Gujarat election 2022: गुजरात चुनाव में AAP को मिले 6% से अधिक वोट तो बन जाएगी राष्ट्रीय पार्टी
Gujarat assembly election 2022 dates: गुजरात विधानसभा चुनाव आम आदमी पार्टी की राष्ट्रीय राजनीति के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण साबित होने जा रहा है। गुजरात में अरविंद केजरीवाल की पार्टी ने 6% वोट भी जुटा लिए तो उसे राष्ट्रीय दल के रूप में मान्यता मिल जाएगी। पिछले चुनावों में कुछ राज्यों में अच्छे प्रदर्शनों की वजह आम आदमी पार्टी की यह दावेदारी काफी मजबूत हुई है। आइए जानते हैं कि राष्ट्रीय दल की मान्यता प्राप्त करने के लिए वह कौन सी शर्तें हैं, जिसे लगता है कि आम आदमी पार्टी गुजरात चुनाव में प्राप्त कर लेगी।

गुजरात से चमक सकती हैआम आदमी पार्टी की राष्ट्रीय राजनीति
2017 के गुजरात विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली थी और वह सिर्फ 0.1% वोट शेयर ही हासिल कर सकी थी। लेकिन, बीते पांच वर्षों में दिल्ली और पंजाब में सत्ताधारी दल ने गुजरात में अपनी स्थिति में काफी सुधार किया है। पिछले साल सूरत में हुए स्थानीय निकाय के चुनाव में उसने इस प्रदेश में अपनी उभरती ताकत दिखाई थी। 120 सीटों में से वह ना केवल 27 सीटें जीती थी, बल्कि उसे 28.5% वोट भी मिले थे। बाकी लोकल बॉडी चुनावों में भी उसे कुल मिलाकर 13.9% मत मिले थे। 2022 के विधानसभा चुनाव में उसकी नजरें कांग्रेस के कोर वोटरों और शहरी इलाकों में भाजपा के भी एक वर्ग के वोटरों पर टिकी हैं। इसलिए पूरी तरह से यह आसार हैं कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की पार्टी इसबार गुजरात में अपने प्रदर्शन में काफी सुधार करेगी।

गुजरात में 6% वोट से मिल सकता है राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा
आम आदमी पार्टी को अभी राष्ट्रीय दल के तौर पर मान्यता हासिल नहीं है। 2024 के आम चुनावों को लेकर पार्टी के नेताओं की महत्वाकांक्षाएं काफी बढ़ी हुई हैं। इस बार के गुजरात विधानसभा चुनावों में यदि आम आदमी पार्टी ने गुजरात में कुल मिलाकर 6% या इससे ज्यादा वोट जुटा लिए तो उसे राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिल जाएगा। क्योंकि, दिल्ली और पंजाब में वह भारी बहुमत से साथ सत्ता में है और इसी साल हुए गोवा विधान सभा चुनाव में उसे 6.77% वोट प्राप्त हुए थे। गोवा में पार्टी के दो विधायक भी जीते थे। अलबत्ता वह 40 में से 39 सीटों पर चुनाव लड़ी थी, लेकिन 35 पर जमानतें जब्त हो चुकी थीं। गुजरात चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी उत्तराखंड के रास्ते भी राष्ट्रीय पार्टी बनने की सोच रही थी, लेकिन काफी जोरदार प्रचार के बाद भी वह 3% से कुछ ही ज्यादा वोट जुटा पाई थी। यूपी चुनाव में तो उसका प्रदर्शन बहुत ही बुरा रहा था।

राष्ट्रीय पार्टी के तौर पर मान्यता कैसे मिलती है ?
चुनाव आयोग के प्रावधानों के मुताबिक राष्ट्रीय दल के रूप में मान्यता प्राप्त करने के लिए किसी भी पार्टी को कम से कम चार राज्यों के पिछले विधानसभा चुनावों में 6% या उससे अधिक वोट हासिल करना अनिवार्य है और पिछले लोकसभा चुनाव में कम से कम 4 सीटें जीती होनी चाहिए। या फिर पिछले लोकसभा चुनाव में संबंधित दल को कम से कम 2% वोट प्राप्त होना चाहिए, जो कि कम से कम 4 राज्यों में हों। या फिर लोकसभा चुनाव में चार या चार से अधिक राज्यों में 6% वोट पाप्त होने चाहिए। या फिर लोकसभा की कुल सीटों में कम से कम 2% सीटों पर जीत होनी चाहिए और ये सीटें कम से कम 4 राज्यों में से जीते हुए होने चाहिए।

गुजरात चुनाव से पहले AAP का प्रदर्शन
गुजरात में 6% वोट हासिल करने के साथ ही आम आदमी पार्टी पहली शर्त को पूरी कर लेगी। लोकसभा में उसके एक भी सांसद नहीं है। लेकिन, वह नियमों की दूसरी शर्त पूरी करती है, जिसमें पिछले लोकसभा चुनाव में कम से कम 4 राज्यों में कम से कम 2% वोट वाली शर्त है। क्योंकि, लोकसभा चुनावों पार्टी ने दिल्ली और पंजाब के अलावा गोवा और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ में 2% से ज्यादा वोट पाया था। गोवा में 2019 के लोकसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को 3% वोट मिले थे और चंडीगढ़ में भी उसने 3% वोट ही हासिल किया था।

आम आदमी पार्टी से कैसे बदला गुजरात का समीकरण
गुजरात विधानसभा चुनाव में भाजपा इसबार लगातार सातवीं जीत हासिल करने के लक्ष्य के साथ मैदान में उतरी है और 2017 की तुलना में कांग्रेस चुनाव मैदान में फिलहाल बहुत ही सुस्त नजर आ रही है। ऐसे में आम आदमी पार्टी को प्रदेश में बीजेपी के खिलाफ एक बड़ी चुनौती की तरह देखा जा रहा है और यह माना जा रहा है कि उसकी मजबूती के पीछे कांग्रेस की कमजोरी है। लेकिन, तथ्य यह भी है कि ग्रामीण इलाकों और आदिवासी बेल्ट में आज भी कांग्रेस की पकड़ काफी मजबूत है और वहां आम आदमी पार्टी का फिलहाल कोई वजूद नजर नहीं आता। यही नहीं, यह मान लेना भी जल्दबाजी है कि आम आदमी पार्टी सिर्फ कांग्रेस के चलते ही मजबूत हो रही है, भाजपा के जनाधार से उसे फायदा नहीं हो रहा।

राष्ट्रीय राजनीति के लिए महत्वपूर्ण होगा गुजरात चुनाव
गुजरात के पिछले 6 चुनावों में सीटों के नजरिए से पिछला चुनाव भाजपा के लिए सबसे बुरा रहा था, जब पार्टी को सिर्फ 99 सीटें ही मिली थीं। लेकिन, वोट शेयर के मामले में यह उसका तीसरा बेहतरीन परफॉर्मेंस (2002 में 49.85%, 2007 में 49.12% और 2017 में 49.05%) था। जबकि, कांग्रेस के लिए 2017 का प्रदर्शन 1990 के बाद सबसे अच्छा था और उसने 77 सीटें भी जीती थीं और 41.44% वोट भी लिए थे। लकिन, इस बार आम आदमी पार्टी ने इस पूरे समीकरण को बदला है। इसलिए, गुजरात विधानसभा का यह चुनाव आने वाले दिनों में राष्ट्रीय राजनीति के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण साबित होने वाला है।












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