हैदराबाद में 1800 रोहिंग्या मुसलमान बने नासूर
हैदराबाद। पिछले भाग में आपने पढ़ा कि (Click on Previous) बर्दवान ब्लास्ट में म्यांमार का क्या रोल खालिद की गिरफ्तारी के साथ सामने आया है। अब पढ़िए कि कैसे और क्यों म्यांमार से आकर इन मुसलमानों ने हैदराबाद को अपना ठिकाना बनाया।
1800 रोहिंग्या मुसलमान हैदराबाद में
खास बात है कि बहुत सारे रोहिंग्या मुसलमानों ने इस समय हैदराबाद में शरण ले रखी है। बोद्धगया ब्लास्ट्स के बाद जो जांच हुई उसमें सामने आया कि म्यांमार से 1800 रोहिंग्या मुसलमानों ने हैदराबाद में शरण ले रखी है। पुराना हैदराबाद इन रोहिंग्या मुसलमानों का अहम गढ़ है। जब से इस बात का पता लगा तब से ही इन लोगों पर कड़ी नजर रखी गई और जांच की गई।
जो सच सामने आया वह भी काफी हैरान करने वाला था करीब 90 प्रतिशत केस सही निकले सिर्फ 10 प्रतिशत मुसलमान ही ऐसे निकले जो असल में भारत में शरण लेने के लिए आए थे। हैदराबाद इंटेलीजेंसी की मानें तो वर्ष 2012 से हैदराबाद में घुसपैठ शुरू हुई।
हैदराबाद में 10 प्रतिशत रोहिंग्या मुसलमानों का प्रयोग अक्सर आतंकी संगठन खुद को बचाने के तौर पर करते हैं। आतंकी संगठन खतरे और डर में जी रहे हैं और जब कभी भी किसी संगठन पर नजर होती है तो इन संगठनों को सुरक्षा की कमी महसूस होती है, यह इन 10 प्रतिशत रोहिंग्या मुसलमानों का सहारा लेने लगते हैं।
ट्रेंड ऑपरेटिव है खालिद
बर्दवान ब्लास्ट के बाद इस बारे में जानकारी मिली की अलकायदा और जेएमबी ने दक्षिण भारत में भी अपने कई मॉड्यूल और बेस बना डाले हैं। इन संगठनों ने कई ऐसी जगह तलाश ली हैं जो इनके छिपने के लिए काफी मददगार हैं। इसके अलावा हथियारों को सुरक्षित रखने के लिए कई लोगों को ट्रेनिंग तक दी गई है।
जिस खालिद को मंगलवार को गिरफ्तार किया गया है वह इसी तरह का प्रशिक्षित ऑपरेटिव है जिसे जेएमबी ने स्टैंडबाई के तौर पर रखा था। अगर बर्दवान ब्लास्ट की साजिश में जेएमबी खालिद का प्रयोग काफी कारगर तरीके से करने का प्लान तैयार कर चुका था।












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