प्रदीप सांगवान : हिमालय में फेंके कचरों की सफाई के संकल्प की कहानी, प्रधानमंत्री भी कर चुके हैं तारीफ
प्रदूषण एक ऐसी समस्या है जिससे निपटना सामूहिक सहभागिता के बिना संभव नहीं। हिमालय घूमने के दौरान पर्यटकों द्वारा फेंके गए कचरे को साफ करने का बीड़ा एक युवक ने उठाया। haryana pradeep sangwan Healing Himalayas Foundation
शिमला, 25 सितंबर : 'मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंजिल मगर, लोग साथ आते गए और कारवां बनता गया।' मजरूह सुल्तानपुरी ने ये पंक्ति न जाने कितने साल पहले लिखी होगी, लेकिन यह शेर सार्थक साबित कर दिखाया है, हिमालयन इलाके को को स्वच्छ करने की कसम खाने वाले युवा प्रदीप सांगवान ने। प्रदीप और उनकी पूरी टीम ने हिमालय के अलग-अलग इलाकों में फेंके गए कचरे की सफाई का जिम्मा उठा रखा है। प्रदीप ने जो सफर अकेले शुरू किया था उसमें अब पूरी टीम का साथ मिल रहा है। हीलिंग हिमालया फाउंडेशन के साथ मिलकर टूरिस्ट स्पॉट को स्वच्छ करने का मिशन अंजाम तक पहुंचाया जा रहा है। (फोटो सौजन्य- फेसबुक @HealingHimalayas)

युवाओं की टोली ने शुरू किया काम
हरियाणा का आदमी जब हिमालय की यात्रा पर निकल पड़े तो इसमें भागीरथ प्रयास और भीष्म संकल्प दोनों जरूरी है। खास कर वैसे हालात में जब हिमालय का इलाका साफ करने का बीड़ा उठाया जाए। दरअसल, हरियाणा के युवक ने हिमालयी क्षेत्र से कूड़े, कचरे को साफ करने का मिशन शुरू किया है। सुनने में ये भले ही अजीब लगे, लेकिन युवाओं की टोली पर्यटकों के कारण गंदे हुए इलाकों में जाती है और फेंकी गई बोतलें और दूसरी चीजें जमा कर इलाके को स्वच्छ करती है।

संस्था की शुरुआत छह साल पहले हुई
प्रदीप सांगवान की हीलिंग हिमालया फाउंडेशन पर्यटकों द्वारा छोड़े गए कचरे के हिमालय को साफ करने के मिशन पर है। छह साल पहले हीलिंग हिमालय फाउंडेशन की स्थापना करने वाले सांगवान ने हिमाचल प्रदेश में पांच सामग्री वसूली केंद्रों (material recovery facilities) की स्थापना की है।

एक दिन में कितना कचरा ?
हरियाणा के गुरुग्राम में रहने वाले 37 वर्षीय सांगवान बताते हैं, लगभग सभी केंद्रों पर दैनिक आधार पर 1.5 टन गैर-बायोडिग्रेडेबल कचरा जमा होता है। कचरा जमा करने से एक फायदा वायु प्रदूषण और मिट्टी में जमा होने वाले कचरे से बचाव है। उन्होंने कहा कि अगर हम कचरा जमा न करें तो इसे लैंडफिल या खुली हवा में जला दिया जाता।

जब प्रधानमंत्री ने प्रदीप के योगदान को सराहा
प्रदीप सांगवान के भागीरथ यत्न को सरकार भी सम्मान दे रही है। दिसंबर 2020 में "मन की बात" के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रदीप और उनके फाउंडेशन की प्रशंसा की थी। सांगवान का कहना है, उनकी परियोजनाएं स्वैच्छिक दान पर टिकी हैं, ग्रामीण हिमालयी क्षेत्र में सफाई अभियान, अपशिष्ट प्रबंधन और अन्य गतिविधियां चलाई जा रही हैं।
नीचे सुनें पीएम मोदी ने प्रदीप की प्रशंसा में क्या कहा--
कैसे काम करती है टीम
अपने काम के सिलसिले में प्रदीप सांगवान बताते हैं कि हर साल दिसंबर में अगले साल के लिए प्लान तैयार कर लिया जाता है। कैलेंडर तैयार होने के बाद वॉलंटियर्स की टीम यात्रा की योजना बनाते हैं। ट्रेकिंग के लिए ऊपर जाते समय टीम के सदस्य इधर-उधर फेंकी गई प्लास्टिक बोतलें और बाकी कचरा इकट्ठा करती है।

कचरा फैलाते हैं पर्यटक
बकौल प्रदीप हिमालय के इलाके में घूमने आने वाले पर्यटक बड़ी मात्रा में प्लास्टिक की बोतलें, बहु-परत पैकेजिंग प्लास्टिक कचरा फेंक जाते हैं। कचरे को रास्ते में एक जगह पर संग्रहीत किया जाता है। अभियान समाप्त होने पर इसे कचरों के लिए बनाए गए सेंटर पर लाया जाता है।

करीब 13-14 साल पहले पड़ा बीज
हिमालय के इलाके को स्वच्छ बनाने के आइडिया पर सांगवान का कहना है कि चंडीगढ़ के डीएवी कॉलेज में पढ़ाई के दौरान वे हिमाचल प्रदेश के कुछ छात्रों के संपर्क में आए। इसके बाद करीब 13-14 साल पहले 2007-08 में हिमाचल के बारे में और जानकारी जुटानी शुरू की। 2009 में लाहौल में "गद्दी" (चरवाहा) समुदाय के लोगों के एक समूह से मुलाकात की। बकौल सांगवान, वे इस बात से प्रभावित थे कि कैसे, बहुत दूर-दराज के इलाके में भी, गद्दी समुदाय के लोग पर्यावरण की इतनी परवाह करते हैं।

भारत के अंतिम गांव में बनाया पहला केंद्र
दो साल पहले कुल्लू जिले के चितकुल के पास रकचम में Healing Himalayas Foundation ने पहला कचरा संग्रह और छँटाई यूनिट स्थापित किया। इसके बाद मंसारी (कुल्लू), पूह (किन्नौर), ताबो (स्पीति) और नारकंडा (शिमला) में चार अन्य केंद्र स्थापित किए गए। रकचम इकाई चितकुल के करीब है। चितकुल को अंतरराष्ट्रीय सीमा पर भारत के अंतिम गांव के रूप में जाना जाता है।

स्वास्थ्य देखभाल केंद्र से कम नहीं कचरा वाले सेंटर
प्रदूषण और कचरे की समस्या की गंभीरता बताते हुए प्रदीप भावी योजना के बारे में बताते हैं कि आने वाले दिनों में दूरदराज के स्थानों पर दो से तीन कचरा संग्रह और छँटाई केंद्र स्थापित होने की उम्मीद है। उन्होंने इन केंद्रों का महत्व स्कूल या प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल केंद्र जैसा बाया। उन्होंने कहा कि अभी भी कचरे को रीसाइक्लिंग के लिए अन्य राज्यों में ले जाना पड़ता है। इस कारण बहुत अधिक कार्बन उत्पन्न होता है। जिला स्तर पर ठोस अपशिष्ट संग्रह, भंडारण, अलगाव और रीसाइक्लिंग का के लिए इको सिस्टम विकसित करने की जरूरत है।

अगले साल दो और कचरा संग्रह और छँटाई केंद्र
सांगवान का कहना है कि उनका फाउंडेशन पर्यावरण, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, हिमाचल प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्य के वन विभाग के साथ मिलकर एक संयंत्र लगाने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा, हिमाचल प्रदेश जैसे भौगोलिक राज्य में सबसे बड़ी चुनौती भूमि प्राप्त करना है। उम्मीद है कि 2023 के अंत तक हिमाचल प्रदेश में दो कचरा संग्रह और छँटाई केंद्र स्थापित करने में सफल रहेंगे।

3.5 टन बेकार सामग्री जमा की
बकौल प्रदीप सांगवान, अक्सर ऐसे लोगों से मिलना होता है जो बीयर और अन्य कांच की बोतलों को लापरवाही से फेंक देते हैं। उनका कहना है कि कभी-कभी मवेशी उनके खुर में फंस जाने से घायल हो जाते हैं। इस साल हीलिंग हिमालय फाउंडेशन के स्वयंसेवकों ने मणिमहेश यात्रा के दौरान ठोस कचरा प्रबंधन की समस्या बढ़ती देखी। एक छोटा कदम उठाया और 3.5 टन बेकार सामग्री यानी कचरा जमा कर चंबा नगर निगम को सौंपा गया।

पर्यटक उद्देश्य के साथ यात्रा करें
Healing Himalayas Foundation के लक्ष्य के बारे में प्रदीप बताते हैं कि इनका लक्ष्य पर्यटकों को "उद्देश्य के साथ यात्रा" (travel with a purpose) के लिए संवेदनशील बनाना है। प्राकृतिक परिवेश पर प्लास्टिक और शीशे की बोतलों को फेंकने से पड़ने वाले खराब प्रभाव के बारे में अधिक जागरूक करना है।
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