जानिए इंटरनेशनल मीडिया ने क्या लिखा अटल के निधन पर
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नई दिल्ली। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन के बाद दुनियाभार के मीडिया ने उनकी विदाई की खबर अपने अंदाज में लिखी। एक तरफ जहां आज उनकी अंतिम यात्रा की तैयारी चल रही है तो दूसरी तरफ विदेशी मीडिया ने काफी बड़े स्तर पर अटल बिहारी वाजपेयी के निधन को रिपोर्ट किया। न्यूयॉर्क पोस्ट से लेकर वाशिंगटन पोस्ट, सीएनएन ने अटल बिहारी वाजपेयी के निधन की खबर को रिपोर्ट किया और बतौर भारत के प्रधानमंत्री के उनके कार्यकाल को याद किया।

न्यूयॉर्क टाइम्स
भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का 93 वर्ष की आयु में निधन हो गया। भारत के प्रधानमंत्री के निधन के बाद न्यूयॉर्क टाइम्स ने उन्हें दृढ़ संकल्प वाला नेता बताते हुए कहा लिखा कि 1998 से 2004 के दौरान बतौर पीएम अटल बिहारी ने दुनिया को परमाणु टेस्ट करके चौंका दिया था। उन्होंने एक दशक के समझौते को खत्म करके जिस तरह से परमाणु परीक्षण किया उससे दुनिया चौंक गई थी। शुरुआत के 50 वर्षों तक दुनिया के लिए अटल बिहारी वाजपेयी लुप्त थे, लेकिन 70 की आयु में छह वर्ष तक दुनिया ने उन्हें सबसे बड़े लोकतंत्र् के लोकप्रिय नेता के रूप में देखा।

वाशिंगटन पोस्ट
कुछ इसी तरह से वाशिंगटन पोस्ट ने भी अटल बिहारी वाजपेये के निधन पर उन्हें याद करते हुए लिखा कि भारत के प्रधानमंत्री अटल बिहारी जिनका 93 वर्ष की आयु में निधन हो गया, उन्होंने भारत को परमाणु शक्ति बनाया था। साथ ही यह भी लिखा कि आखिर कैसे परमाणु परीक्षण ने भारत और अमेरिका के बीच संबंधों में कड़वाहट लाई थी। भारत ने पहली बार 1974 में परमाणु परीक्षण किया था और कहा था कि वह शांति के लिए यह परीक्षण कर रहा है। लेकिन नए परीक्षण ने भारत को परमाणु राष्ट्र बना दिया। जिसके बाद राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने दक्षिण एशिया की शांति भंग करने का आरोप लगाते हुए कई पाबंदी लगाई थी और परमाणु कार्यक्रम बंद करने को कहा था। लेकिन बंद दरवाजे के पीछे से अटल बिहारी वाजपेयी ने मंझे हुए कूटनीतिज्ञ की तरह दोनों देशों के बीच के रिश्ते को सुधारने का काम किया और बिल क्लिंटन 2000 में भारत के दौरे पर आए, वह पिछले दो दशक में भारत का दौरा करने वाले पहले अमेरिकी राष्ट्रपति थे।

सीएनएन
वाजपेयी इस बात से अवगत थे कि परमाणु परीक्षण के बाद उनपर कई आर्थिक पाबंदियां लग सकती हैं। सीएनएन ने अटलजी के निधन को रिपोर्ट करते हुए कहा कि वह ऐसे नेता थे जो दबाव में कभी झुके नहीं। तमाम आलोचनाओं का सामना करते हुए वह उन्होने परीक्षण के बाद संसद में कहा था कि हमने अंतर्राष्ट्रीय दबाव में आकर कोई फैसला नहीं लिया है और ना ही भविष्य में कभी लेंगे। लेख में लिखा गया है कि कैसे अटल बिहारी ने भाजपा को पुनर्जीवित किया और 1980 के बाद इसे लगातार मजबूत करते रहे। उनके राजनीतिक कैरियर में भाजपा का लगातार उद्भव होता रहा।
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