभी तक सरकार ने बहुत अच्छा काम किया है।'

साधारण सर्दी-जुकाम से कैसे करें अंतर ?

साधारण सर्दी-जुकाम से कैसे करें अंतर ?

भारत में यह मौसम में बदलाव का वक्त है। लोग मौसमी तौर पर सर्दी-जुकाम, गले की दिक्कतों या हल्के बुखारों से पीड़त हो सकते हैं। ऐसे में कोई इंसान सामान्य सर्दी-जुकाम और कोरोना वायरस में कैसे अंतर करे? इसके जवाब में स्वामिनाथन ने बताया कि 'दोनों में अंतर करने का ना कोई तरीका है और न ही इसकी कोई आवश्यकता ही है। हम कुछ साधारण सावधानियां बरत सकते हैं। खांसी में स्वच्छता बरतनी बेहद जरूरी है। लोगों को टिशू या कोहनी का इस्तेमाल करना चाहिए। अगर आपको सर्दी-खांसी है तो बाहर जाने से बचिए। मास्क पहनिए। अगर सांस लेने में दिक्कत हो रही है तो अस्पताल जाइए।'

यह इतना खतरनाक क्यों है?

यह इतना खतरनाक क्यों है?

कई तरह की वैश्विक महामारियां फैली हैं, लेकिन इसको लेकर इतनी चिंता क्यों है? इस पर इन्होंने कहा कि ये बाकियों से अलग है। यह बहुत तेजी से फैलता है और जल्दी दूसरे तक संक्रमित हो जाता है। हमने पहले फ्लू, एच1एन1,ए195,SARS,MERS देखी है, सबसे से सीखने को मिला है। विश्व स्वास्थ्य संगठन इसपर रिसर्च के लिए एक ब्लूप्रिंट तैयार कर रहा है, इससे निपटने के रास्ते निकाले जा रहे हैं। यह बड़ी चुनौती है, लेकिन इसपर दुनिया एकजुट है।

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