जब आलोक वर्मा की हुई छुट्टी, ये बड़े मामले थे उनकी टेबल पर

नई दिल्ली। सीबीआई के डायरेक्टर आलोक वर्मा को बुधवार आधी रात को सरकार ने छुट्टी पर भेज दिया, जिसके बाद से लगातार विपक्ष इसको लेकर केंद्र सरकार को घेरने में लगा है। विपक्ष का आरोप है कि सीबीआई राफेल डील सहित तमाम अहम मामलों की जांच कर रही है, लिहाजा जानबूझकर सरकार ने उन्हें छुट्टी पर भेजा है, ताकि इन मामलों का सच सामने ना आ सके। जिस वक्त आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेजा गया उस वक्त उनकी टेबल पर राफेल डील, मेडिकल काउंसिल घूसखोरी मामला, कोयला आवंटन में आईएएस अधिकारी भाष्कर खुल्बे के खिलाफ मामला, स्टर्लिंग बायोटेक मामला और स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना के खिलाफ जांच जैसे अहम मामले थे।

राफेल डील की जांच

राफेल डील की जांच

आलोक वर्मा के कार्यकाल के दौरान जिन अहम मामलों की जांच चल रही थी उसमे फ्रांस से की गई राफेल डील सबसे उपर है। इस मामले में सत्यापन की प्रक्रिया चल रही थी। सूत्रों की मानें तो इस मामले में अहम फैसला लिया जाना था। 4 अक्टूबर को आलोक वर्मा को 132 पन्नों की शिकायत मिली थी, जिसे पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी, वकील प्रशांत भूषण ने सीबीआई को सौंपा था। ऐसे में इस शिकायत पर सीबीआई को आगे की पड़ताल करनी थी।

मेडिकल काउंसिल मामले की जांच

मेडिकल काउंसिल मामले की जांच

इसके अलावा सीबीआई मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के भीतर घुसखोरी मामले की जांच कर रही ती। जिसमे रिटायर्ड हाई कोर्ट के जज आईएम कुद्दुशी का भी नाम शामिल है। चार्जशीट में जज का नाम भी शामिल है। सूत्रों का कहना है कि चार्जशीट को तैयार कर लिया गया था जिसमे रिटायर्ड जज का भी नाम शामिल थता और इसमें अब सिर्फ आलोक वर्मा के हस्ताक्षर होना बाकी थी।

जज के खिलाफ जांच

जज के खिलाफ जांच

मेडिकल दाखिला मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज एसएन शुक्ला के खिलाफ भी मामले की जांच चल रही थी, जिसमे जस्टिस शुक्ला पर घूसखोरी का आरोप लगा था और उन्हें छुट्टी पर भेज दिया गया था। लेकिन जांच के लिए उन्हे अब पूरी तरह से स्वस्थ्य पाया गया था। सूत्रों का कहना है कि इस मामले की रिपोर्ट पूरी हो चुकी थी और इसपर आलोक वर्मा के हस्ताक्षर होना बाकी था।

कई और अहम मामलों की जांच

कई और अहम मामलों की जांच

इसके अलावा भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा वित्त सचिव हसमुख आढिया के खिलाफ दी गई शिकायत भी शामिल है। स्वामी ने सीबीआई को आढ़िया के खिलाफ शिकायती पत्र लिखा था, जिसकी सीबीआई जांच कर रही थी। कोयला खदान के आवंटन के मामले में पीएम के सचिव भाष्कर खुल्बे के खिलाफ भी सीबीआई जांच र रही थी। साथ ही संदेसरा और स्टर्लिंग बायोटेक मामले की भी सीबीआई जांच कर रही थी जोकि करीबन पूरी हो चुकी थी।

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