राष्ट्रपति चुनाव में EVM के बजाय बैलेट बॉक्स से क्यों होती है वोटिंग? जानिए वजह
नई दिल्ली, 18 जुलाई। आज देश के नए राष्ट्रपति का चुनाव हो रहा है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि एक तरफ जहां अब चुनाव ईवीएम मशीन के जरिए हो रहे हैं तो राष्ट्रपति चुनाव बैलेट बॉक्स के जरिए क्यों होता है। देश में 2004 से चार लोकसभा चुनाव, 127 विधानसभा चुनाव ईवीएम के जरिए हो चुके हैं। लेकिन राष्ट्रपति चुनाव अभी भी बैलेट बॉक्स के जरिए होते हैं। ना सिर्फ राष्ट्रपति चुनाव बल्कि उपराष्ट्रपति का चुनाव, राज्यसभा के सदस्यों और विधान परिषद के सदस्यों का चुनाव ईवीएम के जरिए नहीं होता है।

दरअसल ईवीएम इस तरह की तकनीक है जहां पर मतदाता सीधे अपने पसंदीदा उम्मीदवार अपने उम्मीदवार का चयन करते हैं, ईवीएम वोट के समूहक यानि एग्रेगेटर के तौर पर काम करती है। ईवीएम के जरिए चुनाव के दौरान मतदाता बटन को दबाकर अपने उम्मीदवार का चयन करते हैं, ऐसे में जो दल सर्वाधिक वोट पाता है उसे विजेता घोषित किया जाता है।
दरअसल राष्ट्रपति का चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधि प्रणाली के आधार पर एकल संक्रमणीय मत के जरिए होता है। ऐसे में इस प्रणाली के अनुसार एकल संक्रमणीय मत के जरिए हर निर्वाचक उन्हीं उम्मीदवारों की वरीयता पर अपना वोट दे सकता है जितने उम्मीदवार लड़ रहे हैं। यही वजह है कि ईवीएम मशीन के जरिए राष्ट्रपति का चुनाव नहीं होता है। ईवीएम मशीन को इस प्रणाली के लिए नहीं तैयार किया गया है।
अधिकारियों ने बताया कि ईवीएम एकल संक्रमणीय मत के लिए तैयार नहीं किया गया है। इसी वजह से इसका इस्तेमाल राष्ट्रपति चुनाव में नहीं किया जाता है। निर्वाचन आयोग की त्रैमासिक पत्रिका माई वोट मैटर्स के अगस्त 2021 के अंक के अनुसार अभी तक देश में चार लोकसभा चुनाव ईवीएम के जरिए हो चुके हैं, जबकि 127 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं। चुनाव आयोग के अनुसार 1977 में पहली बार इलेक्ट्रॉनिक वोट की कल्पना की गई थी, जिसके बाद हैदराबाद स्थित इल्केट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई और ईवीएम की डिजाइन को तैयार करने के लिए कहा गया।












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