महोबा में एम्स की मांग को लेकर रमज़ान में रोज़ा रखेंगे हिंदू

नयी दिल्ली (ब्यूरो)। महोबा में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए उठी एम्स (AIIMS) की मांग अब अपने लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ता दिख रहा है। सभी धर्म एक जूट होकर इस सपने को साकार करने में जुट गये हैं। मुस्लिमों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को संस्कृत भाषा में 'मन की बात' लिखकर महोबा में एम्स जैसे संस्थान खोलने की मांग की है।

Hindus to fast in Ramzan pressing for demand of AIIMS like institute in Mahoba

अब इसके बाद जिले के हिंदुओं ने इस मांग को और आगे बढ़ाने के लिए रमजान के माह में रोजा रखने का निर्णय लिया है। समाजिक कार्यकर्ता तारा पाटकर का कहना है कि हम देश की नीति बनाने वालों का ध्यान अपनी समस्याओं की तरफ ले जाना चाहते हैं। तारा पाटकार का कहना है कि हमने जिले में स्वास्थ्य की समस्याओं को उजागर करने के लिए एक नया रास्ता अख्तियार किया है जिसे नकारा नहीं जा सकता।

महोबा के एक मदरसे के अध्यापक का कहना है कि उन्हें बेहतर इलाज के लिए या तो कानपुर जाना पड़ता है या फिर झांसी। उन्होंने कहा कि अगर बीमारी थोड़ी सी भी गंभीर है तो लखनऊ या फिर दिल्ली जाने के अलावा उनके पास कोई रास्ता नहीं बचता। महोबा में एम्स की स्थापना की मांग के समर्थन में बोलते हुए तारा पाटकर का कहना है जिला महोबा बुंदेलखंड के दिल की तरह है।

इसके बावजूद भी यहां बेहतर और जरूरी चिकित्सा सुविधाएं मौजूद नहीं हैं। तारा पाटकर का कहना है कि महोबा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में भर्ती किए जाने वाले गंभीर मरीजों को कानपुर, लखनऊ और आगरा के साथ-साथ पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश के अस्पतालों में भेजा जाता है।

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