पश्चिम बंगाल: अस्पताल ने COVID-19 मरीज का किया अंतिम संस्कार, परिवार को 4 दिन बाद मिली खबर

कोलकाता। पश्चिम बंगाल से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, यहां के एक सरकारी अस्पताल ने कोरोना वायरस से संक्रमित मरीज का अंतिम संस्कार परिवार को बिना बताए कर दिया। जब परिवार वालों ने मरीज की स्थिति का जायजा लेने के लिए अस्पताल से संपर्क किया तब उन्हें इस बात की जानकारी मिली। इस मामले ने एक बार फिर राज्य में कोरोना वायरस पर ममता सरकार की गंभीरता की पोल खोल दी है। बता दें कि यह कोई पहला मामला नहीं है इससे पहले भी एक बुजुर्ग महिला का अंतिस संस्कार परिवार को बिना बताए कर दिया गया था।

अस्पताल ने बिना बताए किया अंतिम संस्कार

अस्पताल ने बिना बताए किया अंतिम संस्कार

COVID-19 संक्रमित 70 वर्षीय हरिनाथ सेन के परिवार ने जब 5 मई को बंगाल में कोरोना वायरस समर्पित एमआर बांगुर अस्पताल में उनकी जानकारी मांगी तो पहले उन्होंने बताने से इनकार कर दिया। अस्पताल के कर्मचारियों ने दावा किया कि कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसके बाद परिजनों ने फिर से 6 मई को फोन किया जिसमें एक कर्मचारी ने बताया कि चार दिन पहले यानी 2 मई को ही हरिनाथ सेन की मौत हो गई थी। इतना ही नहीं उनका अंतिम संस्कार भी किया जा चुका है।

अस्पताल ने नहीं दी अंतिम संस्कार की जानकारी

अस्पताल ने नहीं दी अंतिम संस्कार की जानकारी

पिता के अंतिम संस्कार की बात सुन उनके बेटे अरिजित सेन के पैरों तले जमीन खिसक गई। परिवार वालों का कहना है कि हमें यकीन नहीं हो रहा है कि अस्पताल ने ना ही उनके मौत की खबर दी और ना अंतिम संस्कार की जानकारी देना जरूरी समझा। इंडिया टुडे से बात करते हुए अरिजित ने बताया कि हमें केवल 1 मई को अस्पतालसे यह फोन आया था कि मेरे पिता की हालत बिगड़ गई है। अगले दिन न तो उन्होंने हमें उनकी मृत्यु के बारे में सूचित किया और न ही उनके दाह-संस्कार की खबर साझा की।

परिवाल वाले भी हैं क्वारनटीन

परिवाल वाले भी हैं क्वारनटीन

हरिनाथ सेन के कोरोना पॉजिटिव मिलने के बाद उनके परिजनों को भी क्वारनटीन कर दिया गया था। सेन की बीमार पत्नी, दो बेटे, दो पुत्रवधू को बंगाल सरकार के क्वारनटीन सेंटर में आइसोलेशन पर रखा गया था। अरिजित ने बताया कि उन्होंने स्वास्थ्य विभाग में भी फोनकर अपने पिता की जानकारी मांगी थी लेकिन उन्हें भी इस मामले के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। बेटे अरिजित के मुताबिक ब्रेन स्ट्रोक के कारण उनके पिता के शरीर के दाहिने हिस्से में लकवा मार गया था।

29 अप्रैल को किया गया था कोरोना टेस्ट

29 अप्रैल को किया गया था कोरोना टेस्ट

70 वर्षीय हरिनाथ सेन के परिवार वालों ने 29 अप्रैल को एनआरएस मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया जहां उनका कोरोना वायरस टेस्ट किया गया। उसके बाद उन्हें राज्य के पहले कोविद अस्पताल एमआर बांगुर में स्थानांतरित कर दिया गया। अरिजीत कहते हैं कि, जब हमने वार्ड मास्टर को फिर से सूचना देने के लिए फोन किया, तो एक महिला ने फोन उठाया और बड़ी बेरहमी से हमें बताया कि शव को कोलकाता निगम ले गए थे। अरिजीत ने महिला के साथ हुई बातचीत को रिकॉर्ड कर लिया था।

पिता का मृत्यु प्रमाण पत्र भी नहीं मिला

पिता का मृत्यु प्रमाण पत्र भी नहीं मिला

रिकॉर्डिंग में एक महिला ये कहते हुए सुनाई देती है, आपको मेरा नाम जानने की जरूरत नहीं है। सुबह 10 बजे से रात 8 बजे के बीच यहां केवल एक महिला स्टाफ की ड्यूटी होती है यह सभी को पता है। महिला आगे कहती है कि पहले अपना नाम बताओ नहीं तो मैं कोई और जानकारी साझा नहीं करूंगी। अरिजीत ने बताया कि उनको पिता का मृत्यु प्रमाण पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। साथ ही एमआर बांगुर अस्पताल में पिता के रहने से संबंधित कोई मेडिकल दस्तावेज भी साझा नहीं किया गया है।

अस्पताल ने आरोपों को किया खारिज

अस्पताल ने आरोपों को किया खारिज

अरिजीत ने कहा, हमें सर्टिफिकेट इकट्ठा करने के लिए टॉप्सिया में कोविद श्मशान से संपर्क करने के लिए कहा गया है। उधर, एमआर बांगुर अस्पताल प्रबंधन अरिजीत के सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। अस्पताल सुपरिटेंडेंट डॉ शिशिर नसकर ने कहा कि हमने परिवार की ओर से दिए गए नंबर पर संपर्क करने का प्रयास किया था, फिलहाल मैं आरोपों पर टिप्पणी नहीं कर सकता। स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर के तहत हमारे असिस्टेंट सुपरिटेंडेंट मरीज की मौत पर परिवार को फोन करते हैं।

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