कैंपा कोला: इतिहास के फ्रीज़र से दशकों बाद वापसी, जानिए पुरानी कहानी

राजधानी Delhi के कनॉट प्लेस के शंकर मार्केट से जब आप फायर ब्रिगेड लेन की तरफ़ कदम बढ़ाएँगे तो सड़क के बाईं तरफ़ एक ख़स्ताहाल इमारत आपको चौंकाएगी, इसकी दीवारों पर कैंपा कोला लिखा है.

कैंपा कोला
CAMPA COLA
कैंपा कोला

राजधानी दिल्ली के कनॉट प्लेस के शंकर मार्केट से जब आप फायर ब्रिगेड लेन की तरफ़ कदम बढ़ाएँगे तो सड़क के बाईं तरफ़ एक ख़स्ताहाल इमारत आपको चौंकाएगी, इसकी दीवारों पर कैंपा कोला लिखा है.

अब रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने देश के सॉफ्ट ड्रिंक बाजार में ज़ोर-आज़माइश करने के लिए क़मर कस ली है लेकिन वहाँ सन्नाटा छाया हुआ है.

एक ज़माना था जब यहाँ हर समय कैंपा कोला की बोतलों को सप्लाई करने वाली दर्ज़नों गाड़ियाँ खड़ी रहा करती थीं, इस बिल्डिंग के मेन गेट के बाहर लक्ज़री कारों की लाइन लगी रहती थी जिन्हें उनके ड्राइवर साफ़ कर रहे होते थे.

बहरहाल, मुकेश अंबानी अपनी कंपनी रिलायंस रिटेल के ज़रिए सॉफ्ट ड्रिंक मार्केट में उतर रहे हैं, कुछ समय पहले रिलायंस रिटेल के 1970 और 1980 के दशक के सबसे चर्च‍ित सॉफ्ट ड्रिंक ब्रैंड कैंपा कोला के टेकओवर करने की ख़बर आने के बाद लग रहा था कनॉट प्लेस में कैंपा कोला फैक्ट्री में फ़िर से हलचल शुरू हो जाएगी.

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इस पुरानी फ़ैक्ट्री में एक जमाने में पहले कोका कोला और फिर कैंपा कोला का उत्पादन होता था, उत्पादन की प्रकिया को फैक्ट्री के बाहर से भी देखा जा सकता था क्योंकि फैक्ट्री में लगे शीशों के पीछे बोतलों में सॉफ्ट ड्रिंक मशीन के ज़रिए एक कन्वेयर बेल्ट पर भरी जाती थीं.

राजधानी के चार्टर्ड एकाउंटेंट राजन धवन याद करते हैं, "जब मैं दिल्ली पब्लिक स्कूल, मथुरा रोड में पढ़ता था तब इस कोका कोला की फैक्ट्री हम स्कूल की तरफ से कई बार घूमने आए थे, यहाँ पर मैनेजमेंट की तरफ से स्कूल के बच्चों को गिफ़्ट वगैरह मिलते थे, फिर सीए बनने के बाद जब 1980 के दशक के अंतिम सालों में इधर आना हुआ तो ये बंद होने लगी थी, देखते-देखते एक शानदार फैक्ट्री खत्म हो गई, कभी-कभी सोचता हूँ कि इधर काम करने वाले कहां गए होंगे."

अब गर्मियों के महीने चालू हो चुके हैं, जल्दी ही पारा चढ़ने लगेगा, बस तब ही रिलायंस का कैंपा लैमन तथा कैंपा ऑरेंज बाजार में पेप्सीको और कोका-कोला को टक्कर देने के लिए आ जाएगा. रिलायंस ने पिछले साल प्योर ड्रिक्स से कैंपा कोला ब्रांड को 22 करोड़ रुपये में ख़रीद लिया था.

इस बीच, रिलायंस की तरफ़ से कहा गया है कि उसके शीतल पेय सबसे पहले आंध्र प्रदेश तथा तेलंगाना में लांच होंगे, उसके बाद वे सारे देश में लांच होते रहेंगे, बेशक, रिलायंस का यह कहना सही है कि बुज़ुर्ग हो रहे हिन्दुस्तानियों को कैंपा कोला के स्वाद की यादें हैं. उन्होंने इसे अपने बचपन में खूब पिया है पर रिलायंस का फोकस तो सभी उम्र के कस्टमर हैं.

रिलायंस कंज़्यूमयर प्रोडक्ट्स इन सॉफ्ट ड्रिंक्स को लांच कर रही है, अभी तक साफ़्ट ड्रिंक्स मार्केट में पेप्सी और कोक का तगड़ा कब्ज़ा है. कोका कोला का 51 फ़ीसद बाज़ार पर और पेप्सीको का 34 फ़ीसद बाज़ार पर कब्ज़ा है.

अब आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि बाज़ार का रुख़ किस तरफ़ है, इनके अलावा बहुत से लोकल शीतल पेय उत्पाद भी बाज़ार में मौजूद हैं. सॉफ़्ट ड्रिंक के खेल में विज्ञापन बहुत अहमियत रखता है.

पेप्सीको और कोका कोला का हर साल विज्ञापनों पर सैकड़ों करोड़ का बजट होता है. ज़ाहिर है, रिलायंस को अगर सॉफ़्ट ड्रिंक्स बाज़ार में अपने लिए जगह बनानी है तो उसे काफ़ी विज्ञापन करना होगा.

जिन दिनों कैंपा कोला के जलवे थे तब इसका ब्रांड एम्बेसेडर सलमान खान हुआ करते थे, अब ये देखने वाली बात है कि रिलायंस किस सेलिब्रेटी को कैंपा कोला का ब्रांड एंबेसेडर बनाता है.

आईपी यूनिवर्सिटी में बिजनेस एंड मार्केटिंग के प्रोफ़ेसर डॉ. सुधीर बिष्ट कहते हैं, "मैं मानता हूँ कि रिलायंस में यह क्षमता है कि वो पेप्सीको तथा कोका कोला को चुनौती दे सके, पर बिना ज़ोरदार विज्ञापन किए बात नहीं बनेगी, विज्ञापन का तो हल्ला बोलना होगा नए ब्रांड को लांच करने के लिए."

वे यह भी कहते हैं कि चूंकि भारत का सॉफ़्ट ड्रिंक्स बाज़ार सालाना हज़ारों करोड़ रुपये का है, तो रिलायंस अपने नए उत्पादों को बाज़ार में स्थापित करने के लिए कोई कसर तो नहीं छोड़ेगी.

रिलायंस को उम्मीद है कि कैंपा कोला की बाज़ार में नए रूप में वापसी का उपभोक्ता स्वागत करेंगे, वे इसे हाथों-हाथ लेंगे, रिलायंस ने अपने नए लांच होने जा रहे उत्पादों का स्लोगन रखा है, "द ग्रेट इंडियन टेस्ट".

राजधानी के मशहूर वाटर पार्क फन एंड फूड विलेज के चेयरमेन संतोख चावला कहते हैं, "मुझे जो जानकारी मिल रही है, उस हिसाब से तो रिलायंस के कैंपा के दाम भी कोई ज़्यादा नहीं हैं. मुझे लगता है कि कीमत की वजह से भी उसे बाज़ार में जगह बनाने का मौका मिलेगा."

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दिल्ली चुनाव और ली मैरेडियन से रिश्ता

कैंपा कोला की बाज़ार में दोबारा लांचिंग पर बात करते हुए संतोख चावला कुछ भावुक से हो गए.

वे कहने लगे कि उनके परिवार के सरदार मोहन सिंह और उनके पुत्र चरणजीत सिंह से पारिवारिक संबंध थे. ये सरदार मोहन सिंह वही हैं जिनके नाम पर दिल्ली की एक मशहूर इमारत है जो जींस के बाज़ार के तौर पर जानी जाती है--मोहन सिंह प्लेस.

सरदार मोहन सिंह की मृत्यु के बाद चरणजीत सिंह ने कैंपा कोला और अपने दूसरे कारोबार को बुलंदियों पर पहुँचाया था, चरणजीत सिंह के पिता सरदार मोहन सिंह भारत में कोका कोला के बिज़नेस को शुरू करने वालों में से एक थे.

वे नई दिल्ली नगर परिषद (एनडीएमसी) के नामित उपाध्यक्ष भी रहे, उन्होंने जनपथ में तिब्बत मार्केट तथा डिफेंस क़ॉलोनी स्थापित करने में भी अहम रोल निभाया था.

चरणजीत सिंह को कांग्रेस ने 1980 के लोकसभा चुनाव में साउथ दिल्ली सीट से टिकट दिया, उनके सामने जनता पार्टी के नेता विजय कुमार मल्होत्रा थे, चरणजीत सिंह अपनी कैंपेन में पैसा खूब बहा रहे थे.

उस दौर में चुनाव आयोग का चाबुक नहीं चलता था, तब चुनावों में उम्मीदवारों के खर्च पर आज के समय की तरह नज़र नहीं रखी जाती थी.

उनके लिए शंकर मार्केट के दुकानदार भी कैंपेन कर रहे थे, चुनाव में चरणजीत सिंह ने विजय कुमार मल्होत्रा को शिकस्त दी तो इस तरह दिल्ली ने पहली बार लोकसभा में किसी सिख सांसद को भेजा.

उन्होंने विजय कुमार मल्होत्रा को लगभग एक लाख मतों से शिकस्त दी, महत्वपूर्ण ये भी है कि उस लोकसभा चुनाव में सिर्फ़ नई दिल्ली सीट से अटल बिहारी वाजपेयी विजयी हुए थे, बाकी छह सीटों पर कांग्रेस को ही विजय मिली थी, चरणजीत सिंह एक कीर्तिमान बना गए थे.

उनसे पहले या बाद में कभी दिल्ली से कोई सिख लोकसभा नहीं पहुँचा. उन्हीं चरणजीत सिंह ने 1982 के एशियाई खेलों के समय होटल ली-मेरिडियन खोला, इसे राजधानी के सबसे लक्ज़री होटलों में से एक माना जाता है.

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कोका कोला बंद, एंट्री डबल सेवन की

कैंपा कोला को प्योर ड्रिंक्स ग्रुप ने देश में 1975 में इमरजेंसी लगने के बाद लांच किया था.

दरअसल, इमरजेंसी के बाद जब लोकसभा के चुनाव हुए तो जनता पार्टी जीती, उसमें उद्योग मंत्री जॉर्ज फर्नांडीज बने. उन्होंने कोका कोला का भारत में उत्पादन बंद करवा दिया था.

सरदार मोहन सिंह की कंपनी प्योर ड्रिंक्स तो कोका कोला का उत्पादन करके मोटी कमाई कर रही थी, तब तक पेप्सी की भारत में एंट्री नहीं हुई थी.

जनता पार्टी सरकार के फ़ैसले के बाद प्योर ड्रिंक्स ने तुरंत कैंपा कोला लाँच कर दिया, कोका कोला को देश से बाहर का रास्ता दिखाने के बाद सरकार ने डबल सेवन शीतल पेय लांच किया, उसका नाम डबल सेवन इसलिए रखा गया था क्योंकि 1977 के चुनाव में ही जीतकर कांग्रेस विरोधी सरकार आई थी.

डबल सेवन का फ़ार्मूला सेंट्रल फूड टेक्नालीज रिसर्च इंस्टीच्यूट, मैसूर ने विकसित किया था, हालांकि उसे ग्राहकों का ख़ास प्यार नहीं मिला.

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इस बीच, आर्थिक उदारीकरण के बाद कोका कोला की भारत में 1991 के बाद फिर से वापसी हो गई. यह याद रखा जाए कि प्योर ड्रिंक्स ही कोका कोला को 1949 में भारत में लाई थी, उन्हें अमेरिकी कंपनी ने भारत में कोका कोला के उत्पादन तथा बेचने का लाइसेंस दिया था.

ज़ाहिर है, कोका कोला के उत्पादन बंद होने के बाद प्योर ड्रिंक्स ने कैंपा कोला को लांच किया और क़रीब एक-डेढ़ दशक तक बाज़ार में अपना कब्ज़ा बनाए रखा, पर पेप्सी के भारत के बाज़ार में आने के बाद प्योर ड्रिंक्स ने घुटने टेक दिए, तब तक चरणजीत सिंह का भी निधन हो गया, कंपनी ने अपने आपको होटल ली मेरिडियन के बिजनेस तक सीमित कर लिया था.

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