• search
क्विक अलर्ट के लिए
नोटिफिकेशन ऑन करें  
For Daily Alerts

हरतालिका तीज 2019: ये है पूजा का श्रेष्ठ शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और व्रत कथा

|

बेंगलुरु। हरतालिका तीज भाद्र पद के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाई जाती है। इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु और कुंवारी लड़कियां अच्छा वर पाने के लिए यह हरतालिका तीज व्रत रखती है। यह व्रत निर्जला होता है। प्रत्येक पहर में भगवान शंकर का पूजन और आरती होती है।

teej

इस दिन पंचामृत भी बनता है। जिसमें घी, दही, शक्कर, दूध, शहद का इस्तेमाल होता है। हरतालिका तीज के दिन सुहागिन महिलाओं को सिंदूर, मेहंदी, बिंदी, चूड़ी, काजल सहित सुहाग पिटारा दिया जाता है। यह व्रत भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को हस्त नक्षत्र के दिन होता है।

श्रेष्ठ शुभ मुहूर्त

सुहागन महिलाओं का अत्यंत प्रिय पर्व हरतालिका तीज इस वर्ष 1 और 2 सितंबर को है। विद्वानों में तिथि को लेकर मतभेद हैं। इस साल यह व्रत पंचागों में अंतर के कारण दो दिन मनाई जाएगी। चित्रा पक्षीय कैतकी गणना से तैयार पंचांगों में हरतालिका तीज 1 सितंबर को मनाई जाएगी। जबकि अन्य पंचाग में हरतालिका तीज का व्रत 2 सितंबर को रखा जाएगा।हालांकि धर्मशास्त्र व शताब्दी पंचांग के अनुसार 1 सितंबर को हरतालिका तीज का व्रत रखना श्रेष्ठ बताया गया है।

ज्योतिष के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को हरतालिका तीज के नाम से पहचाना जाता है। पंचागीय गणना और धर्मशास्त्रीय मान्यता के आधार पर इस बार ग्रह गोचर के तिथि अनुक्रम से तृतीया तिथि को लेकर दो गणनाओं का अलग-अलग मत प्रकट हो रहा है। चित्रा पक्षीय पंचांग में हरतालिका तीज 1 सितंबर रविवार को सुबह 8.28 के बाद लगेगी।

जो अगले दिन सोमवार को सुबह 8.58 तक रहेगी। वहीं ग्रहलाघवी पद्धति से निर्मित पंचागों में 2 सितंबर को हरतालिका तीज बताई गई है। इस दिन तृतीया तिथि 2 घंटे 45 मिनट रहेगी। इसके बाद चतुर्थी तिथि लग जाएगी। 2 तारीख को आधे दिन हरतालिका तीज है। इसी दिन गणेश स्थापना होगी अत: 1 सितंबर को तीज मनाया जाना उचित है। कुछ विद्धानों का कहना है कि 'हरतालिका तीज' या 'तीजा' व्रत 1 सितंबर 2019, रविवार को है। शुभ मुहूर्त सुबह 5.27 से 7.52 तथा प्रदोष काल पूजा मुहूर्त शाम 17.50 से 20.09 तक है।

पूजा के लिए आवश्यक सामग्री

गीली काली मिट्टी या बालू रेत, बेलपत्र,शमी पत्र,केले का पत्ता,

धतूरे का फल एवं फूल,आंक का फूल,तुलसी,

मंजरी,जनैऊ,नाड़ा,वस्त्र,सभी प्रकार के फल एवं फूल पत्ते,श्रीफल,कलश,अबीर,चंदन,घी-तेल,कपूर,कुमकुम,दीपक,फुलहरा, विशेष प्रकार की 16 पत्तियां, 2 सुहाग सामग्रियों का पिटारा।

teej

हरतालिका तीज व्रत पूजा की विधि

● हरतालिका तीज प्रदोषकाल में किया जाता है। सूर्यास्त के बाद के 3 मुहूर्त को प्रदोषकाल कहा जाता है। यह दिन और रात के मिलन का समय होता है।

● हरतालिका पूजन के लिए भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की बालू रेत व काली मिट्टी की प्रतिमा हाथों से बनाएं।

● पूजास्थल को फूलों से सजाकर एक चौकी रखें और उस चौकी पर केले के पत्ते रखकर भगवान शंकर, माता पार्वती और भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें।

● इसके बाद देवताओं का आह्वान करते हुए भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश का षोडशोपचार पूजन करें।

● सुहाग की पिटारी में सुहाग की सारी वस्तु रखकर माता पार्वती को चढ़ाना इस व्रत की मुख्य परंपरा है।

● इसमें शिवजी को धोती और अंगोछा चढ़ाया जाता है। यह सुहाग सामग्री सास के चरण स्पर्श करने के बाद ब्राह्मणी और ब्राह्मण को दान देना चाहिए।

● इस प्रकार पूजन के बाद कथा सुनें और रात्रि जागरण करें। आरती के बाद सुबह माता पार्वती को सिन्दूर चढ़ाएं व ककड़ी-हलवे का भोग लगाकर व्रत खोलें।

पौराणिक कथा

लिंग पुराण की एक कथा के अनुसार मां पार्वती ने अपने पूर्व जन्म में भगवान शंकर को पति रूप में प्राप्त करने के लिए हिमालय पर गंगा के तट पर अपनी बाल्यावस्था में अधोमुखी होकर घोर तप किया। इस दौरान उन्होंने अन्न का सेवन नहीं किया। काफी समय सूखे पत्ते चबाकर काटी और फिर कई वर्षों तक उन्होंने केवल हवा पीकर ही जीवन व्यतीत किया। माता पार्वती की यह स्थिति देखकर उनके पिता अत्यंत दुखी थे।

इसी दौरान एक दिन महर्षि नारद भगवान विष्णु की ओर से पार्वतीजी के विवाह का प्रस्ताव लेकर मां पार्वती के पिता के पास पहुंचे जिसे उन्होंने सहर्ष ही स्वीकार कर लिया। पिता ने जब मां पार्वती को उनके विवाह की बात बतलाई तो वे बहुत दु:खी हो गईं और जोर-जोर से विलाप करने लगीं।

फिर एक सखी के पूछने पर माता ने उसे बताया कि वे यह कठोर व्रत भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कर रही हैं जबकि उनके पिता उनका विवाह विष्णु से कराना चाहते हैं। तब सहेली की सलाह पर माता पार्वती घने वन में चली गईं और वहां एक गुफा में जाकर भगवान शिव की आराधना में लीन हो गईं।

भाद्रपद तृतीया शुक्ल के दिन हस्त नक्षत्र को माता पार्वती ने रेत से शिवलिंग का निर्माण किया और भोलेनाथ की स्तुति में लीन होकर रात्रि जागरण किया। तब माता के इस कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें दर्शन दिए और इच्छानुसार उनको अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार कर लिया।

कुंआरी लड़कियां भी करती है व्रत

मान्यता है कि इस दिन जो कुंआरी लड़कियां विधि-विधानपूर्वक और पूर्ण निष्ठा से इस व्रत को करती हैं, वे अपने मन के अनुरूप पति को प्राप्त करती हैं। साथ ही यह पर्व दांपत्य जीवन में खुशी बरकरार रखने के उद्देश्य से भी मनाया जाता है।

मेहंदी लगाने और झूला झूलने की प्रथा

उत्तर भारत के कई राज्यों में इस दिन मेहंदी लगाने और झूला झूलने की प्रथा है। विशेषकर उत्तरप्रदेश के पूर्वांचल और बिहार में मनाया जाने वाला यह त्योहार करवा चौथ से भी कठिन माना जाता है, क्योंकि जहां करवा चौथ में चांद देखने के बाद व्रत तोड़ दिया जाता है, वहीं इस व्रत में पूरे दिन निर्जल व्रत किया जाता है और अगले दिन पूजन के पश्चात ही व्रत तोड़ा जाता है। इस व्रत से जुड़ी एक मान्यता यह है कि इस व्रत को करने वाली स्त्रियां पार्वतीजी के समान ही सुखपूर्वक पतिरमण करके शिवलोक को जाती हैं।

केले के पत्तों से मंडप बनाने की परंपरा

इस दिन व्रत करने वाली स्त्रियां सूर्योदय से पूर्व ही उठ जाती हैं और नहा-धोकर पूरा श्रृंगार करती हैं। पूजन के लिए केले के पत्तों से मंडप बनाकर गौरीशंकर की प्रतिमा स्थापित की जाती है। इसके साथ ही माता पार्वतीजी को सुहाग का सारा सामान चढ़ाया जाता है। रात में भजन-कीर्तन करते हुए जागरण कर 3 बार आरती की जाती है और शिव-पार्वती विवाह की कथा सुनी जाती है।

व्रती को शयन का निषेध

इस व्रत के व्रती को शयन का निषेध है। इसके लिए उसे रात्रि में भजन-कीर्तन के साथ रात्रि जागरण करना पड़ता है। प्रात:काल स्नान करने के पश्चात श्रद्धा एवं भक्तिपूर्वक किसी सुपात्र सुहागिन महिला को श्रृंगार सामग्री, वस्त्र, खाद्य सामग्री, फल, मिष्ठान्न एवं यथाशक्ति आभूषण का दान करना चाहिए। हरतालिका तीज की पूजा को आप किसी पंडित से करवा सकते हैं या फिर आप स्वयं भी इसे कर सकते हैं।

जीवनसंगी की तलाश है? भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें - निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!

देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
English summary
Hartalika Teej 2019: This is the best auspicious time of worship,method of worship, and fast story.
For Daily Alerts
तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
Enable
x
Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
X
We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Oneindia sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Oneindia website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more