Haryana Chunav: क्या हरियाणा में डगमगाने लगा कांग्रेस का भरोसा? AAP से गठबंधन पर बदल रहा स्टैंड
Haryana Election News: हरियाणा में कांग्रेस की ओर से आम आदमी पार्टी से फिर से हाथ मिलाने के संकेत दिए जा रहे हैं। जानकारी के मुताबिक हरियाणा विधानसभा चुनावों के लिए उम्मीदवार तय करने के लिए हुई कांग्रेस की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में लोकसभा में विरोधी दल के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने पार्टी नेताओं से इसकी संभावनाएं तलाशने के निर्देश दिए हैं।
उधर आम आदमी पार्टी भी कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की ओर से मिल रहे दोस्ती के ऑफर को गले लगाने को तैयार दिख रही है। हरियाणा में 5 अक्टूबर को विधानसभा चुनाव होने हैं। दोनों ही दलों की ओर से अबतक यही दावे किए जा रहे थे कि वे सभी 90 सीटों पर अपने दम पर चुनाव लड़ेंगे। लेकिन, चुनाव करीब आते ही राहुल के बदले मिजाज से लग रहा है कि कहीं न कहीं जमीनी स्तर से उम्मीदों के मुताबिक फीडबैक नहीं मिल रहे हैं।

हरियाणा पर राहुल के विचार का 'आप' ने किया स्वागत
आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने राहुल गांधी की ओर से आई खबरों के बारे में कहा है, "उनके इस कथन का मैं स्वागत करता हूं....निश्चित रूप से भारतीय जनता पार्टी को हराना हम सबकी प्राथमिकता है....इसके बारे में हमारे हरियाणा के प्रभारी संदीप पाठक, (प्रदेश अध्यक्ष) सुशील गुप्ता इसपर बातचीत करके अंतिम फैसले के बारे में सूचना केजरीवाल साहब को देंगे और उस हिसाब से निर्णय लिया जाएगा।"
इससे पहले हरियाणा में कांग्रेस के सबसे बड़े चेहरे भूपेंद्र सिंह हुड्डा यही कहते रहे हैं कि हम अकेले चुनाव लड़ेंगे और जीतेंगे। वहीं आम आदमी पार्टी भी हरियाणा की सभी 90 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुकी है।
हरियाणा में लोकसभा का चुनाव साथ लड़ चुके हैं
दरअसल, इंडिया अलायंस के तहत कांग्रेस ने लोकसभा चुनावों में हरियाणा और दिल्ली दोनों जगहों पर आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा था। दिल्ली में दोनों ही पार्टियों को लगातार तीसरी बार शून्य बटे सन्नाटा हाथ लगा। वहीं हरियाणा में कांग्रेस ने 10 में से 5 सीटें जीतीं, लेकिन आम आदमी पार्टी का खाता नहीं खुल पाया।
हरियाणा में मजबूरी में गठबंधन करना चाहती है कांग्रेस!
ऐसे में कांग्रेस ने अगर फिर से आम आदमी पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की तरफ कदम बढ़ाया है तो इसके पीछे उसकी तीन मजबूरियां हो सकती हैं।
लोकसभा चुनावों में कांग्रेस से आगे रही बीजेपी
पहली, हरियाणा की 90 विधानसभा सीटों पर लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन के बावजूद सिर्फ 42 सीटों पर बढ़त मिली थी और आम आदमी पार्टी 4 सीटों पर आगे रही थी। जबकि, बीजेपी अकेले चुनाव लड़कर भी 44 सीटों पर आगे रही थी।
जाट-दलित वोटों की दो अलग जुगलबंदी ने कांग्रेस को डराया!
दूसरी, कांग्रेस की हरियाणा की पूरी चुनावी रणनीति जाट, दलित और मुस्लिम वोट बैंक के गुणा-गणित पर टिकी है। लेकिन, विधानसभा चुनावों में आईएनएलडी ने बसपा के साथ और जन जनायक जनता पार्टी (JJP) ने चंद्रशेखर की आजाद समाज पार्टी से तालमेल किया है। इन दोनों गठबंधनों के दलित-जाट वोटों की जुगलबंदी की आशंका ने कांग्रेस को अंदर ही अंदर परेशान किया है।
हरियाणा कांग्रेस की गुटबाजी भी बड़ी समस्या
तीसरी, हरियाणा में कांग्रेस की सबसे बड़ी समस्या उसकी गुटबाजी है। हुड्डा खेमा पूरी तरह से प्रदेश संगठन पर हावी दिखता है। गुटबाजी से छुटकारा पाने के लिए कांग्रेस ने किसी को सीएम का चेहरा नहीं बनाया है। पिछली बार भी पार्टी ने ऐसा किया था, लेकिन हुड्डा फिर भी नहीं माने थे।
इस बार कुमारी शैलजा बार-बार संकेत दे रही हैं कि चुनाव जीतने की स्थिति में पार्टी उन्हें मुख्यमंत्री बनाए। वह लोकसभा सांसद होने के बावजूद विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए उतावली रही हैं। बीजेपी भी कांग्रेस को ललकार रही है कि वह दलित नेता शैलजा को मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करे।
शायद इन्हीं मजबूरियों से निपटने के लिए राहुल गांधी को पार्टी के हाथ में चुनाव से पहले ही झाड़ू थमा देने में भलाई नजर आ रही है। वहीं आम आदमी पार्टी को इस गठबंधन में यह फायदा नजर आ रहा है कि भले ही लोकसभा चुनाव में जीत का स्वाद नहीं चख पाई हो, विधानसभा में उसकी एंट्री की संभावना जरूर बढ़ सकती है।












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