जानिये आखिर क्यों जानबूझकर लंबा खींचा गया था पठानकोट ऑपरेशन
नई दिल्ली। पठानकोट में एयरफोर्स के बेस स्टेशन पर आतंकी हमले के ऑपरेशन के काफी लंबा चलने पर कई सवाल उठ रहे हैं। यह ऑपरेशन 60 घंटे से अधिक समय तक चला जिसे लेकर सुरक्षा एजेंसियां सवालों के घेरे में है।
पठानकोट में छह आतंकियों ने तीन दिन से भी अधिक समय के लिए 500 से अधिक सेना के जवानों को ऑपरेशन में उलझाये रखा, जिसे लेकर कई सवाल पूछे जा रहे हैं। सेवानिवृत्त एयर मार्शन बीके पांडे ने पठानकोट एयरफोर्स स्टेशन से बखूबी वाकिफ हैं, उनका कहना है कि इस ऑपरेशन में जल्दीबाजी करने की कोई भी जरूरत नहीं थी।
एयर मार्शल ने कहा कि इस तरह के ऑपरेशन में जल्दबाजी करने का कोई मतलब नहीं है। उन्होंने कहा कि जब आपको इस बात की जानकारी हो कि आतंकी टेक्निकल एरिया में नहीं पहुंचे हैं। एयर मार्शल ने वनइंडिया से बातचीत के दौरान उन सभी सवालों के जवाब दिये जिसे लेकर सेना के जवानों पर ऑपरेशन को लंबा खींचने पर सवाल उठ रहे हैं।

क्या आपको लगता है कि ऑपरेशन बहुत लंबा चला?
इस तरह के ऑपरेशन में कतई जल्दबाजी नहीं करना चाहिए। सुरक्षा एजेंसियों ने इस बात की पुष्टि कर ली थी कि आतंकी टेक्निलकल एरिया में नहीं पहुंच पाये थे और सारे उपकरण सुरक्षित थे। एसे में अगर जल्दबाजी की जाती तो और नुकसान हो सकता था। ऐेसे ऑपरेशन को लंबा इसलिए खींचा जाता है जिससे कि आतंकियों के हथियार खत्म हो जाये और उनके पास खाने और पानी की कमी हो जाए। एक बार उनके पास जब पानी खत्म हो जाएगा तो ऑपरेशन लंबा नहीं चलता, ऐसे में सुरक्षाकर्मी इस बात का इंतजार करते हैं कि कब आतंकी थके।

आपके हिसाब से एयरफोर्स स्टेशन पर कितना नुकसान पहुंचा होगा?
मेरा यकीन मानिये एयरफोर्स स्टेशन पर किसी भी तरह का नुकसान नहीं हुआ होगा। आतंकियों को जंगली इलाके में मार गिराया गया है, जिसके चलते आतंकी किसी भी उपकरण को नुकसान नहीं पहुंचा सके हैं। आखिरी के दो आतंकी बिल्डिंग में पहुंच गये थे लेकिन वह बिल्डिंग पूरी तरह से खाली थी। लेकिन इन लोगों को भी जल्द ही वहां मार गिराया गया था।

क्या आपको लगता है कि इस ऑपरेशन के लिए एनएसजी की बजाए कश्मीर की स्पेशल फोर्स को भेजना चाहिए था?
कश्मीर में जवानों को विशेष ट्रेनिंग दी जाती है। हर जवान को कठिन से कठिन परिस्थिति से निपटने के ट्रेनिंग दी जाती है और ये जवान बेहतर सश्त्र से लैस होते हैं। ऐसे में इस तरह के ऑपरेशन में एनएसजी की बजाए कश्मीर की सेना को ही भेजा जाना चाहिए था।

पठानकोट एयरफोर्स स्टेशन पर सुरक्षा पर आप क्या कहेंगे?
आतंरिक सुरक्षा की दृष्टि से यहां काफी खामियां हैं। पठानकोट एयरफोर्स स्टेशन की सुरक्षा की जिम्मेदारी एयरफोर्स की होती है। इस स्टेशन की दीवारें 15 किलोमीटर लंबी है। ऐसे में इस पूरे इलाके को जवानों की मदद से सुरक्षित करना नामुमकिन है। ऐसे में तकनीक का सहारा लेकर ही इसकी देखरेख की जा सकती है।

आपको क्या लगता है कि आतंकी कितनी तैयारी के साथ आये थे?
इस हमले में आतंकियों ने पहले से ही इस इलाके के रेकी की थी जिसके चलते उन्होंने इतने समय तक लोहा लिया। इन लोगों को स्थानीय लोगों ने संभवत मदद की होगी कि किस जगह पर पानी आसानी से उपलब्ध हो सकता है। हालांकि ऐसा भी मुमकिन है कि आसानी से आतंकियों इस जगह को ढूंढ लिया हो।

रक्षामंत्री ने अपने बयान में कहा कि कुछ खामियां हुई हैं?
जी हां यह सही है कि कुछ गलतियां हुई हैं। आतंकी एयरबेस में घुसने में कामयाब हुए यह अपने आप में गंभीर मामला है। अब समय है कि इस बाबत जरूरी कदम उठाये जाये।

हमारा अगला कदम क्या होना चाहिए? भारत को पाकिस्तान से किस तरह से निपटना चाहिए?
सबसे पहले हमारी नीति इस बाबत काफी सख्त होनी चाहिए कि पाकिस्तान में जिस भी एजेंसी ने इस हमले को अंजाम दिया है उसे इसकी सजा दी जाए। आर्मी और एयरफोर्स को इसके लिए सक्षम बनाने की जरूरत है कि वह दुश्मनों को उड़ा सके, फिलहाल हमारे पास ऐसी तकनीक नहीं है। पाकिस्तान के बारे में हमें बहुत चिंता करने की जरूरत नहीं है क्योंकि पाकिस्तान युद्ध की घोषणा नहीं कर सकता है। पाकिस्तान के पास सीधा युद्ध करने की इस वक्त क्षमता नहीं है। लिहाजा पाक आतंकियों के जरिये ही कम खर्चे पर यह युद्ध जारी रखेगा।












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