Harvard University में नहीं होगा विदेशी छात्रों का एडमिशन, ट्रंप ने क्यों लिया फैसला? 788 भारतीय का क्या होगा
Trump Vs Harvard University: ट्रंप प्रशासन ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी को विदेशी छात्रों के दाखिले से रोक दिया है। यह कदम यूएस डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) की ओर से जारी एक जांच के तहत उठाया गया है। प्रशासन ने विश्वविद्यालय पर हिंसा को बढ़ावा देने, यहूदी विरोधी गतिविधियों (Antisemitism) और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी से संबंध होने के गंभीर आरोप लगाए हैं। वहीं ट्रंप सरकार के इस फैसले से दुनियाभर के छात्र जो अभी हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे हैं उनके झटका लगा है। उनकी करियर अधर में लटक गया है।

इस वजह से लिया गया फैसला
ट्रंप सरकार में गृह सुरक्षा सचिव क्रिस्टी नोएम ने इस फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि, हार्वर्ड यूनिवर्सिटी को उसके कैंपस में कथित तौर पर हिंसा को बढ़ावा देने, यहूदी विरोधी गतिविधियों को नजरअंदाज करने और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी से संपर्क रखने के आरोपों के चलते ट्रंप प्रशासन ने जिम्मेदार ठहराया है। प्रशासन का स्पष्ट कहना है कि, 'विदेशी छात्रों को दाखिला देना किसी विश्वविद्यालय का अधिकार नहीं, बल्कि एक विशेषाधिकार है और जब यह विशेषाधिकार कानून और राष्ट्रहित के विरुद्ध इस्तेमाल हो, तो उस पर कार्रवाई जरूरी है। हार्वर्ड को कई बार अवसर दिया गया कि वह उचित और जिम्मेदार कदम उठाए, लेकिन उसने इन आग्रहों को नजरअंदाज किया। इस लापरवाही के परिणामस्वरूप, अब उसकी 'स्टूडेंट एंड एक्सचेंज विज़िटर प्रोग्राम (SEVP)' की मान्यता रद्द कर दी गई है, जिससे वह अब अंतरराष्ट्रीय छात्रों का नामांकन नहीं कर सकेगा। यह निर्णय देशभर के सभी शैक्षणिक संस्थानों के लिए एक स्पष्ट और गंभीर संदेश है राष्ट्र की सुरक्षा, सामाजिक सद्भाव और कानून के पालन से कोई भी संस्था ऊपर नहीं है।'
भारत पर क्या होगा असर?
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2024-2025 में कुल 6,800 अंतरराष्ट्रीय छात्र विश्वविद्यालय में पढ़ रहे हैं, जो कुल नामांकन का 27% है। इनमें से 788 छात्र भारतीय हैं, जिनका भविष्य अब संकट में है। सरकार के इस कदम से वर्तमान में पढ़ रहे छात्रों को दूसरे विश्वविद्यालय में ट्रांसफर करना पड़ सकता है या फिर उनका लीगल स्टेटस रद्द हो सकता है।
हार्वर्ड ने क्या कहा?
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने इस फैसले को प्रतिशोधात्मक कार्रवाई (Retaliatory Action) बताया है और कहा, यह कदम गैरकानूनी है। हमारे अंतरराष्ट्रीय छात्र विश्वविद्यालय और अमेरिका दोनों को अपार योगदान देते हैं। हम उन्हें विश्वविद्यालय में बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।
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ट्रंप और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के बीच विवाद
बता दें कि, डोनाल्ड ट्रंप और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के बीच पिछले कुछ दिनों से लगातार विवाद चल रहा है। अप्रैल 2025 में, डोनाल्ड ट्रंप ने हार्वर्ड को जोक बताया था और कहा था कि इसे सरकारी रिसर्च अनुबंधों से बाहर कर देना चाहिए क्योंकि यूनिवर्सिटी ने राजनीतिक हस्तक्षेप स्वीकार करने से इंकार कर दिया था। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर लिखा, हार्वर्ड अब एक सम्मानजनक शिक्षण संस्था नहीं रही। इसे दुनिया के श्रेष्ठ विश्वविद्यालयों की सूची में नहीं रखा जाना चाहिए।
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