'रेप तो रेप है, चाहे वो पति ने ही क्यों ना किया हो', गुजरात हाई कोर्ट ने किस फैसले को लेकर की ये सख्त टिप्पणी
Gujarat high court News:गुजरात हाई कोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि बलात्कार (रेप) एक गंभीर अपराध है, भले ही यह पीड़िता के पति द्वारा ही क्यों ना किया गया है। उन्होंने कहा कि, दुनियाभर के कई देशों में वैवाहिक बलात्कार को अवैध माना गया है।
8 दिसंबर को एक फैसले में गुजरात हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति दिव्येश जोशी ने एक महिला की जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिस पर अपने बेटे द्वारा अपनी पत्नी के खिलाफ कथित यौन उत्पीड़न के लिए उकसाने का आरोप था।

न्यायमूर्ति दिव्येश जोशी ने याचिका पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि, 'एक आदमी एक आदमी है और एक काम एक काम होता है। ठीक उसी तरह रेप तो रेप है। चाहे वह किसी पुरुष द्वारा किया गया हो, या फिर महिला के पति द्वारा किया गया हो।'
गुजरात हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि हमारे समाज में कुछ हरकतों को जैसे पीछा करना, छेड़छाड़ करना, मौखिक या शारीरिक हमला या उत्पीड़न को मामूली अपराध के तौर पर देखा जाता है। लेकिन ये अफसोस की बात है। ऐसे अपराधों को हम सिर्फ तुच्छ या सामान्यीकृत करते हैं। यौन अपराधों के लिए लड़के तो लड़के ही रहेंगे, उन्हें हम कैसे नजरअंदाज कर सकते हैं।
बता दें कि पिछले कुछ वक्त में सुप्रीम कोर्ट ने भी उन याचिकाओं पर फैसला दिया है, जो भारतीय दंड संहिता की धारा 375 के अपवाद से संबंधित हैं, जो किसी व्यक्ति द्वारा अपनी पत्नी के साथ जबरन यौन संबंध को बलात्कार कानून के दायरे से अलग रखती है।
जबकि जनहित याचिकाओं (पीआईएल) के एक समूह ने विवाहित महिलाओं के खिलाफ भेदभाव के आधार पर प्रतिरक्षा खंड की वैधता को चुनौती दी है। मई 2022 में दिल्ली हाई कोर्ट का एक खंडित फैसला भी अंतिम फैसले के लिए शीर्ष अदालत के समक्ष लंबित है।
सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दायर याचिकाओं में से एक है, जिसमें एक व्यक्ति जिसके खिलाफ अपनी पत्नी के साथ कथित तौर पर बलात्कार करने के मुकदमे को मार्च 2022 में कर्नाटक हाई कोर्ट ने मंजूरी दे दी थी।
इस मामले में तत्कालीन भाजपा शासित कर्नाटक सरकार ने पिछले नवंबर में अपना हलफनामा दायर किया था, जिसमें पति के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने का समर्थन किया गया था।












Click it and Unblock the Notifications