कूटनीतिक भंवर में कतर: भारत को महंगा पड़ सकता है ट्रंप का 'खेल'

नई दिल्ली। अरब जगत में इस समय कूटनीतिक तूफान आया हुआ है। बहरीन, सऊदी अरब, मिस्र, संयुक्त अरब अमीरात, यमन, लीबिया और मालदीव ने सोमवार को कतर से राजनयिक रिश्ते तोड़ लिए।

सबसे पहले बहरीन ने कतर से अपने संबंध तोड़ने का ऐलान किया। इन देशों ने कतर पर अल कायदा, आईएस और मुस्लिम ब्रदरहुड जैसे गुटों का समर्थन करने का आरोप लगाया है।

भारतीयों को हो सकती है बड़ी समस्या

भारतीयों को हो सकती है बड़ी समस्या

कूटनीतिक रिश्‍ते तोड़ने वाले देशों में से कुछ ने कतर के विमानों के अपनी वायुसीमा में प्रवेश पर रोक लगा दी है, जबकि अन्‍य कई देशों ऐसा कदम उठाने जा रहे हैं। आपको बता दें कि कतर कुल आबादी करीब 25 लाख है, इनमें करीब साढ़े लाख भारतीय हैं। कतर में पैदा हुए राजनयिक संकट के चलते भारतीयों को बड़ी समस्‍या का सामना करना पड़ सकता है।

कतर संकट के भारत पर ये होंगे प्रभाव

कतर संकट के भारत पर ये होंगे प्रभाव

  • कतर की 25 लाख की कुल आबादी में 90 फीसदी लोग भारत, नेपाल और बांग्लादेश के प्रवासी कामगार हैं।
  • भारत सबसे ज्यादा कच्चा तेल सऊदी अरब से लेता है और सबसे ज्यादा प्राकृतिक गैस कतर से।
  • कतर में मौजूदा संकट के चलते कच्चे तेल और गैस की कीमतों पर असर पड़ सकता है।
  • खाड़ी देशों में कार्यरत लाखों भारतीयों के रोजगार पर भी पड़ सकता है असर।
  • भारत कतर को करीब हर साल करीब 9;00 मिलियन डॉलर का निर्यात करता है। हालांकि, पिछले दो सालों में इसमें काफी कमी है।
  • आपको बता दें कि कतर से भारत के 13 शहरों में हर हफ्ते 102 यात्री विमान आते हैं।

चिंता भारतीयों के बारे में

चिंता भारतीयों के बारे में

हालांकि, विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज ने भारतीयों को भरोसा दिलाया है कि यह हमारे लिए कोई चुनौती नहीं है। यह खाड़ी देशों का आंतरिक मामला है। हमारी चिंता भारतीयों के बारे में है। आपको बता दें कि कतर में 2022 का फुटबॉल वर्ल्‍ड कप खेला जाना है, जिसके लिए तैयारियां जारी हैं। इस वर्ल्‍ड के लिए चल रहे निर्माण कार्यों में बड़ी संख्‍या में भारतीय कार्य कर रहे हैं। अगर मौजूदा संकट नहीं सुलझा तो कतर में होने वाले फुटबॉल विश्‍व कप पर भी खतरा हो सकता है।

खुलकर कतर के विरोध में खड़े हुए ट्रंप

खुलकर कतर के विरोध में खड़े हुए ट्रंप

कतर के साथ कूटनीतिक रिश्‍ते खत्‍म किए जाने के सऊदी अरब और मिस्र जैसे देशों के कदम का अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने खुलकर समर्थन किया है। वह ऐसे संकेत भी दे रहे हैं कि यह सब उन्‍हीं के इशारे पर किया जा रहा है। उन्‍होंने इस संबंध में एक के बाद एक तीन ट्वीट किए हैं।

पहले ट्वीट में ट्रंप ने कुछ दिनों पहले के अपने सऊदी अरब दौरे का जिक्र करते हुए लिखा है- यह देखकर अच्‍छा लग रहा है कि सऊदी किंग और अन्‍य 50 देशों के साथ बातचीत सार्थक रही। उन्‍होंने कहा था कि वे फंडिंग (आतंकियों को फंडिंग) के खिलाफ कड़े कदम उठाएंगे।

दूसरे ट्वीट में ट्रंप ने लिखा- ...चरमपंथ और विभिन्‍न संदर्भ कतर की ओर इशारा कर रहे थे। संभवत: यह आतंकवाद की भयावयता के खात्‍मे की शुरुआत है।

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