खेल-खेती से आगे बढ़ा हरियाणा, शिक्षा और कौशल विकास में भी लहरा रहा परचम
हरियाणा प्रदेश की पहचान मेहनतकश किसानों, दूध-दही के खाने, खेल के मैदान में दमकते खिलाड़ियों और सरहद पर बलिदानी युवाओं से होती रही है। इसलिए कहा जाता है कि देसां म्ह देश हरियाणा, जित दूध दही खाणा। जय जवान, जय किसान। लेकिन, इसकी पहचान अब शिक्षा जगत में उत्कृष्ट कार्यों के लिए भी होने लगी है। इसकी एक मिसाल हैं, प्रोफेसर राघवेंद्र तंवर।
प्रो. तंवर को साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए साल-2022 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। ये हरियाणा के लाखों युवाओं के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं हैं। आखिर शिक्षित और आत्मनिर्भर युवाओं से ही तो एक सशक्त राज्य की पहचान बनती है।

किसी प्रदेश का उज्जवल-भविष्य इसी बात से तय होता है कि वहां के युवा कितने शिक्षित, सक्षम और काबिल हैं। अपने वर्तमान को गढ़ते, पढ़े-लिखे युवा ही भविष्य की आकृति तैयार करते हैं। युवाओं की आत्मनिर्भरता ही उन्हें सशक्त बनाने की कुंजी है। युवा शक्ति जितनी शिक्षित, प्रबल और कौशल में निपुण होगी, समाज उतना ही प्रगतिशील होगा।
आज हरियाणा प्रदेश में युवाओं को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के साथ-साथ करियर संवारने के अनेक विकल्प उपलब्ध हैं। शिक्षा की अहमियत को समझते हुए सरकार ने हरियाणा में शिक्षा के क्षेत्र को आज की जरूरतों के अनुसार अपग्रेड और आधुनिक बनाने का काम कर दिखाया है। हरियाणा के शैक्षिक विकास की दिशा में पीएम-श्री स्कूलों की शुरुआत एक मील का पत्थर साबित होता दिख रहा है।
पीएम-श्री स्कूलों की शुरुआत हरियाणा से हुई
हरियाणा ही देश का पहला राज्य है, जहां सबसे पहले पीएम-श्री विद्यालयों की स्थापना हुई है। केंद्रीय शिक्षा एवं कौशल विकास मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने 124 पीएम-श्री विद्यालयों का लोकार्पण किया था, जबकि इसके दूसरे चरण में 128 अन्य विद्यालयों को आधुनिक बनाए जाने का लक्ष्य है। इस योजना के तहत पीएम श्री विद्यालयों में 2 करोड़ रुपये की धन-राशि से स्मार्ट क्लास, कम्प्यूटर-प्रयोगशाला, पुस्तकालय और खेल मैदान जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।
कुछ साल पहले तक हरियाणा के छात्रों को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए, दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ता था। लेकिन, हरियाणा की सरकार ने केंद्र सरकार के सहयोग से प्रदेश के छात्रों की इस कठिनाई को कुछ हद तक दूर कर दिया है। सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सोनीपत का भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, आधुनिक फैशन के क्षेत्र में, पंचकूला का राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान, आयुर्वेद अध्ययन के क्षेत्र में पंचकूला का राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान और पशु चिकित्सा एवं विज्ञान के क्षेत्र में हिसार का लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान विश्वविद्यालय कुछ ऐसे अग्रणी संस्थान हैं, जो इन क्षेत्रों में देश के अन्य नामी संस्थानों को टक्कर देते हैं।
परंपरागत शिक्षा के अतिरिक्त वैकल्पिक कौशल विकास में भी हरियाणा नए आयाम स्थापित कर रहा है। पृथला में स्थापित विश्वकर्मा कौशल विकास विश्वविद्यालय इस दिशा में एक सफल प्रयास है। इस विश्वविद्यालय में डेढ़ सौ से भी ज़्यादा पाठ्यक्रमों के लिए हज़ारों छात्रों के अध्ययन की व्यवस्था है। यहां छात्रों के कौशल विकास पर काम किया जाता है। यहां उपलब्ध अनेक रोज़गारपरक कोर्स युवाओं को इतना हुनरमंद बना रहे हैं, कि वे खुद को आत्मनिर्भर बना सकें।
हरियाणा का नया शैक्षिक परिदृश्य प्रदेश और केंद्र सरकार के समवेत प्रयासों का नतीजा है। इस प्रदेश में करियर को लेकर कभी चिंतित दिखाई देते युवाओं के चेहरों पर आज उमंग के भाव छलक रहे हैं। हरियाणा के युवा ना केवल आत्म-निर्भर हो रहे हैं, बल्कि अपने उत्कृष्ट कौशल और योग्यताओं के दम पर प्रदेश में विकास के पहिये को भी गतिमान कर रहे हैं।












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