बाप की चिता को छूने से बेटे ने किया इंकार, मुस्लिम महिला ने दी मुखाग्नि
नयी दिल्ली (ब्यूरो)। इंसान का धर्म बड़ा होता है उसका कर्म? इस बात को लेकर कई तरह की चर्चाएं होती हैं। हालांकि इस चर्चे में किसी भी पुख्ते निष्कर्ष पर पहुंचना कठिन है लेकिन कुछ घटनाएं ऐसी घटित होती है जिससे इस तरह के सवालों का जवाब मिल जाता है।

जी हां तेलंगाना में एक बेटे ने अपने बाप को मुखाग्नि देने से मना कर दिया तो मुस्लिम महिला ने उस हिंदू बुजुर्ग का अंतिम संस्कार किया। घटना वारंगल जिले की है। ओल्ड एज होम में रहने वाले 70 साल के कीर्ति श्रीनिवास की बुधवार को मौत हो गई। यहां केयरटेकर महिला ने उसके बेटे सारथ को इसकी जानकारी दी लेकिन उसने पिता का अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया।
उसके बेटे का कहना है कि उसने ईसाई धर्म अपना लिया है और हमारे धर्म में यह इजाजत नहीं है कि वह अपने पिता का अन्तिम संस्कार करे। यह सुनकर याकूब बी ने पूरे रीति रीवाज से बुजुर्ग का अन्तिम संस्कार किया। इस बुजुर्ग को उसके परिवार ने त्याग दिया था। याकूब बी अपने पति के साथ ओल्ड एज होम चलाती हैं। यहां कई सालों से टेलर की रूप में काम कर रहे के श्रीनिवास को उसके घरवालों ने त्याग दिया था, जिसकी वजह से वह वृद्धाश्रम में रहने लगे गए। मंगलवार की रात को उनका निधन हो गया। वे 70 वर्ष के थे।
श्रीनिवास को करीब दो साल पहले एक बस स्टॉप पर पाया गया था। उनके शरीर के एक हिस्से को लकवा लग चुका था। याकूब बी के पति लगातार यात्रा में रहते हैं, ऐसे में उसने खुद श्रीनिवास का अंतिम संस्कार करने का निर्णय लिया। याकूब बी के लिए श्रीनिवास पिता की तरह थे। इसके बाद याकूब बी ने श्रीनिवास के पुत्र का कर्तव्य निभाया और सभी धार्मिक परंपराओं को पूरा करते हुए इस बुजुर्ग की चिता को मुखाग्नि दी। पूरे राज्य में इस खबर की चर्चा है।












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