गुजरात: मुकेश अंबानी के जीजा जिन्होंने 906 वोटों के महीन अंतर से जीता चुनाव
नई दिल्ली। गुजरात विधानसभा चुनाव के परिणाम आ गए हैं। परिणाम बीजेपी के पक्ष में हैं। बीजेपी ने जहां 99 सीटें जीत कर बहुमत हासिल कर लिया है वहीं कांग्रेस को 77 सीटों के साथ संतोष करना पड़ा है। इन चुनाव परिणामों के बीच एक सीट ऐसी भी थी जो कई मायनों में खास थी। ये सीट है बोताड एसेंबली सीट। यहां बोताड तालुका में बीजेपी के कद्दावर नेता सौरभ पटेल पांचवीं बार चुनाव जीता है। उन्होंने अपने प्रतिद्वंदी को सिर्फ 906 वोटों से मात दी है। खास बात ये है कि सौरभ बीजेपी के कद्दावर नेता होने के साथ साथ देश के अमीरों से शुमार अनिल अंबानी और मुकेश अंबानी के जीजा भी है। यही वजह है जो इस सीट के परिणामों को खास बनाती है। जाने सौरभ पटेल के बारे में सब कुछ...

सिर्फ 906 मतों के मामूली अंतर से जीते हैं सौरभ
लगातार चार बार विधायक रहे थे पटेल नेता सौरभ चार बार विधायक रह चुके हैं और इस बार 5वीं बार 906 मतों के मामूसी अंतर से जीते हैं। सौरभ बोटाद से तीन बार के विधायक रहे हैं। इससे पहले जब 2012 में चुनाव हुए, तो वो अकोटा से विधायक बने। बता दें कि रिश्ते में वो मुकेश अंबानी और अनिल अंबानी के जीजा लगते हैं। सौरभ पर हमेशा बाहरी होने का आरोप लगता रहा है लेकिन खुद सौरभ मानते हैं कि पहली बार 1998 में जब वो यहां से चुनाव लड़े थे, तो बाहरी होना मुद्दा था, लेकिन बाकी की जीत उनके काम की बदौलत ही मिली है। उन्होंने इस बार कांग्रेस के डीएम कलाथिया को 906 मतों के अंतर से हराया है।

अनिल अंबानी की बहन लगती हैं इला अंबानी
सौरभ का अंबानी परिवार से भी नाता है। वे धीरूभाई अंबानी के बड़े भाई रमनिकभाई अंबानी के दामाद हैं। इस रिश्ते से वे मुकेश और अनिल अंबानी की बहन के पति हुए। सौरभ की पत्नी इला अंबानी का कहना है कि, हम जानते हैं कि हम इससे भी बेहतर कर सकते थे, लेकिन जीत जीत होती है और हम अंतिम रूप से जीत चुके हैं। बता दें कि 59 वर्षीय सौरभ आनंदीबेन सरकार के वक्त मंत्री थे, लेकिन 206 में विजय रूपा नी के मुख्यमंत्री बनते ही उन्हें मंत्री से हटा दिया गया था। सौरभ ने एमबीए किया हुआ है। इसके पहले भी सौरभ 2007 में कापी महीन अंतर से जीते थे, जबकि 2012 में उन्होंने वडोदरा शहर सीट से चुनाव लड़ा था और आसासनी से जीत हासिल की थी। अबतक उन्होंने सभी बड़े मंत्रालय संभाले। जिसमें वित्त, ऊर्जा, प्रेट्रोकेमिकल और उद्योग शामिल थे। वह वाइब्रेंट गुजरात कार्यक्रम का भी मुख्य चेहरा रहे हैं।

जीत का अंतर था काफी महीन
इस बार भी जीत हार के बीच का फासला काफी महीन था। बीजेपी के प्रवक्ता के मुताबिक एक वक्त तो ऐसा आया जब हार जीत के बीच का अंतर सिर्फ 50 रह गया। लेकिनअंत में वह बैलेट पेपर राउंड में जीत गए। कांग्रेस ने पहले सौरभ के खिलाफ इस सीट से मनहर पटेल को उतारा था लेकिन नामांकन के अंतिम समय में ही कांग्रेस ने अपना कैंडीडेट बदल दिया। सौरभ के खिलाफ खड़े डीएम कलाथिया बतोड जिले का कांग्रेस अध्यक्ष हैं। साथ ही वे पेशे से एक किसान और तेल मिल के मालिक हैं।

वे क्षेत्रीय मुद्दे जिन्होंने बीजेपी को जीत दिलाने में मदद की
इस सीट पर कांग्रेस में आपसी खींचतान का फायदा सौरभ पटेल को मिला। सौरभ पटेल बोटाद के पुराने विधायक रहे हैं। पिछला चुनाव उन्होंने यहां से भले ही नहीं लड़ा था, लेकिन लोग उनको मानते हैं। पहले सीट पर पाटीदार आंदोलन का प्रभाव पड़ा था, लेकिन चुनाव से ठीक पहले दिनेश बांभणिया ने पाटीदार अनामत आंदोलन समिति छोड़ दी, जिसका कांग्रेस उम्मीदवार पर नकारात्मक असर हुआ।
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