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क्या शाहीन बाग ने बदल दी है दिल्ली चुनाव की तस्वीर, किसको मिलेगा फायदा ?

नई दिल्ली- भारतीय जनता पार्टी को उम्मीद है कि वह शाहीन बाग के दम दिल्ली चुनाव का एजेंडा बदलने में कामयाब रही है। गृहमंत्री अमित शाह के शाहीन बाग जैसी हजारों घटनाओं को रोकने के आह्वान से लेकर, '.....गोली मारो....' के नारों तक नारेबाजी की बदलौत दिल्ली में पार्टी का आत्मविश्वास बढ़ा है। उसे लग रहा है कि आखिरकार वह राजधानी में हिंदू वोट को एकजुट करने में कामयाब हो रही। क्योंकि, पार्टी को लग रहा है कि चुनाव जहां से शुरू हुआ था, वह परिस्थितियां इस समय पूरी तरह से पलटती नजर आ रही है। इसलिए, पार्टी के हर बड़े नेता अब सिर्फ नागरिकता संशोधन कानून, शाहीन बाग और शरजील इमाम जैसे मुद्दों पर ही बात कर रहे हैं। यही वजह है कि अब तक शाहीन बाग पर चुप्पी साधे रखने की रणनीति पर चल रहे अरविंद केजरीवाल को भी इस मामले में चुप्पी तोड़नी पड़ गई है। हालांकि, इस सबका परिणाम क्या होगा और ये मुद्दे वोट में किस तरह से परिवर्तित होंगे, यह तो 11 फरवरी को ही पता चल सकेगा, लेकिन भाजपा नेता पूरी तरह से इस भरोसे में हैं कि वह जो चाहते थे, चुनाव उसी दिशा में बढ़ चला है।

शाहीन बाग विवाद से किसको फायदा?

शाहीन बाग विवाद से किसको फायदा?

दिल्ली विधानसभा चुनाव के मतदान का दिन करीब आ रहा है और भाजपा को पूरा यकीन है कि उसने जहां से लड़ाई की शुरुआत की थी, उससे वह कहीं आगे निकल चुकी है। पार्टी मान रही है कि वह इस चुनाव को भी अपने एजेंडे पर खींच लाने में सफल हो रही है। इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत करते हुए भाजपा महासचिव और दिल्ली में पार्टी के चुनाव समिति के सदस्य अनिल जैन ने इस बात के पूरे संकेत भी दिए हैं। उन्होंने कहा, 'यह स्वाभाविक है। जब दूसरे लोग मुस्लिम वोट को एकजुट करने की कोशिश करते हैं तो हिंदू हमारा साथ देंगे। इस कथा की शुरुआत बीजेपी नहीं करती। उन्होंने (भाजपा विरोधियों ने) इसे हिंदू-मुस्लिम वोट बना दिया है।' यही नहीं जैन कहते हैं, 'जब मनीष सिसोदिया ने (शाहीन बाग के) समर्थन की घोषणा की, वह मुस्लिम वोट एकजुट करना चाहते थे। जब अरविंद केजरीवाल ने कहा कि हम (बीजेपी) हिंदुओं को नागरिकता देकर पाकिस्तान का समर्थन कर रहे हैं तो वह आधी दिल्ली को पाकिस्तानी बता रहे थे। '

भाजपा जो चाहती थी वह मुद्दा मिल गया?

भाजपा जो चाहती थी वह मुद्दा मिल गया?

जैन भाजपा के अकेले नेता नहीं हैं। पिछले दो-तीन दिनों में बीजेपी के तमाम बड़े नेताओं ने नागरिकता संशोधन कानून से लेकर शाहीन बाग तक को अपने पक्ष में भुनाने की जबर्दस्त कोशिशें की हैं। पार्टी नेताओं ने मंच से खुलेआम अपनी पार्टी को देश जोड़ने वाली और बाकियों को देशद्रोहियों का साथ देने वाली पार्टी बताने की है। जाहिर है कि शरजील इमाम के मुद्दे ने पार्टी को एक और बड़ा हथियार थमा दिया है। केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने सोमवार को पार्टी मुख्यालय में आयोजित एक प्रेस कांफ्रेंस में शाहीन बाग में हो रहे प्रदर्शन के बारे में कहा है कि 'यह मुट्ठी भर लोगों की ओर से शांत बहुसंख्यकों को दबाने का बेहतरीन उदाहरण है........' उन्होंने कहा कि 'यह सीएए के विरोध की आड़ में टुकड़े-टुकड़े गैंग के लोगों को एक प्लेटफॉर्म मुहैया करा रहा है....' एक दिन पहले ही गृहमंत्री अमित शाह ने कहा था, 'बटन इतनी जोर से (कमल निशान पर) दबाओ कि शाहीन बाग में प्रदर्शन करने वालों को शाम तक वहां से हटना पड़ जाय....'

जमीनी स्तर तक 'एजेंडा' साधने की कोशिश

जमीनी स्तर तक 'एजेंडा' साधने की कोशिश

दिल्ली के भाजपा नेता दावा कर रहे हैं कि पार्टी की स्थिति दिनों-दिन बेहतर हो रही है, जो शुरू में आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल से पिछड़ती नजर आ रही थी। पार्टी नेताओं को लगता है कि ' (पार्टी लोगों को) यह समझाने में सफल रही है कि सीएए भारतीय मुसलमानों के लिए नहीं है और जो लोग भारत के धोखा करना चाहते हैं वही इसे मुद्दा बना रहे हैं। ' पार्टी यह संदेश वोटरों तक पहुंचाने के लिए हर तरह की कोशिशों में जुटी है। मसलन पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, 'कार्यकर्ताओं का कई ग्रुप दिल्ली आएगा और झुग्गियों या उन इलाकों में जाएगा जहां बिहार और यूपी के लोग रहते हैं।' यही नहीं पार्टी नेताओं को आम आदमी पार्टी और कांग्रेस की कथित नीतियों का 'पर्दाफाश' करने का भी जिम्मा सौंपा गया है। सूत्रों के मुताबिक इन नेताओं को कुछ खास बातें बताई गई हैं और वे उसी आधार पर वोटरों तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश करेंगे। मसलन, 'मोदीजी ने बालाकोट एयरस्ट्राइक संभव कर दिखाया, लेकिन इस पर सवाल किसने उठाया? क्या केजरीवाल ने सबूत नहीं मांगे? और राम मंदिर का विरोध किसने किया? कांग्रेस के कपिल सिब्बल ने इसे कोर्ट में लटकाने की कोशिश की। लेकिन, बीजेपी की सरकार अयोध्या में राम मंदिर बनवा रही है।'

विकास बनाम शाहीन बाग

विकास बनाम शाहीन बाग

पार्टी इस भरोसे है कि बदली रणनीति से उसे फायदा मिलेगा। एक नेता के मुताबिक, 'अगर आम आदमी पार्टी और कांग्रेस 95 फीसदी मुसलमानों को लुभा सकते हैं तो भाजपा 95फीसदी हिंदुओं से वोट क्यों नहीं मांग सकती?' इसके साथ ही पार्टी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शख्सियत और उसमें उनके विकास के एजेंडे का तड़का लगाकर भी दिल्ली में केजरीवाल की मिट्टी पलीद करने की उम्मीद पाले बैठी है। अलबत्ता भाजपा की इस रणनीति का असर चुनाव में चाहे जो भी हो, लेकिन उसने केजरीवाल को उसके एजेंडे पर जवाब देने को मजबूर तो कर ही दिया है। जामिया हिंसा के वक्त से इस मुद्दे पर चुप्पी साधे रखने वाले केजरीवाल को आखिरकार यह तो कहना पड़ ही गया है कि शाहीन बाग में जारी धरने-प्रदर्शन की वजह से दिल्ली की आम जनता को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

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