कांग्रेस के जाल में घिरती भाजपा, मुश्किल होती 2019 की राह!

नई दिल्ली। 2012 के बाद कांग्रेस को एक के बाद एक कई विधानसभा चुनावों में हार का सामना करना पड़ा। देश की राजनीति में नरेंद्र मोदी के अभ्युदय के बाद कांग्रेस के लिए लगातार चुनाव में मुश्किलें बड़ी होती गई। लोकसभा चुनाव में हार के बाद कांग्रेस की हार का सिलसिला बदस्तूर एक के बाद एक राज्य में जारी रहा। हालांकि कुछ हद तक बिहार चुनाव में पार्टी ने नीतीश लालू के साथ गठबंधन करके खुद को बेहतर स्थित में पहुंचाया और यह पहला बड़ा हिंदी भाषी राज्य बना जहां भाजपा को सत्ता से बाहर करने में कांग्रेस सफल हुई, लेकिन यहां पार्टी को उस वक्त झटका लगा जब नीतीश ने महागठबंधन ने नाता तोड़ भाजपा के साथ मिलकर सरकार बना ली। लेकिन इसके बाद से अब हालात काफी बदल गए हैं और कर्नाटक-गुजरात में कांग्रेस के बेहतर प्रदर्शन ने राहुल गांधी के भीतर नई ऊर्जा का संचार किया है।

बेदाग छवि पर हमला

बेदाग छवि पर हमला

जिस तरह से पार्टी ने कर्नाटक में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए भाजपा की उम्मीदों पर पानी फेरा उसने राहुल गांधी को एक बेहतर नेता के तौर पर स्थापित किया। भाजपा के दांव को फेल करते हुए कर्नाटक में कांग्रेस रणनीति बनाने में बेहतर साबित हुई और जेडीएस के साथ मिलकर सरकार बनाने में सफलता हासिल की। राहुल गांधी के सामने सबसे बड़ी चुनौती नरेंद्र मोदी की उस लोकप्रिय छवि को तोड़ना था जिसके दम पर भाजपा लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रही थी। सिलसिलेवार हमलों के दम पर राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बेदाग छवि के मिथक को तोड़ा।

लोगों की अवधारणा बदलने की कोशिश

लोगों की अवधारणा बदलने की कोशिश

राहुल गांधी ने 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सूट-बूट की सरकार का आरोप लगाते हुए उन्हें गरीब विरोधी साबित करने की कोशिश की, यहां तक उन्होंने पीएम मोदी की छवि को किसान विरोधी साबित करने का जबरदस्त तानाबाना बुना। राहुल गांधी के सिलसिलेवार हमलों की वजह से मोदी सरकार को अपनी कई नीतियों में बदलाव करना पड़ा। 2014 के बाद मौजूदा राजनीकि माहौल पर नजर डालें तो राहुल गांधी के पास इस बार कई ऐसे हथियार हैं जिसके दम पर वह मोदी सरकार को घेर सकते हैं।

कांग्रेस के हथियार

कांग्रेस के हथियार

राहुल गांधी के पास इस बार कई ऐसे मुद्दे हैं जिसके दम पर वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा सरकार को जमकर घेर सकते हैं और वह लगातार हर रैलियों में इन मुद्दों को आगे बढ़ा रहे हैं और मोदी सरकार को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं। राफेल डील, नीरव मोदी, मेहुल चोकसी, विजय माल्या, जीएसटी ,नोटबंदी, बेरोजगारी, किसानों की समस्या, गोरक्षा के नाम पर लोगों के साथ मारपीट, दलितों पर अत्याचार ऐसे मुद्दे हैं जिसकी वजह से मोदी सरकार लगातार निशाने पर है। जिस तरह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही अपने तमाम चुनावी वायदों को एक के बाद एक चुनाव में भुना चुके हैं उसके बाद उनके लिए पांच राज्यों में होने वाले चुनाव आसान नहीं होगा।

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