'ओमिक्रॉन आखिरी वायरस तो नहीं है, लेकिन...', कोरोना के हालात पर किरण मजूमदार ने कही ये राहतभरी बात
भारत में तेजी से बढ़ते कोरोना और ओमिक्रॉन के केसों के बीच बायोकॉन की अध्यक्ष किरण मजूमदार शॉ का एक बयान राहत लेकर आया है।
नई दिल्ली, 3 जनवरी। भारत में तेजी से बढ़ते कोरोना और ओमिक्रॉन के केसों के बीच बायोकॉन की अध्यक्ष किरण मजूमदार शॉ का एक बयान राहत लेकर आया है। शॉ ने कहा कि ओमिक्रॉन अंतिम वेरिएंट नहीं है, हमें ऐसे कई वायरस से लड़ने के लिए तैयार रहना होगा। उन्होंने आगे कहा कि डेल्टा वेरिएंट भी अब ज्यादा चिंता का विषय नहीं है क्योंकि हम जानते हैं कि उससे कैसे निपटना है।

तेजी से बढ़ रहे हैं मामले, लेकिन स्थिति संतोषजनक
शॉ ने आगे कहा कि भारत में कोरोना और ओमिक्रॉन वेरिएंट के मामले तो तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन संक्रमित लोगों के अस्पताल या आईसीयू में भर्ती होने की दर बेहद कम है, जो कि संतोषजनक है। एक मीडिया चैनल से बातचीत में कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन को लेकर बातचीत में शॉ ने कहा कि ओमाइक्रोन वेरिएंट तेजी से बढ़ रहा है लेकिन यह तेजी से घटता भी है, इस वेरिएंट से संक्रमित अस्पताल और आईसीयू में भर्ती लोगों की संख्या भी काफी कम है, जो कि एक संतोषजनक बात है।
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हम एन्डेमिक की ओर बढ़ रहे हैं
उन्होंने कहा कि ओमिक्रॉन अंतिम वायरस नहीं है, हमें अन्य वायरसों से निपटने के लिए तैयार रहने की जरूरत है। हमारा मानना है कि अस्पताल इसके लिए पूरी तरह तैयार हैं। हम एन्डेमिक (एक ऐसी परिस्थिति जहां बीमारी सिर्फ एक निश्चित क्षेत्र में रहती है) परिस्थिति की ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि डेल्टा वायरस भी अब कोई चिंता का विषय नहीं है, हमें पता है कि इससे कैसे निपटना है।
जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए प्राइवेट सेक्टर का करना होगा इस्तेमाल
बता दें कि किरण मजूमदार शॉ का यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत में कोरोनावायरस के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, और जब भारत सरकार ने इस पर चिंता व्यक्त करते हुए 15-17 साल की उम्र के लोगों के लिए टीकाकरण अभियान की शुरुआत की है। शॉ ने आगे कहा कि ऐसे में सबसे जरूरी ये है कि बच्चों का जल्द से जल्द टीकाकरण हो। ताकि इसके बच्चों पर प्रभाव सामने आने के बाद 15 साल से कम उम्र के बच्चों को भी टीकाकरण किया जा सके। उन्होंने नए वेरिएंट से लड़ने में प्रभावी नई वेक्सीनों के उत्पादन में प्राइवेट सेक्टर की अहम भूमिका पर भी प्रकाश डाला। शॉ ने कहा कि जैसे वैक्सीन के जल्द उत्पादन और टीकाकरण लिए प्राइवेट सेक्टर का सहारा लिया गया है, ऐसे ही जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए भी प्राइवेट सेक्टर का सहारा लिया जाना चाहिए। बता दें कि जीनोम सीक्वेंसिंग के बाद ही ओमिक्रॉन वेरिएंट का पता लगाया जा सकता है।












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