हिमाचल में बंदरों की समस्या जिताएगी चुनाव?

Posted By: BBC Hindi
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क्या बंदर किसी चुनाव का मुख्य मुद्दा हो सकते हैं? जी हां!

भारत के हिमाचल प्रदेश राज्य के शहरों और कस्बों में बंदरों की बढ़ती हुई संख्या इतनी बड़ी मुसीबत बन चुकी है कि ये राज्य के चुनाव का एक अहम मुद्दा है.

राज्य की सत्ताधारी पार्टी कांग्रेस और बीजेपी दोनों ने अपने चुनाव प्रचार में बंदरों की समस्या का हल तलाश करने का वादा किया है.

राज्य की राजधानी शिमला में बंदरों के झुंड हर जगह घूम रहे हैं और ये अकसर ख़तरनाक साबित हो जाते हैं. दस साल की नीलम शर्मा और उसके छोटे भाई रोहित के लिए घर से स्कूल जाना एक मुश्किल काम है.

नीलम कहती हैं, "रास्ते में अकसर बंदरों का झुंड होता है. वह हमें दौड़ाते हैं और कभी-कभी बैग छीन लेते हैं. हम किसी बड़े का इंतिज़ार करते हैं ताकि वहां से निकल सकें. वरना अकेले जाना ख़तरनाक होता है."

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अदरक तक खा जाते हैं बंदर

शहर में मकानों, बाज़ारों, सड़कों और पेड़ों पर हर जगह बंदर नज़र आते हैं और वहां के निवासी डर के साए में हैं.

संतराम शर्मा कहते हैं, "बंदरों ने मेरी बहू को इतनी ज़ोर से दौड़ाया कि वह गिर पड़ी और उसे काट लिया. मेरे पोते को बंदर ने दौड़ाया और पिंडलियों में काट लिया."

हिमाचल में बंदरों की संख्या इतनी बढ़ चुकी है कि वे शहरों से निकलकर हज़ारों गांवों में फैल गए हैं और फलों-फ़सलों को काफ़ी नुकसान पहुंचा रहे हैं. नमोल गांव के एक किसान प्यारे लाल ठाकुर ने बताया कि पिछले कुछ सालों में बंदरों की तादाद बहुत बढ़ गई है.

वह कहते हैं, "बंदर आम, अमरूद, अनार, बादाम खा जाते हैं. अब तो वे खेतों में माश की दाल तक नहीं छोड़ते. किसान बंदरों से बेहाल हैं."

दूसरे किसान भरत शर्मा ने कहा, "बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद जैसे उदाहरण अब बेकार हो चुके हैं क्योंकि बंदर अब अदरक भी खाने लगे हैं."

बंदरों की मुसीबत का अब राज्य की राजनीति और चुनावों पर भी गहरा असर पड़ रहा है.

बीजेपी नेता और चुनाव में उम्मीदवार डॉ. प्रमोद शर्मा कहते हैं, "किसानों को बंदरों की तबाही से बचाने के लिए बाड़बंदी और जाल का इंतज़ाम करना पड़ेगा वरना हिमाचल के किसान भी दूसरे राज्यों के किसानों की तरह आत्महत्या के लिए मजबूर होने लगेंगे."

राज्य सरकार ने बंदरों की आबादी पर काबू पाने की कोशिश की लेकिन वह कामयाब नहीं हो सकी.

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किराए पर लाठी

राज्य की सत्ताधारी पार्टी कांग्रेस के प्रवक्ता नरेश चौहान ने बीबीसी से बात करते हुए कहा कि बंदरों की समस्या एक गंभीर मसला है.

उन्होंने कहा, "हमने कुछ गांवों में बंदरों को मारने के लिए केंद्र सरकार से इजाज़त ली थी लेकिन लोगों की धार्मिक भावनाएं आड़े आने के कारण इन्हें मारने का काम आगे न बढ़ सका."

जीवित प्राणियों को न मारने की सरकारी नीति से बंदरों की तादाद बढ़ती जा रही है. बंदरों से बचने के लिए कई पर्यटन स्थलों पर किराए पर लाठी लेने की व्यवस्था है.

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, बंदर हर साल डेढ़ सौ करोड़ से अधिक की फ़सल और फल तबाह कर रहे हैं.

कांग्रेस और बीजेपी चुनाव जीतने पर हिमाचल प्रदेश में बंदरों की समस्या समाप्त करने का वादा कर रही है लेकिन इस समस्या का हल क्या होगा इसका कोई ठोस उपाय उनके पास नहीं है.

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English summary
Himachal Election 2017 : How monkey has become the reason of talk
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