Gandhi Jayanti: आखिर कैसे गांधी जी को मिला 'महात्मा-बापू' का नाम?

मोहनदास करमचंद गांधी जिन्हें लोग महात्मा गांधी के नाम से जानते हैं, उनकी आज जयंती है। महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्तूबर को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। पूरा देश और दुनिया गांधी जी को महात्मा गांधी के नाम से जानती है। लोग उन्हें प्यार से बापू भी कहते हैं। लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि आखिर गांधी जी को महात्मा गांधी और बापू क्यों कहा जाता है, आखिर कैसे उन्हें महात्मा की उपाधि मिली और पूरी दुनिया में वह महात्मा गांधी के नाम से विख्यात हुए।

दरअसल महात्मा गांधी की पत्नी कस्तूरबा गांधी का 6 जुलाई 1944 को जब निधन हुआ तो इस मौके पर सुभाष चंद्र बोस ने सिंगापुर रेडियो पर शोक जाहिर किया। इस दौरान सुभाष चंद्र बोस ने उन्हें बापू कहकर संबोधित किया था।

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और भी हैं दावे

ऐसी मान्यता है उसके बाद से ही महात्मा गांधी को लोग बापू कहकर पुकारते हैं। लेकिन कुछ जानकारों का कहना है कि बिहार के चंपारण में रहने वाले किसान राजकुमार शुक्ल ने उन्हें यह उपाधि दी थी। उन्होंने ही 1917 में चंपारण सत्याग्रह से ठीक पहले गांधी जी को यहां आमंत्रित किया था।

किसने दी महात्मा की उपाधि

वहीं गांधी जी को महात्मा की उपाधि किसने दी तो इसमें भी मतांतर हैं। इतिहासकारों की मानें तो रवींद्रनाथ टैगोर ने गांधी जी को महात्मा की उपाधि दी थी। उन्होंने 12 अप्रैल 1919 में अपने एक लेख में गांधी जी को महात्मा कहकर संबोधित किया था। महात्मा का संस्कृत भाषा में अर्थ महान आत्मा होता है।

स्वामी श्रद्धानंद ने भी कहा महात्मा

एक मत है कि 1915 में राजवैध जीवराम कालिदास ने पहली बार गांधी जी को महात्मा कहकर संबोधित किया था। दूसरा मत यह भी है कि स्वामी श्रद्धानंद ने 1915 में गांधी जी को महात्मा कहकर संबोधित किया था। बहरहाल लिखित दस्तावेज में रवींद्रनाथ टैगोर ने ही पहली बार गांधी जी को अपने लेख में महात्मा कहकर संबोधित किया था।

महज 13 की उम्र में शादी

महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। उनका पूरा नम मोहनदास करमचंद गांधी था। शुरुआती जीवन में 13 साल की छोटी उम्र में उनकी शादी कस्तूरबा से हुई। इतनी कम उम्र की जिम्मेदारियों के बावजूद गांधी जी ने लंदन से पढ़ाई की और भारत के स्वतंत्रता संग्राम की अगुवाई की।

अहिंसा के सिद्धांत पर जीवन

लंदन और बाद में दक्षिण अफ्रीका में गांधी जी ने अपने अनुभवों का इस्तेमाल भारतीय स्वाधीनता संग्राम में किया। वह अहिंसा में विश्वास रखते थे, उन्होंने शाकाहार को अपनाया और भगवदगीता को जीवन में अपनाया।

दक्षिण अफ्रीका में नस्लभेद के चलते उन्हें ट्रेन से उतार दिया गया, जिसका उन्होंने डटकर सामना किया और इसके खिलाफ आंदोलन चलाया। 1915 में भारत लौटने पर गांधी जी ने गोपाल कृष्ण गोखले के मार्गदर्शन में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल होकर एक नया अध्याय शुरू किया।

चंपारण और खेड़ा आंदोलनों में उनके नेतृत्व ने भारत में उनको पहली बड़ी सफलता मिली। दुख की बात है कि गांधीजी का जीवन 30 जनवरी 1948 को 78 वर्ष की आयु में नाथूराम गोडसे ने गांधी जी की गोली मारकर हत्या कर दी।

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